सेंट्रल मार्केट: जनता बोली- कॉम्प्लेक्स तो ढहा दिया, अब अवैध निर्माण में साझीदार बने अफसरों पर की जाए कार्रवाई
Meerut News: आवास एवं विकास परिषद के सर्वे में 1500 अवैध निर्माण होने का खुलासा हुआ था, जो कि अब रडार पर हैं। इस मामले में संलिप्त रहे अफसरों पर नौचंदी थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। अब कार्रवाई का इंतजार है।
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सेंट्रल मार्केट में भ्रष्टाचार की नींव पर एक-एक कर इमारतें खड़ी होती गईं। शोरूम बनते गए और पूरा बाजार विकसित हो गया। मार्केट के 661/6 के ध्वस्तीकरण से व्यापारी सकते में हैं। कारोबारियों का कहना है कि दिवंगत व्यापारी नेता विनोद अरोड़ा की ओर से यहां कॉम्प्लेक्स में 22 दुकानें बनाई गई थीं। उन्होंने दुकानें खरीदीं और व्यावसायिक रजिस्ट्री कराई। जीएसटी, बिजली, पानी, हाउस टैक्स आदि सभी का कामर्शियल भुगतान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी दुकानें तो तोड़ दी गईं, अब अवैध निर्माण कराने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। सेंट्रल मार्केट के साथ ही शास्त्रीनगर योजना में भी 1468 अवैध निर्माण सर्वे में चिह्नित किए जा चुके हैं। ये भी अब रडार पर हैं।
आवास विकास परिषद ने यह सर्वे कराया था। शास्त्रीनगर में घरों में ही शोरूम, रेस्टोरेंट, अस्पताल, होटल, बैंक, सैलून, मर्चेंट स्टोर सहित तक कई प्रतिष्ठान अवैध रूप से संचालित हैं। आखिर ये कैसे बिना आवास विकास के अधिकारियों की साठगाांठ के तैयार हो गए। सेंट्रल मार्केट के नजदीक ही हाल ही में ज्वेलरी शोरूम भी खोल दिया गया। गली-गली में अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन्हें रोका नहीं जा रहा। यदि इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई तो पूरा शास्त्रीनगर ही बेरौनक, बदरंग और खंडहर सरीखा हो जाएगा।
कॉम्प्लेक्स मामले में हाइकोर्ट ने पांच दिसंबर 2014 को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। इस पर व्यापारी सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी परदीवाला और आर. महादेवन की खंडपीठ ने 19 नवंबर को आवास विकास परिषद से 499 भवनों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इस पर विभाग ने सर्वे कर रिपोर्ट दी थी। इसमें शास्त्रीनगर योजना के 1468 भवन में व्यावसायिक गतिविधियां मिलीं। खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2024 को सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। स्थानीय व्यापारियों को आशंका है कि अब अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों पर भी ऐसी ही कार्रवाई न हो जाए।
सेंट्रल मार्केट में कॉम्प्लेक्स को अवैध बताने वाले शिकायतकर्ता आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने जान का खतरा बताकर शनिवार एडीजी मेरठ जोन से सुरक्षा मांगी। उन्होंने बताया कि सेंट्रल मार्केट में कार्रवाई के बाद कई लोग उन्हें धमकी दे रहे हैं। इसके बाद उनकी दुकान पर एक पुलिसकर्मी तैनात कर दिया गया। लोकेश ने बताया कि यह प्रकरण लंबे समय से चल रहा था। कोर्ट की अवमानना हो रही थी। वह बार-बार कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगा रहे थे।