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गणतंत्र दिवस पर शहीद स्मारक पर छाया अंधेरा
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घंटाघर गुलजार, शहीद स्मारक पर अंधेरे की मार
- गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सन्नाटा, जिम्मेदार विभागों ने अभी तक नहीं किया कोई काम
मेरठ। गणतंत्र दिवस को लेकर सोमवार को पूरा शहर उत्साहित दिखा। जश्न मनाने के लिए घंटाघर समेत कई स्थानों पर रंग-बिरंगी रोशनी की गई, जहां लोग परिवारों के साथ पहुंचे और सेल्फी के रूप में यादों में सहेज लिया। घंटाघर गुलजार दिखा। दरअसल, 15 अगस्त और 26 जनवरी को हर साल जगमग करने का प्रबंध प्रशासन करता है। वहीं घंटाघर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अंधेरा छाया हुआ था। हर मामले में औपचारिकताएं पूरी करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
शहीद स्मारक शहर का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। इसका ऐतिहासिक महत्व है। बावजूद इसके अफसरों की उदासीनता बता रही है कि वे गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस को किस तरह से तबज्जो देते हैं। स्मारक की उपेक्षा में एक भी विभाग ऐसा नहीं है, जो इसमें शामिल न हो। इसके विकास के कार्य जिला प्रशासन के स्तर पर अटके हुए हैं, जबकि पर्यटन विभाग द्वारा कई वर्ष पहले स्वदेश दर्शन योजना के तहत 1857 की क्रांति की कहानी को लाइट एंड शो अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है। एमडीए को यहां अमर जवान ज्योति की तर्ज पर ज्योति जलानी थी लेकिन बात फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी है। यही नहीं, राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के अधिकारियों ने हाल ही में संग्रहालय खोले जाने की घोषणा के बाद सोमवार को साप्ताहिक अवकाश मनाया।
जिला प्रशासन को तो खैर इसको समझने का वक्त ही नहीं है। वह तो उन कामों में व्यस्तता दिखाता है, जिनके क्रियान्वयन को लेकर मातहत खानापूरी ज्यादा करते हैं। शाम को कुछ लोग शहीद स्मारक इस उम्मीद में पहुंच गए कि मंगलवार को गणतंत्र दिवस के मद्देनजर वहां कुछ चहल-पहल होगी लेकिन उनकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। आने वाले दिनों में कोई आरटीआई कार्यकर्ता इस बारे में सक्रिय पहल कर कुछ फैसला कराने में सफल हुआ तो यही अधिकारी आदेशों का पालन करने में कोताही नहीं बरतेंगे।
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- गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सन्नाटा, जिम्मेदार विभागों ने अभी तक नहीं किया कोई काम
मेरठ। गणतंत्र दिवस को लेकर सोमवार को पूरा शहर उत्साहित दिखा। जश्न मनाने के लिए घंटाघर समेत कई स्थानों पर रंग-बिरंगी रोशनी की गई, जहां लोग परिवारों के साथ पहुंचे और सेल्फी के रूप में यादों में सहेज लिया। घंटाघर गुलजार दिखा। दरअसल, 15 अगस्त और 26 जनवरी को हर साल जगमग करने का प्रबंध प्रशासन करता है। वहीं घंटाघर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अंधेरा छाया हुआ था। हर मामले में औपचारिकताएं पूरी करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
शहीद स्मारक शहर का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। इसका ऐतिहासिक महत्व है। बावजूद इसके अफसरों की उदासीनता बता रही है कि वे गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस को किस तरह से तबज्जो देते हैं। स्मारक की उपेक्षा में एक भी विभाग ऐसा नहीं है, जो इसमें शामिल न हो। इसके विकास के कार्य जिला प्रशासन के स्तर पर अटके हुए हैं, जबकि पर्यटन विभाग द्वारा कई वर्ष पहले स्वदेश दर्शन योजना के तहत 1857 की क्रांति की कहानी को लाइट एंड शो अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है। एमडीए को यहां अमर जवान ज्योति की तर्ज पर ज्योति जलानी थी लेकिन बात फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी है। यही नहीं, राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के अधिकारियों ने हाल ही में संग्रहालय खोले जाने की घोषणा के बाद सोमवार को साप्ताहिक अवकाश मनाया।
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जिला प्रशासन को तो खैर इसको समझने का वक्त ही नहीं है। वह तो उन कामों में व्यस्तता दिखाता है, जिनके क्रियान्वयन को लेकर मातहत खानापूरी ज्यादा करते हैं। शाम को कुछ लोग शहीद स्मारक इस उम्मीद में पहुंच गए कि मंगलवार को गणतंत्र दिवस के मद्देनजर वहां कुछ चहल-पहल होगी लेकिन उनकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। आने वाले दिनों में कोई आरटीआई कार्यकर्ता इस बारे में सक्रिय पहल कर कुछ फैसला कराने में सफल हुआ तो यही अधिकारी आदेशों का पालन करने में कोताही नहीं बरतेंगे।
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