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डिग्री वाले डॉक्टर ने नहीं की गलती: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने फेवी क्विक से चिपकाई थी चोट, अस्पताल ने हटाया

Sun, 23 Nov 2025 03:15 AM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, मेरठ
माई सिटी रिपोर्टर, मेरठ Published by: विकास कुमार Updated Sun, 23 Nov 2025 03:15 AM IST
सार

सीएमओ द्वारा गठित दो डॉक्टरों की जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है। जांच समिति का कहना है कि यह साबित नहीं हो सका कि घाव पर फेवी क्विक लगाई गई थी या नहीं। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने यह रिपोर्ट नियोजन एवं बजट के निदेशक को लखनऊ भेज दी है। 

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Class IV employee not doctor applied Feviquick to child injury hospital removed him
दर्द से कहराता बच्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दो साल के मासूम मनराज सिंह की आंख के ऊपर लगी चोट को फेवी क्विक से चिपकाने के आरोप के मामले में बच्चे के पिता जसप्रिंदर सिंह ने कार्रवाई से इनकार किया है। सीएमओ का कहना है कि अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने उपचार किया था। उसे हटा दिया गया है। बच्चे के पिता इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं उन्होंने कार्रवाई न करने की बात लिख दी है।

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रिपोर्ट भेजी गई लखनऊ
वहीं, सीएमओ द्वारा गठित दो डॉक्टरों की जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है। जांच समिति का कहना है कि यह साबित नहीं हो सका कि घाव पर फेवी क्विक लगाई गई थी या नहीं। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने यह रिपोर्ट नियोजन एवं बजट के निदेशक को लखनऊ भेज दी है। इस मामले में लोकप्रिय अस्पताल के डॉ. सिद्धार्थ के भी बयान दर्ज किए गए। उनका कहना है कि जब उन्होंने घाव देखा तो उसमें टांके लगे नहीं थे। कुछ मलहम जैसा लगा हुआ था। उन्होंने वह मलहम जैसा हटाकर बच्चे की आंख के पास टांके लगा दिए। उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह मलहम जैसा फेवी क्विक है।

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यह है मामला
जागृति विहार एक्सटेंशन निवासी सरदार जसप्रिंदर सिंह ने बुधवार को सीएमओ से शिकायत की थी कि सोमवार को उनके दो साल के बेटे मनराज सिंह के घर के बाहर खेलते हुए दाईं आंख के पास चोट लग गई थी। आरोप था कि टांके लगाने की जगह घाव भाग्यश्री अस्पताल में चिकित्सीय स्टाफ ने फेवी क्विक से चिपका दिया। दर्द बंद नहीं हुआ तो उन्होंने लोकप्रिय अस्पताल में दिखाया। वहां फेवी क्विक हटाने में तीन घंटे लग गए। इसके बाद टांके लगाए गए। इस मामले में सीएमओ ने दो सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसमें एक एसीएमओ और दूसरे जिला अस्पताल के डॉक्टर थे।

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