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सीसीएसयू के वाई-फाई पर पोर्न देख रहे छात्र
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 27 Dec 2015 02:11 AM IST
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चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी कैंपस में वाई-फाई का मिसयूज ज्यादा हो रहा है। छात्र यहां शिक्षा के बजाय पोर्न और सोशल साइट्स पर समय गुजार रहे हैं। मुफ्त इंटरनेट सुविधा के लिए छात्रों और छात्रसंघ पदाधिकारियों ने लंबे समय तक विवि पर दबाव बनाया था। करीब सात माह पहले उन्हें यह सुविधा मिली तो वही इसका गलत इस्तेमाल करने पर उतारू हैं।
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पासवर्ड लीक होने और सिक्योरिटी न होने से हर कोई मनमाने ढंग से वाई-फाई का फायदा उठा रहा है। हालात यह हैं कि 95 फीसदी यूजर फेसबुक और करीब 40 प्रतिशत पोर्न फिल्में देख रहे हैं। यही नहीं, डाउनलोडिंग जमकर हो रही है। अहम बात यह है कि वाई-फाई का गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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विवि कैंपस को वाई-फाई करने में लगभग 90 लाख रुपये का खर्च आया था। शुरू के दो-तीन महीने नेटवर्क की समस्या रही। बाद में स्पीड एक जीबीपीएस (गीगा बाइट पर सेकेंड) कर दी गई। इससे डाउनलोडिंग एकदम फास्ट हो गई है। वाई-फाई शुरू करने से पहले तय किया गया था कि सोशल साइट्स और पोर्न साइट्स बैन रहेंगी।
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इनकी रोकथाम के लिए फायरवॉल लगाई जाएगी। यूजर क्रिएट किए जाएंगे, जिससे इसका मिसयूज न हो सके। शुरुआत में तो इंटरनेट सबके लिए मुफ्त कर दिया गया। ट्रायल के लिए कुछ दिन चला। इसके बाद विवि निगरानी और सुरक्षा की बात को नजरंदाज कर बैठा। यही वजह रही कि कैंपस में वाई-फाई का गलत इस्तेमाल होने लगा है।
एक दिन में 8000 तक पहुंचे यूजर
वाई-फाई के लिए सर छोटूराम इंस्टीट्यूट, प्रशासनिक भवन, लाइब्रेरी और डिपार्टमेंट को लेकर पासवर्ड जारी किए गए थे, जो एक-दूसरे से होते हुए सबके पास सर्कुलेट हो गए। बाहरी लोग भी इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। एक दिन में अधिकांश 8000 तक यूजर पहुंचे हैं। तीन से चार हजार यूजर्स का रोजाना का औसत है। एजूकेशन वेबसाइट देखने का अनुपात काफी कम है। डाउनलोडिंग अधिकांश मूवी और विडियो की है।
डाउनलोडिंग के लिए लगती है भीड़
वाई-फाई से डाउनलोडिंग के लिए संकायों और लाइब्रेरी के बाहर सबसे अधिक भीड़ रहती है। हॉस्टल तक इंटरनेट एक्सेस है। कैंपस का अधिकांश हिस्सा वाई-फाई से लैस हो चुका है। ऐसे में इन जगहों पर वाई-फाई का मिसयूज किया जा रहा है।
इसलिए भी जरूरी है सख्ती
मेरठ में आईएसआई एजेंटों की गिरफ्तारी और फर्जी ढंग से आईएसडी कॉलिंग का सेंटर पकड़ने जैसे मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस मुफ्त सुविधा का गलत गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन, विवि प्रशासन इन मामलों से सबक लेने के बजाय अनजान बना बैठा है।