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CCSU: केमिस्ट्री विभाग में तैयार की शीशे को जोड़ने वाली इंटरलेयर, मिला 50 लाख का चेक, चीन से होती थी आयात

Tue, 30 Aug 2022 11:41 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 30 Aug 2022 11:41 AM IST
सार

मेरठ के सीसीएसयू विवि के नवाचार को पंख लग गए हैं। इंडस्ट्री ने इसके लिए विवि को 50 लाख का चेक दिया है। 2015 में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भारत सरकार से प्रोजेक्ट मिला था। अभी तक इंटरलेयर चीन और दूसरे देशों से मंगवाई जाती है।

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CCSU: interlayer connecting the glass prepared in the Department of Chemistry, got a check of 50 lakhs
चैक प्राप्त करते कुलपति व विभाग के प्रोफेसर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीसीएसयू कैंपस के केमिस्ट्री विभाग में हुए नवाचार की बदौलत विवि का नाम देशभर में हो गया है। प्रो. आरके सोनी और डॉ. मीनू तेवतिया ने लैब में शीशे को जोड़ने वाली इंटरलेयर (पॉलीमर से बनने वाली परत) तैयार की है। अभी तक यह इंटरलेयर बाहर देशों से आयात की जाती है। विवि के इस पेटेंट को लुधियाना की एक इंडस्ट्री को ट्रांसफर किया गया है, इसके बदले सोमवार को कंपनी की तरफ से 50 लाख रुपये का चेक दिया।

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सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने दोनों प्रोफेसर को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सार्थक करते हुए केमिस्ट्री विभाग के इस नवाचार से विवि आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दूसरे विभाग भी प्रयोगशाला के शोध को इंडस्ट्री तक पहुंचाएं।
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गाड़ियों का मेन शीशा या बड़ी बिल्डिंग, जहाजों आदि में जो शीशे लगाए जाते हैं उनमें पॉलीमर की एक विशेष परत होती है। इस परत के दो शीशों के बीच जोड़ दिया जाता है। शीशा जब टूटता है तो उसके भीतर से जो लेयर निकलती है, ये वही होती है। ये लेयर न सिर्फ शीशे को मजबूती देती है, बल्कि वह एकदम से सारा नहीं टूटता है, चिपका रहता है।
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पॉलीविनाइल ब्यूट्रील (पीवीबी) सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला इंटरलेयर उत्पाद है। चीन और दूसरे देशों से मंगाया जाता है। इन उत्पादों के मुख्य उपभोक्ता रेलवे, ऑटोमोबाइल, ऊंची इमारतों (संरचनात्मक और वास्तुशिल्प) रक्षा, विमान, समुद्री जहाजों और घरेलू अनुप्रयोग हैं।

डीओएसटी ने दिया था अनुदान
2015  में विवि के केमिस्ट्री विभाग को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की तरफ से डेवलपमेंट नोवल यूवी एंड थर्मल क्यूरेबल फॉर्मूलेशन फॉर ग्लास फॉर स्ट्रक्चरल एंड आर्किटेक्चरल एप्लीकेशन रिसर्च प्रोजेक्ट दिया गया था। इसके लिए लुधियाना की सिद्घि विनायक इंडस्ट्री की तरफ से भी 10 लाख का अनुदान दिया गया था। कुल 88 लाख का ये प्रोजेक्ट तीन साल के लिए प्रो. आरके सोनी और डॉ. मीनू तेवतिया को दिया गया था।

इंडस्ट्री ने कुलपति को सौंपा चेक
सोमवार को इस तकनीक के स्थानांतरण के बाद सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज लुधियाना के सीईओ हिमांशु गर्ग ने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को 50 लाख रुपये का चेक सौंपा। डॉ. मीनू तेवतिया ने बताया कि लैब में तीन तरह की इंटरलेयर तैयार की गई है। इसमें आर्किटेक्चरल ग्लास, ऑटोमोबाइल ग्लास और सिक्योरिटी ग्लास शामिल हैं। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह, सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. नीरज सिंघल, डॉ. स्वाति सिंह, डॉ. नाजिया तरन्नुम, डॉ. प्रियंका, डॉ. मनीषा, डॉ. मुक्ति, मोहित चौहान और डॉ. प्रियंका कक्कड़ मौजूद रहीं।
 

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