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सपा समर्थकों में रार : विधानसभा चुनाव में कैसे लगेगी नैया पार, गुटबाजी ऐसी कि प्रदर्शन में भी नहीं आते एकसाथ

Mon, 26 Jul 2021 03:20 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 26 Jul 2021 03:20 PM IST
सार

जिला पंचायत और फिर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सपा की गुटबाजी जाहिर हो चुकी है। इसकी भनक सपा के आलाकमान को है। हार के कारणों की राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट भेज दी गई है,  सूत्रों की मानें तो उस रिपोर्ट में भी गुटबाजी को साफ तौर पर लिखा गया है।

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Clash among SP supporters: Groupism among Sp supporters may affect the party assembly elections
sp leaders in meerut - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ में सपा नेताओं की गुटबाजी खत्म नहीं  हो रही है। ब्लॉक प्रमुख और पंचायत चुनाव में करारी हार मिल चुकी है। अब विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, मगर गुटबाजी जारी है। विरोध-प्रदर्शन करने भी सपा नेता एक मंच पर नहीं आते हैं। इसी गुटबाजी की वजह से सपा हाईकमान की भी नाराजगी झेल चुके हैं, पर सुधार नहीं हो रहा है।
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जिले में सपाइयों के कई गुट बने हैं, जो अलग-अलग बैठकें करते हैं। विरोध प्रदर्शन भी इनका अलग-अलग होता है। हाल ही में सांसद आजम खान को रिहा करने की मांग के लिए सपाइयों ने प्रदर्शन किया। इनमें पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, राष्ट्रीय सचिव युवजनसभा आदि रहे। इसमें न तो सपा जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह थे न ही पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर और न ही अतुल प्रधान।
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डालूहेड़ा में सपा के सर्व समाज के समारोह में भी ऐसा ही हुआ। जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह व पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर पहुंचे, लेकिन बुलावे के बावजूद गुलाम मोहम्मद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। ऐसा पिछले काफी समय से हो रहा है।
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इनके अलावा इनसे छोटे स्तर पर भी ऐसे ही कई गुट और हैं। ये छोटे गुट भी अलग-अलग ही रहते हैं। कभी साथ मंच साझा नहीं करते। पार्टी को जिले में मजबूत बनाने में यह गुटबाजी कहीं न कहीं नुकसानदेह साबित हो सकती है।

जिला पंचायत और फिर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में यह जाहिर हो चुका है। इसकी भनक सपा के आलाकमान को है। हार के कारणों की राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट भेज दी गई है,  सूत्रों की मानें तो उस रिपोर्ट में भी गुटबाजी को साफ तौर पर लिखा गया है।

जिलाध्यक्ष को लेकर भी पिछले साल खूब रस्साकशी चली थी। हालांकि फिर से पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह पर ही भरोसा जताया गया था। उनके लिए असली चुनौती अब है। आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा।

सब साथ होंगे 
सभी सपाई भाजपा की जन विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। अलग-अलग विरोध हो रहा है, लेकिन सभी पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। अलग-अलग ही सही, लेकिन पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। सपा  को जिताने के लिए सब एक साथ होंगे।  -राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, सपा

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