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चार बड़े प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Dec 2016 01:48 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। लालकुर्ती के निकट जवाहर क्वार्टर्स स्थित चार बड़े प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। दरअसल, यहां की रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी ने एमडीए के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इस आदेश से बाजार में खलबली मच गई है।
जवाहर क्वार्टर्स स्थित साड़ी संसार, चावला क्लोद्स हाउस, चावला कलेक्शन और राजीव कन्फैक्शनरी को लेकर हाईकोर्ट में मामला चल रहा था। यहां की रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी ने इस प्रकरण को उठाया था। सोसायटी का कहना था कि ये प्रतिष्ठान अनाधिकृत रूप से बने हैं। यह आवासीय कालोनी है। इसका भू उपयोग आवासीय है। यहां दुकानें या शोरूम नहीं बनाए जा सकते हैं। इस बाबत एमडीए में भी फाइल चली। कार्रवाई न होने पर सोसायटी ने हाईकोर्ट का सहारा लिया। वर्ष 2010 से इस मामले में तेजी आई। इस बाबत अब हाईकोर्ट से सख्त निर्णय सुनाया है। कहा है कि यदि ध्वस्तीकरण का आदेश स्टैंड करता है तो एमडीए इन्हें ध्वस्त करे। अदालत ने कहा है कि दो माह में इस आदेश का पालन करें। पांच दिन पहले यह आदेश हुए थे। 22 दिसंबर को एमडीए अधिकारियों को ये आदेश मिल गए। एमडीए में यह क्षेत्र जोन डी में आता है। ऐसे में तत्काल जोन डी प्रभारी एपी सिंह अैर जेई कुमदेश शर्मा ने मौके पर जाकर सभी प्रतिष्ठानों का जायजा लिया।
रिफ्यूजी के लिए बनाए गए थे क्वार्टर
आजादी के बाद शरणार्थियों के लिए सरकार ने जवाहर क्वार्टर्स बनाए थे। बाद में लोग इन क्वार्टर्स को बेचते गए। चूंकि ये लालकुर्ती के सघन बाजार से सटे हैं तो इन्हें तोड़कर काफी लोगों ने यहां व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना लिए, तो काफी लोगों ने घर में ही दुकानें चला रखी हैं। नीचे दुकान और ऊपर आवास हैं। हालांकि एमडीए में यह आवासीय क्षेत्र में ही दर्ज है।
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फिर रजिस्ट्री क्यों कॉमर्शियल
अहम सवाल यह है कि जिस लाइन में चावला क्लोद्स है, उस लाइन की रजिस्ट्री कॉमर्शियल कैटेगरी में होती है। वहां का सर्किल रेट भी महंगा है, जबकि उसके सामने की लाइन की रजिस्ट्री आवासीय में होती है। इन दुकानदारों का कहना है कि एक लाख रुपये से ज्यादा का रेट यहां है। फिर यह कैसे आवासीय है। जिन दुकानों का मसला है, वे भी काफी पुरानी हैं। कई दुकान तो 20 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।
एमडीए में तलाशी फाइल
एमडीए अधिकारियाें ने इस प्रकरण की फाइल तलाश ली है। अपने बचाव में अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने तो ध्वस्तीकरण का आदेश फाइनल किया था, पर अपील में कमिश्नर ने यह आदेश निरस्त कर दिया।
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जवाहर क्वार्टर्स स्थित साड़ी संसार, चावला क्लोद्स हाउस, चावला कलेक्शन और राजीव कन्फैक्शनरी को लेकर हाईकोर्ट में मामला चल रहा था। यहां की रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी ने इस प्रकरण को उठाया था। सोसायटी का कहना था कि ये प्रतिष्ठान अनाधिकृत रूप से बने हैं। यह आवासीय कालोनी है। इसका भू उपयोग आवासीय है। यहां दुकानें या शोरूम नहीं बनाए जा सकते हैं। इस बाबत एमडीए में भी फाइल चली। कार्रवाई न होने पर सोसायटी ने हाईकोर्ट का सहारा लिया। वर्ष 2010 से इस मामले में तेजी आई। इस बाबत अब हाईकोर्ट से सख्त निर्णय सुनाया है। कहा है कि यदि ध्वस्तीकरण का आदेश स्टैंड करता है तो एमडीए इन्हें ध्वस्त करे। अदालत ने कहा है कि दो माह में इस आदेश का पालन करें। पांच दिन पहले यह आदेश हुए थे। 22 दिसंबर को एमडीए अधिकारियों को ये आदेश मिल गए। एमडीए में यह क्षेत्र जोन डी में आता है। ऐसे में तत्काल जोन डी प्रभारी एपी सिंह अैर जेई कुमदेश शर्मा ने मौके पर जाकर सभी प्रतिष्ठानों का जायजा लिया।
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रिफ्यूजी के लिए बनाए गए थे क्वार्टर
आजादी के बाद शरणार्थियों के लिए सरकार ने जवाहर क्वार्टर्स बनाए थे। बाद में लोग इन क्वार्टर्स को बेचते गए। चूंकि ये लालकुर्ती के सघन बाजार से सटे हैं तो इन्हें तोड़कर काफी लोगों ने यहां व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना लिए, तो काफी लोगों ने घर में ही दुकानें चला रखी हैं। नीचे दुकान और ऊपर आवास हैं। हालांकि एमडीए में यह आवासीय क्षेत्र में ही दर्ज है।
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फिर रजिस्ट्री क्यों कॉमर्शियल
अहम सवाल यह है कि जिस लाइन में चावला क्लोद्स है, उस लाइन की रजिस्ट्री कॉमर्शियल कैटेगरी में होती है। वहां का सर्किल रेट भी महंगा है, जबकि उसके सामने की लाइन की रजिस्ट्री आवासीय में होती है। इन दुकानदारों का कहना है कि एक लाख रुपये से ज्यादा का रेट यहां है। फिर यह कैसे आवासीय है। जिन दुकानों का मसला है, वे भी काफी पुरानी हैं। कई दुकान तो 20 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।
एमडीए में तलाशी फाइल
एमडीए अधिकारियाें ने इस प्रकरण की फाइल तलाश ली है। अपने बचाव में अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने तो ध्वस्तीकरण का आदेश फाइनल किया था, पर अपील में कमिश्नर ने यह आदेश निरस्त कर दिया।