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लंबे रूट पर दौड़ रहीं जर्जर बसें, जोखिम में यात्रियों की जान

Mon, 05 Aug 2019 04:05 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 05 Aug 2019 04:05 AM IST
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Busy buses running on long routes, passengers' lives at risk
क्षतिग्रस्त बस - फोटो : अमर उजाला

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राजदीप जाखड़
मेरठ। आगरा के निकट यमुना एक्सप्रेस वे पर जनरथ एसी बस हादसे में 29 यात्रियों की मौत के बाद रोडवेज अपने यात्रियों की सुरक्षा में उठाए जा रहे कदमों का तो खूब प्रचार कर रहा है। लेकिन बेड़े में शामिल जर्जर बसों को हटाया नहीं जा रहा है। मेरठ रोडवेज रीजन में लंबे रूटों पर भी ए ग्र्रेड की बजाय बी ग्रेड की बसें दौड़ाई जा रही हैं जो मानकों के विपरीत है। वहीं सुरक्षा के लिए जारी एडवाइजरी को भी पूरा नहीं किया जा रहा है।
इस बस हादसे ने प्रदेश सरकार को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद चेता रोडवेज विभाग नित नए सुरक्षा आदेश जारी कर रहा है। लंबे रूटों की बसों में जहां डबल ड्राइवर नियम लागू कर दिया तो वहीं ब्रीथ एनालाइजर के जरिये चालकों की अल्कोहल जांच की जा रही है। लेकिन बूढ़े एवं जर्जर हो चुके बस बेड़े पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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तीन श्रेणियों में बांटी गईं बसें
रोडवेज ने संचालन के लिए अपनी बसों को तीन श्रेणियों में बांट रखा है। 4 लाख किलोमीटर से कम चलने वाली बसों को ए ग्रेड में रखा गया है। 4 से 6 लाख किलोमीटर वाली बसों को बी और 6 किलोमीटर से 11 लाख किलोमीटर चलने वाली बसो को सी ग्रेड में रखा गया है। मेरठ रोडवेज रीजन के 790 बसों के बेड़े में केवल 61 बसें ही ए ग्रेड श्रेणी में हैं। लंबे रूटों पर केवल ए ग्रेड बसें ही दौड़ाई जा सकती हैं। लेकिन लंबे रूटों की संख्या हिसाब से ये बसें अपर्याप्त हैं। इसके चलते लंबे रूटों पर बी ग्रेड श्रेणी की बसों को भी दौड़ाया जा रहा है।
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ऐसे में नहीं हो सकता पालन
बस दुर्घटना के बाद रोडवेज एमडी ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों की जांच के लिए 31 बिंदुओं की एडवाइजरी जारी की है। इसमें बस की बॉडी, बस का फर्श, टायर, स्टेपनी, टूल बॉक्स, रिफ्लेक्टिव टेप, आगे-पीछे की लाइट, वाइपर, वीटीएस, सीट, अग्निशमन यंत्र, फिटनेस आदि शामिल किए गए हैं। लेकिन ये सभी बिंदु तभी पूरे हो सकते हैं, जब जर्जर सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा।
खटारा मिली बसें
अमर उजाला ने रविवार को भैसाली बस अड्डे पहुंचकर बसों की हालत देखी तो खराब स्थिति मिली। निगम की बसों के साथ ही अनुबंधित बसों का बुरा हाल है। किसी बस की बॉडी जर्जर हो चुकी है तो किसी के शीशे और फर्श टूटा पड़ा है। बसों की टायरों की हालत खराब है। अधिकतर बसों से स्टेपनी गायब है। पंचर होने की स्थिति में बस बीच रूट पर ही खड़ी हो जाती है। पंचर लगवाने के लिए पहिया खोलकर ही पंचर वाले के यहां ले जाना पड़ता है और सवारियों को दूसरी बस में शिफ्ट किया जाता है।

दुरुस्त करा रहे पुरानी बसें
बस हादसे के बाद जारी सुरक्षा एडवाइजरी का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। चालकों की ब्रीथ एनालाइजर से जांच की जा रही है। लंबे रूटों की बसों पर दो चालक भेजे जा रहे हैं। पुरानी हो चुकी बसों को दुरुस्त कराया जा रहा है। जर्जर अनुबंधित बस आपरेटरों को नोटिस देकर जवाब लिया जाएगा। -नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रीजन
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