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किसानों के आर्थिक विकास को योगी का गुरुमंत्र
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मेरठ। उत्तर प्रदेश में पांच दिनों तक 27 जिलों से गुजरने वाली गंगा यात्रा के सहारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसानों के आर्थिक विकास का गुरुमंत्र दे गए। मुख्यमंत्री योगी गंगा यात्रा को विकास यात्रा कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि गंगा यात्रा गंगा किनारे रहने वाले किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम होगी। मेरठ के नौ गांवों में गंगा किनारे रहने वाले किसानों को फलदार वृक्ष लगाने के लिए अनुदान की व्यवस्था की जाएगी। इस बात को हस्तिनापुर में प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने भी दोहराया।
गंगा किनारे सर्वाधिक उर्वरा भूमि होने से 40 फीसदी आबादी निवास करती है। सरकार हर जिले में गंगा नर्सरी स्थापित करने जा रही है। इस नर्सरी से किसानों को नि:शुल्क फलदार पौधे दिए जाएंगे। अगर कोई किसान इन पौधों को अपनी खेती में लगाता है तो हर महीने अनुदान दिया जाएगा। वहीं, तीन वर्ष बाद जब तक फल नहीं आते अनुदान की व्यवस्था जारी रहेगी। फल आने के बाद सरकार ही इन फलों की मार्केटिंग और एक्सपोर्ट का काम देखेगी, जिससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे देश की जीडीपी में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का योगदान होगा। इसी को लेकर प्रदेश सरकार किसानों को मार्केटिंग से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने के लिए गंगा यात्रा के माध्यम से जोड़ने में लगी हैं।
प्रदर्शनी में दिखा गंगा गांवों का मॉडल
इसके अलावा हस्तिनापुर में गंगा गांवों में हो रहे विकास की प्रदर्शनी लगाकर मॉडल दिखाए गए। जिला पंचायती राज कार्यालय की ओर से ‘गंगा यात्रा वेस्ट हब स्टॉल लगाया गया। जिसमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट हेतु गंगा गांवों से ई-रिक्शा द्वारा कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा निस्तारण मॉडल को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी को प्रमुख सचिव परिवहन, नोडल अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने देखा। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में ओपन जिम की व्यवस्था के लिए मॉडल दिखाया गया। वहीं, महिलाओं को समूह में घरेलू उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इससे बढ़ावा मिल सके।
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गंगा किनारे सर्वाधिक उर्वरा भूमि होने से 40 फीसदी आबादी निवास करती है। सरकार हर जिले में गंगा नर्सरी स्थापित करने जा रही है। इस नर्सरी से किसानों को नि:शुल्क फलदार पौधे दिए जाएंगे। अगर कोई किसान इन पौधों को अपनी खेती में लगाता है तो हर महीने अनुदान दिया जाएगा। वहीं, तीन वर्ष बाद जब तक फल नहीं आते अनुदान की व्यवस्था जारी रहेगी। फल आने के बाद सरकार ही इन फलों की मार्केटिंग और एक्सपोर्ट का काम देखेगी, जिससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे देश की जीडीपी में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का योगदान होगा। इसी को लेकर प्रदेश सरकार किसानों को मार्केटिंग से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने के लिए गंगा यात्रा के माध्यम से जोड़ने में लगी हैं।
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प्रदर्शनी में दिखा गंगा गांवों का मॉडल
इसके अलावा हस्तिनापुर में गंगा गांवों में हो रहे विकास की प्रदर्शनी लगाकर मॉडल दिखाए गए। जिला पंचायती राज कार्यालय की ओर से ‘गंगा यात्रा वेस्ट हब स्टॉल लगाया गया। जिसमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट हेतु गंगा गांवों से ई-रिक्शा द्वारा कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा निस्तारण मॉडल को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी को प्रमुख सचिव परिवहन, नोडल अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने देखा। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में ओपन जिम की व्यवस्था के लिए मॉडल दिखाया गया। वहीं, महिलाओं को समूह में घरेलू उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इससे बढ़ावा मिल सके।
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