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यूपी: गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक पंचतत्व में विलीन, शामली में छाया शोक, पढ़िए उनके संघर्ष की कहानी

Thu, 20 May 2021 04:22 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 20 May 2021 04:22 PM IST
सार

गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हुए। उनके निधन से पूरे शहर में शोक छाया हुआ है। उन्होंने वर्ष 1985 में गठवाला खाप की कमान संभाली थी। इसके बाद वे कई आंदोलनों में सक्रिय रहे। पढ़िए उनके संघर्ष की कहानी।

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Chaudhary Baba Harikshan Malik of Ghatwala Khap was cremated in Shamli
गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक पंचतत्व में विलीन हुए। - फोटो : amar ujala

विस्तार

शामली में गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक का लिसाढ गांव के श्मशान घाट पर गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया। बाबा हरिकिशन मलिक के अंतिम संस्कार में गठवाला खाप के काफी लोग शामिल हुए। वहीं सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर पंवार ने बाबा हरिकिशन मलिक के आवास पर उनके परिजनों का ढांढस बंधाया।

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गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक का 94 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया था। वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। वहीं बुधवार को उन्होंने लिसाढ़ गांव स्थित अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली। आज सुबह गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
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गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक ने वर्ष 1985 में गठवाला खाप की कमान संभाली थी। वर्ष 1986 में भाकियू द्वारा बिजली दरों को लेकर चलाए गए आंदोलन में सक्रिय हो गए थे। भाकियू के करमूखेड़ी से लेकर मेरठ सीडीए मैदान समेत कई आंदोलन में सक्रिय रहे। बाद में भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र टिकैत से मनमुटाव के चलते अपना अराजनैतिक संगठन राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन बनाकर किसान हितों के लिए संघर्ष किया। 
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दो दिन पूर्व तबीयत खराब होने से उन्हें ऑक्सीजन की कमी हो गई थी, बाद में उन्हें शामली में डॉ. डीपी गुप्ता के यहां लाया गया था। यहां ऑक्सीजन उपलब्ध न होने से बुढ़ाना के प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। जहां से उनको लिसाढ़ गांव ले आए थे। बुधवार दोपहर तीन बजे उनका निधन हो गया। निधन की सूचना पर जिले में शोक छा हुआ है।

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