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Meerut News: अपंजीकृत डाक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई को अनुचित बताया, एसडीएम को ज्ञापन दिया
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मवाना। अखिल भारतीय किसान सभा ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम अंकित कुमार को ज्ञापन दिया। जिसमें जन सेवकों (अपंजीकृत डाक्टरों) के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को जनहित में अनुचित बताया है।
ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में जन सेवकों (अपंजीकृत डाक्टरों) के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। कुछ क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील लगाई गई है। यह कार्यवाही जनहित में उचित नहीं है। क्योंकि इन जनसेवकों से सिर्फ गरीब समाज का नागरिक ही सेवा लेता है। इनके पास निजी चिकित्सकों को देने के लिए फीस नहीं है। इनके कारण ही गरीबजन महंगे अस्पतालों में लुटने से बच जाता है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नगण्य हैं। उपयुक्त दवाई नहीं हैं। प्रदेश में 18 हजार नागरिकों पर एक डाक्टर तैनात है। वह भी कुछ घंटों के लिए। प्रदेश की 24 करोड़ जनसंख्या है। 12 हजार डाॅक्टरों के सहारे स्वास्थ्य सेवा नहीं चल सकती। जनसेवकों के खिलाफ कार्रवाई से जनता में रोष पैदा होगा और लाखों बेरोजगार हो जाएंगे।
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ज्ञापन में मांग की है कि झोलाछाप कहकर इनका अपमान न किया जाए। इन्हें जनसेवक का नाम दिया जाए। इन जनसेवकों को कुछ समय प्रशिक्षित कर इन्हें इस सेवा के लिए प्रमाणपत्र दिया जाए। इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। ज्ञापन देने वालों में मंडलीय सचिव जितेंद्र पाल सिंह, संग्राम सिंह, चौ. रामवीर सिंह, नरेश कुमार, मनोज धामा, जगदीश कौहला, अब्दुल्ला, राजपाल शर्मा पिंटू, विश्वजीत, गोपाल, मनजीत आदि थे।
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ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में जन सेवकों (अपंजीकृत डाक्टरों) के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। कुछ क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील लगाई गई है। यह कार्यवाही जनहित में उचित नहीं है। क्योंकि इन जनसेवकों से सिर्फ गरीब समाज का नागरिक ही सेवा लेता है। इनके पास निजी चिकित्सकों को देने के लिए फीस नहीं है। इनके कारण ही गरीबजन महंगे अस्पतालों में लुटने से बच जाता है।
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सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नगण्य हैं। उपयुक्त दवाई नहीं हैं। प्रदेश में 18 हजार नागरिकों पर एक डाक्टर तैनात है। वह भी कुछ घंटों के लिए। प्रदेश की 24 करोड़ जनसंख्या है। 12 हजार डाॅक्टरों के सहारे स्वास्थ्य सेवा नहीं चल सकती। जनसेवकों के खिलाफ कार्रवाई से जनता में रोष पैदा होगा और लाखों बेरोजगार हो जाएंगे।
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ज्ञापन में मांग की है कि झोलाछाप कहकर इनका अपमान न किया जाए। इन्हें जनसेवक का नाम दिया जाए। इन जनसेवकों को कुछ समय प्रशिक्षित कर इन्हें इस सेवा के लिए प्रमाणपत्र दिया जाए। इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। ज्ञापन देने वालों में मंडलीय सचिव जितेंद्र पाल सिंह, संग्राम सिंह, चौ. रामवीर सिंह, नरेश कुमार, मनोज धामा, जगदीश कौहला, अब्दुल्ला, राजपाल शर्मा पिंटू, विश्वजीत, गोपाल, मनजीत आदि थे।