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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Chaitr Navratr 2025: Navratri is starting from Sunday in Panch Yoga, this time Mother will ride on an elephant

Chaitr Navratr 2025: पंच योग में रविवार से हो रहा नवरात्र का शुभारंभ, इस बार हाथी पर सवार होंगी मां

Sat, 29 Mar 2025 01:13 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Sat, 29 Mar 2025 01:13 AM IST
सार

चैत्र नवरात्र का शुभारंभ रविवार से हाे रहा है। इस बार नवरात्र में विशेष योग बन रहे हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि मां शक्ति की आराधना के लिए यह विशेष अवसर है।

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Chaitr Navratr 2025: Navratri is starting from Sunday in Panch Yoga, this time Mother will ride on an elephant
Chaitra Navratri 2025 - फोटो : freepik

विस्तार

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के लिए चैत्र नवरात्र का शुभारंभ रविवार से हो रहा है। शेर की सवारी छोड़ मां इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, ऐंद्र योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग बन रहे हैं। ये लाभदायक और उन्नतिकारक योग हैं।

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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि मां शक्ति की आराधना के लिए यह विशेष अवसर है। नवरात्र में की गई पूजा से मां जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों का उद्धार करती हैं। नवरात्र में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती सहित दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार आठ दिन ही व्रत रखे जाएंगे। नवरात्र में तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है।

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ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 30 मार्च को है। इस वजह से नवरात्रि रविवार को शुरू होगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। लेकिन, द्वितीया और तृतीया तिथि 31 मार्च को एक ही दिन लग रही है। इसलिए तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है। इस कारण चैत्र नवरात्रि पर आठ दिन ही व्रत रखा जाएगा। 31 मार्च द्वितीया तिथि में मां ब्रह्मचारिणी पूजन सुबह 9:12 बजे तक होगा।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन रहेगा रेवती नक्षत्र
निर्णय सिंधु और भारतीय ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार नवरात्रि पूजन द्विस्वभाव लग्न में करना शुभ होता है। मिथुन, कन्या, धनु तथा कुंभ राशि द्विस्वभाव राशि है। अत: इसी लग्न में पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। रविवार 30 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन रेवती नक्षत्र के साथ अश्विनी नक्षत्र और ऐंद्र योग होने के कारण बेहद शुभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में इसको स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस मुहूर्त में पूजा तथा कलश स्थापना शुभ होगी।

कलश होता है सुख-समृद्धि का प्रतीक
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कालिका पुराण के अनुसार कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं। कलश के मध्य में दैवीय मातृ शक्तियां निवास करती हैं। देवता, सातों दीप, सातों समुद्र, सभी नक्षत्र, ग्रह, कुलपर्वत, गंगादि सभी नदियां, चारों वेद सभी कलश में ही स्थित हैं।

दिन के अनुसार होती है माता की सवारी
नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो रहे हैं तो मां का वाहन हाथी होता है, जो अधिक वर्षा के संकेत देता है। वहीं, यदि नवरात्र मंगलवार और शनिवार शुरू होती हैं तो मां का वाहन घोड़ा होता है। जो सत्ता परिवर्तन का संकेत देता है। इसके अलावा बृहस्पतिवार या शुक्रवार से शुरू होने पर मां दुर्गा डोली में बैठकर आती हैं। जो रक्तपात, तांडव, जनधन हानि का संकेत बताता है। बुधवार के दिन से नवरात्र की शुरुआत होती है तो मां नाव पर सवार होकर आती हैं। अपने भक्तों के सारे कष्ट को हर लेती हैं।

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विशेष तिथियां
दुर्गाष्टमी - शनिवार 5 अप्रैल
रामनवमी - रविवार 6 अप्रैल
नवरात्र पूजन तिथियां
30 मार्च : मां शैलपुत्री- प्रतिपदा
31 मार्च : मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा- द्वितीया और तृतीया तिथि का क्षय
एक अप्रैल : मां कूष्मांडा- चतुर्थी
दो अप्रैल : मां स्कंदमाता- पंचमी
तीन अप्रैल : मां कात्यायनी- षष्ठी
चार अप्रैल : मां कालरात्रि- सप्तमी
पांच अप्रैल : मां महागौरी- अष्टमी
छह अप्रैल : मां सिद्धिदात्री- नवमी
सात अप्रैल : नवरात्र समापन- दशमी

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: रविवार 30 मार्च प्रथम नवरात्र पर
पहला शुभ मुहूर्त: स्थिर कुंभ लग्न के संयोग में सूर्योदय से लेकर प्रातः 07:33 बजे तक
दूसरा शुभ मुहूर्त: लाभामृत की चौघड़िया प्रातः 09:20 से 12:25 बजे तक
विशेष और शुभ अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12: 45 बजे तक
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