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सीसीएसयू के चार जिलों में होगा मूल्यांकन
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सीसीएसयू के चार जिलों में होगा मूल्यांकन
मेरठ। प्रदेश सरकार की तरफ से शुक्रवार को सभी विश्वविद्यालयों को उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने को हरी झंडी दे दी गई है। चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने भी इसको लेकर सभी जिलों के केंद्र अधीक्षकों से रिपोर्ट मांग ली है। लेकिन सीसीएसयू के परिक्षेत्र में आने वाले नौ जिलों में से पांच रेड जोन में हैं। ऐसे में यहां सिर्फ चार जिलों हापुड़, शामली, बागपत और मुजफ्फरनगर में ही मूल्यांकन संभव है। जहां-जहां ग्रीन और ओरेंज जोन हैं वहीं पर कॉपियों का मूल्यांकन शुरू हो सकता है। शासन ने इस बार 40 की जगह 60 रुपये प्रति कॉपी पारिश्रमिक तय किया है।
सीसीएसयू के परिक्षेत्र में मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्घनगर, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, और सहारनपुर जिले आते हैं। सात मई तक की बात करें तो मेरठ में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 194, गौतमबुद्घनगर में 193, गाजियाबाद में 122, शामली में 29, बुलंदशहर में 57, हापुड़ में 41, मुजफ्फरनगर में 24, बागपत में 18 और सहारनपुर में 205 थी। इनमें मेरठ, सहारनपुर, गौतमबुद्घनगर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, समेत कई जिले रेड जोन में हैं। इसके अलावा गाजियाबाद, हापुड़, शामली और मुजफ्फरनगर ओरेंज जोन में हैं। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग द्वारा शुक्रवार को जारी किए आदेश में कहा गया है कि विवि ऐसे जिलों में मूल्यांकन शुरू करा सकते हैं जहां पर ग्रीन और ओरेंज जोन हैं। इसको लेकर स्थानीय अधिकारियों से बातचीत करने के बाद समन्यवय बनाने को कहा गया है। पूरे मामले में सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने प्रशासन से इसकी पूरी लिस्ट मांगी है। ऐसे में लिस्ट के हिसाब से मेरठ और सहारनपुर मंडल के चार जिलों में ही मूल्यांकन का काम हो पाएगा। इससे विवि को कोई खास मदद नहीं मिल पाएगी। ऐसे में जो जिले अब रेड से ओरेंज जोन में आते जाएंगे वहां पर मूल्यांकन कराया जा सकेगा।
18 लाख कॉपियों का होता है मूल्यांकन
साल 2006 में सीसीएसयू की कॉपियां आगरा कूड़े के ढेर में मिलने के बाद बवाल हो गया था। प्रदेश में इसके बाद केंद्रीय मूल्यांकन की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद से कैंपस में छह से आठ केंद्र बनाकर मूल्यांकन होता रहा है। कोरोना के कारण चल रहे लॉकडाउन को देखते हुए शासन ने विवि को अपने स्तर से मूल्यांकन कराने को कहा है। जिलेवार मूल्यांकन के साथ घर से मूल्यांकन कराने पर भी विचार करने को कहा गया था। ऐसे में अगर यहां 17 मई के बाद भी लॉकडाउन नहीं खुला तो घर से मूल्यांकन कराने पर विचार हो सकता है। शिक्षक नेता डॉ. राजकुमार सांगवान और डॉ. दुष्यंत कुमार का कहना है कि ऐसे माहौल में घर से भी करा सकते हैं ताकि रिजल्ट में देरी न हो।
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मेरठ। प्रदेश सरकार की तरफ से शुक्रवार को सभी विश्वविद्यालयों को उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने को हरी झंडी दे दी गई है। चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने भी इसको लेकर सभी जिलों के केंद्र अधीक्षकों से रिपोर्ट मांग ली है। लेकिन सीसीएसयू के परिक्षेत्र में आने वाले नौ जिलों में से पांच रेड जोन में हैं। ऐसे में यहां सिर्फ चार जिलों हापुड़, शामली, बागपत और मुजफ्फरनगर में ही मूल्यांकन संभव है। जहां-जहां ग्रीन और ओरेंज जोन हैं वहीं पर कॉपियों का मूल्यांकन शुरू हो सकता है। शासन ने इस बार 40 की जगह 60 रुपये प्रति कॉपी पारिश्रमिक तय किया है।
सीसीएसयू के परिक्षेत्र में मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्घनगर, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, और सहारनपुर जिले आते हैं। सात मई तक की बात करें तो मेरठ में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 194, गौतमबुद्घनगर में 193, गाजियाबाद में 122, शामली में 29, बुलंदशहर में 57, हापुड़ में 41, मुजफ्फरनगर में 24, बागपत में 18 और सहारनपुर में 205 थी। इनमें मेरठ, सहारनपुर, गौतमबुद्घनगर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, समेत कई जिले रेड जोन में हैं। इसके अलावा गाजियाबाद, हापुड़, शामली और मुजफ्फरनगर ओरेंज जोन में हैं। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग द्वारा शुक्रवार को जारी किए आदेश में कहा गया है कि विवि ऐसे जिलों में मूल्यांकन शुरू करा सकते हैं जहां पर ग्रीन और ओरेंज जोन हैं। इसको लेकर स्थानीय अधिकारियों से बातचीत करने के बाद समन्यवय बनाने को कहा गया है। पूरे मामले में सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने प्रशासन से इसकी पूरी लिस्ट मांगी है। ऐसे में लिस्ट के हिसाब से मेरठ और सहारनपुर मंडल के चार जिलों में ही मूल्यांकन का काम हो पाएगा। इससे विवि को कोई खास मदद नहीं मिल पाएगी। ऐसे में जो जिले अब रेड से ओरेंज जोन में आते जाएंगे वहां पर मूल्यांकन कराया जा सकेगा।
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18 लाख कॉपियों का होता है मूल्यांकन
साल 2006 में सीसीएसयू की कॉपियां आगरा कूड़े के ढेर में मिलने के बाद बवाल हो गया था। प्रदेश में इसके बाद केंद्रीय मूल्यांकन की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद से कैंपस में छह से आठ केंद्र बनाकर मूल्यांकन होता रहा है। कोरोना के कारण चल रहे लॉकडाउन को देखते हुए शासन ने विवि को अपने स्तर से मूल्यांकन कराने को कहा है। जिलेवार मूल्यांकन के साथ घर से मूल्यांकन कराने पर भी विचार करने को कहा गया था। ऐसे में अगर यहां 17 मई के बाद भी लॉकडाउन नहीं खुला तो घर से मूल्यांकन कराने पर विचार हो सकता है। शिक्षक नेता डॉ. राजकुमार सांगवान और डॉ. दुष्यंत कुमार का कहना है कि ऐसे माहौल में घर से भी करा सकते हैं ताकि रिजल्ट में देरी न हो।
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