ठंड धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान और नीचे जाएगा। इस मौसम में सांस के साथ-साथ दिल के मरीजों को भी सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, इस मौसम में दिल के मरीजों की रक्त धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। रक्तचाप बढ़ जाता है और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी दिक्कत से बचा सकती है।
सावधान ! सर्दी का सितम झेलने को हो जाइए तैयार, बदलते मौसम में दिल का रखें खास खयाल
- अधिक ठंड में सिकुड़ने लगती हैं रक्त धमनियां
- ज्यादा रक्तचाप बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवचरण बताते हैं कि मॉर्निंग वॉक पर नियमित जाने वाले लोगों को बिस्तर छोड़ने के तुरंत बाद घर से निकलने के बजाय घर पर ही थोड़ी एक्सरसाइज कर लेनी चाहिए। गर्म कपड़ों में ही घर से बाहर निकलना चाहिए।
अगर दिल में परेशानी हो तो पहले ईसीजी कराएं, फिर भी दिक्कत हो तो टीएमटी कराएं। परेशानी खत्म न हो तो एंजियोप्लास्टी के बारे में सोच सकते हैं। करीब 60 प्रतिशत मामलों में एंजियोप्लास्टी की जरूरत नहीं होती है।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि ठंड में हार्ट तक खून पहुंचाने वाली धमनी में जमे फैट के थक्के से रक्त फ्लो रुक जाता है। रक्त न मिलने से दिल की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे धीरे-धीरे मांसपेशियों की रफ्तार कम हो जाती है। यही हार्ट अटैक का कारण बनता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ममतेश का कहना है कि दिल के मरीज सूरज निकलने के बाद ही घूमने जाएं तो बेहतर है। अपनी दवाएं जरूर समय से खाएं। सीने के बीच में दर्द हो तो ईसीजी जरूर कराएं। इसे सिर्फ गैस का दर्द न मानें।
हार्ट अटैक के लक्षण
- सीने में दर्द या ऐंठन होना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- पसीना, चक्कर आना, सांस फूलना और नींद न आना
- हाथों, कंधों, जबड़ों आदि में दर्द होना या उल्टी आना
यह करें तुरंत
- अटैक का अनुमान होते ही तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी कॉल करें
- दर्द होने पर मरीज के सीने पर हाथ रखकर पंपिंग करते हुए दबाएं
- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा लें