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Meerut News: महाशिवरात्रि पर त्रयोदशी संग चतुर्दशी, तीन महायोगों का अद्भुत मिलन

Fri, 13 Feb 2026 02:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 02:45 AM IST
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Chaturdashi along with Trayodashi on Mahashivratri, a wonderful union of three Mahayogas
मेरठ..कंवलजीत..महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के हरिद्वार से जल लेकर मेरठ रूड़की रोड से होते हुए राजस्
महाशिवरात्रि पर इस बार तीन महायोगों का अद्भुत मिलन होगा। 15 फरवरी को चार ग्रह जहां कुंभ राशि पर गोचर करेंगे, वहीं त्रयोदशी संग चतुर्दशी का संयोग इस महोत्सव को खास बनाएगा। श्रवण नक्षत्र में चतुर्दशी पड़ने से महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक भोले भक्तोें के लिए विशेष फलदायी होगा।
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महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए आस्था की डगर पर भोले भक्त निकल चुके हैं। व्रती शिव भक्त रातभर जागकर चार प्रहर की पूजा -आरती करेंगे। पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होने की वजह से भक्तों के हर कामनाओं की पूर्ति के योग हैं।
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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर इस बार बुध, सूर्य, शुक्र और राहु एक साथ कुंभ राशि पर गोचर करेंगे। इसके अलावा लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग और शुक्रादित्य योग का एक साथ मिलन होगा। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स के मुताबिक महाशिवरात्रि पर व्रत रखकर जलाभिषेक करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भगवान शिव पूर्ण करते हैं, ऐसी धारणा है। इस दिन व्रत और पूजा करने से कन्याओं को मनचाहे वर की भी प्राप्ति होती है। जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही है, या किसी प्रकार की बाधा आ रही है, उनके लिए महाशिवरात्रि का व्रत विशेष फलदायी हो सकता है। साथ ही शिवभक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
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- शिवपूजन से विपरीत ग्रह होते हैं शांत
- आचार्य कौशल वत्स बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से अशुभ ग्रह शांत होते हैं। महाशिवरात्रि पर विधिपूर्वक पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है। चंद्रमा के अशुभ होने से व्यक्ति को मानसिक तनाव होता है और कार्य क्षमता प्रभावित होती है, लेकिन इस व्रत शुभता आ जाती है। महाशिवरात्रि पर पूजा अर्चना से दांपत्य जीवन से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।
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इस समय करें जलाभिषेक और शिव आराधना:
- 14 फरवरी की शाम 4:02 मिनट पर त्रयोदशी आरंभ होगी, चतुर्दशी का जल 15 की शाम 05:06 आरंभ होगा।
प्रथम प्रहर : शाम 7 बजे से 9 बजे तक
द्वितीय प्रहर : रात 10 बजे से 12 बजे तक
तृतीय प्रहर: रात 1 बजे से 3 बजे तक
चतुर्थ प्रहर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
निशीथ काल: रात्रि 12:08 से 12:58 तक
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