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Meerut News: सीसीएसयू ने विकसित किया डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल
Wed, 08 Jul 2026 08:28 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 08 Jul 2026 08:28 PM IST
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विद्यार्थियों में ऑनलाइन रैगिंग की समझ का वैज्ञानिक आकलन करेगा
शिक्षा विभाग के डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल और जयदेव सिंह ने तैयार किया द्विभाषी स्केल
यूजीसी एंटी-रैगिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में मिलेगा सहयोग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन रैगिंग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ''डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल'' विकसित किया है। शिक्षा विभाग के डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल एवं जयदेव सिंह द्वारा तैयार इस स्केल का विकास एवं मानकीकरण किया गया है। यह स्केल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल ने बताया कि सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग, ऑनलाइन गेमिंग, ई-मेल और अन्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के कारण रैगिंग अब केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका दायरा डिजिटल मंचों तक भी फैल गया है। डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता मापने के लिए अब तक कोई मानकीकृत उपकरण उपलब्ध नहीं था। इसी आवश्यकता को देखते हुए इस स्केल का विकास किया गया है।
स्नातक स्तर के विद्यार्थियों पर मानकीकृत इस स्केल की विश्वसनीयता और वैधता का परीक्षण वैज्ञानिक मनोमितीय सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। इसमें कुल 35 कथन शामिल हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार यह स्केल विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षक-शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षा एवं मनोविज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी शोध उपकरण साबित होगा। इसके माध्यम से शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता का स्तर मापने, कमियों की पहचान करने तथा अधिक प्रभावी एंटी-रैगिंग अभियान संचालित करने में सक्षम होंगे।
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शिक्षा विभाग के डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल और जयदेव सिंह ने तैयार किया द्विभाषी स्केल
यूजीसी एंटी-रैगिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में मिलेगा सहयोग
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन रैगिंग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ''डिजिटल रैगिंग जागरूकता स्केल'' विकसित किया है। शिक्षा विभाग के डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल एवं जयदेव सिंह द्वारा तैयार इस स्केल का विकास एवं मानकीकरण किया गया है। यह स्केल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल ने बताया कि सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग, ऑनलाइन गेमिंग, ई-मेल और अन्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के कारण रैगिंग अब केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका दायरा डिजिटल मंचों तक भी फैल गया है। डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता मापने के लिए अब तक कोई मानकीकृत उपकरण उपलब्ध नहीं था। इसी आवश्यकता को देखते हुए इस स्केल का विकास किया गया है।
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स्नातक स्तर के विद्यार्थियों पर मानकीकृत इस स्केल की विश्वसनीयता और वैधता का परीक्षण वैज्ञानिक मनोमितीय सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। इसमें कुल 35 कथन शामिल हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार यह स्केल विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षक-शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षा एवं मनोविज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी शोध उपकरण साबित होगा। इसके माध्यम से शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में डिजिटल रैगिंग के प्रति जागरूकता का स्तर मापने, कमियों की पहचान करने तथा अधिक प्रभावी एंटी-रैगिंग अभियान संचालित करने में सक्षम होंगे।
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