फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   city backward in cleanleness

नगर निगम की नाकामी से स्वच्छता में पिछड़ा शहर   

Fri, 05 May 2017 10:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 05 May 2017 10:51 AM IST
विज्ञापन
city backward in cleanleness
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही, योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने, सफाई कर्मचारियों की कमी और लापरवाही के कारण क्रांति धरा साफ कूड़े के ढेर में तब्दील होती जा रही है। सफाई सर्वेक्षण 2017 में शहर 339वें स्थान पर पहुंच गया है। इस स्थिति के लिए शहर की जनता का पूरा सहयोग नहीं मिलना भी है। वहीं मध्यप्रदेश का इंदौर शहर स्वच्छ शहरों में पहले स्थान पर है।

विज्ञापन


शहर में केंद्र सरकार की तरफ से समय-समय पर लाई गई योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च हो गया, लेकिन नगर निगम और प्रशासन शहर को स्वच्छ नहीं कर सका। केंद्र सरकार के स्वच्छता मिशन के तहत कराए गए सफाई सर्वेक्षण 2017 में शहर को 2 हजार अंकों में से मात्र 708 अंक ही हासिल हो सके। शहर को हरा भरा व स्वच्छ बनाने का जिम्मा उठाने वाला नगर निगम प्रशासन इसके लिए गंभीर नजर नहीं आया। लंबे समय से न तो शहर में कूड़े का निस्तारण सही ढंग से हो पा रहा है और न ही घरों से डोर टू डोर कूड़ा उठाया जा रहा है। नियमानुसार सुबह और शाम होने वाली सफाई एक समय भी सही से नहीं हो पा रही।
विज्ञापन


डेयरियों पर अधिकारी मेहरबान
शहर में कई सौ अवैध डेयरियां संचालित हैं। अधिकारियों की मेहरबानी के कारण इन पर किसी भी आदेश का फर्क नहीं पड़ता। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी डेयरियां शहर से बाहर नहीं हो सकी हैं। डेयरियों से निकलने वाले गोबर को नालियों में बहाया जा रहा है। इससे नाले और नालियां चौक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


निगम की नीति नहीं स्पष्ट
कूड़ा निस्तारण को आगे आने वाली कंपनियां और फर्म निगम की सही और स्पष्ट नीति नहीं होने से पीछे हट जाती है। तमाम अनियमितताओं के चलते ही शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहा है।

इस हालत के लिए ये है कारण
- शहर के सभी घरों से डोर टू डोर कूड़ा नहीं उठाया जाना। 
- अधिकारियों, कर्मचारियों की हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से नहीं लगना।
- शहर की नियमानुसार दो समय सुबह और शाम सफाई नहीं होना। 
- गीले व सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग डस्टबिन नहीं मुहैया कराया जाना।
- कूड़ा निस्तारण प्लांट चालू नहीं होना।
- शहर में अवैध डेयरियों की भरमार होना। 
- सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगना, कूड़े को डंपिंग ग्राउंड से पहले ही डंप करना।
- शहर में टायलेट सिस्टम दुरुस्त नहीं होना।
- स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक नहीं करना।
- कूड़ा गाड़ियों में जीपीआरएस न होना।

अब बन सकती है बात 
डोर टू डोर कूड़ा उठाने का टेंडर हो चुका है। शहर के दो लाख घरों में नगर निगम वेट और ड्राई कूड़े के लिए डस्टबिन उपलब्ध कराएगा। मामूली शुल्क पर कंपनी के कर्मचारी घरों से कूड़ा लेकर जाएंगे। इसके अलावा बायोमेट्रिक्स प्रणाली से कर्मचारियों की हाजिरी लगाने की व्यवस्था होने जा रही है। कूड़ा ढोने वाली गाड़ियों में जीपीआरएस लगाया जा रहा है। इसके अलावा कूड़ा निस्तारण प्लांट निर्माण का भी टेंडर हो चुका है। निगम अधिकारियों ने 2018 के सर्वे में शहर की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जाहिर की है।  

स्वच्छता अभियान पर सपा ने नहीं किया काम
मेरठ 339 वें स्थान पर आया है गनीमत है। क्योंकि सपा सरकार में जिस तरह की नीति अपनाई गई थी, उससे तो इससे भी बुरा हाल होना था। स्वच्छता अभियान पर कोई काम नहीं किया गया। जो दो रंग की डस्टबिन अब बांटी जा रही हैं, वह पहले भी बांटी जा सकती थी। अब हम सब मिलकर इस पर काम करेंगे। -राजेंद्र अग्रवाल, सांसद मेरठ

सपा सरकार में लटकी रहीं योजनाएं
प्रदेश में सपा सरकार के समय निगम की योजनाएं धन के अभाव में लटकी रहीं। इसके चलते कोई भी काम न होने से शहर गंदे शहरों की सूची में 339वें स्थान पर पहुंच गया। अब शहर को चमकाया जाएगा। अगले साल होने वाले सर्वे में शहर ऊंची छलांग लगाएगा। -हरिकांत अहलूवालिया, मेयर

आगे बेहतर करेंगे प्रदर्शन
जनवरी 2017 में सर्वेे हुआ था। तब तक शहर की सफाई से संबंधित योजनाओं के टेंडर नहीं हो सके थे। अब डोर टू डोर कूड़ा उठाने, बायोमेट्रिक हाजिरी, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस तकनीक, कूड़ा निस्तारण प्लांट आदि के टेंडर हो चुके हैं। 2018 में शहर बेहतर पॉजिशन हासिल करेगा। -देवेंद्र कुमार कुशवाह, उप नगर आयुक्त 


जनप्रतिनिधि, तंत्र और जनता दोषी
मेरठ के स्वच्छता में पिछड़ने के लिए जनप्रतिनिधि, तंत्र और जनता तीनों दोषी हैं। न तो जनप्रतिनिधियों ने इस पर गंभीरता दिखायी और न ही तंत्र ने इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार कर इच्छा शक्ति से काम किया। जनता ने भी स्वच्छता के प्रति सहयोग नहीं दिया। सब साथ काम करें तो मेरठ एक साल में पूरी तरह बदल सकता है। -डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed