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आवास विकास की लापरवाही से व्यापारी आमने सामने

Tue, 23 Feb 2021 02:22 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 02:22 AM IST
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Businessmen face to face due to negligence of housing development
आवास विकास की लापरवाही से व्यापारी आमने सामने
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मेरठ। जमीन आवास एवं विकास परिषद की है, लेकिन इसे लेकर व्यापारियों में घमासान मचा है। एक पक्ष इसे निजी संपत्ति बता रहा है तो दूसरा जमीन में मंदिर होने के कारण इसे सार्वजनिक बता रहा है। राजस्व और अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्यापित) के यहां की रिपोर्ट में जमीन को आवास एवं विकास परिषद का बताया जा रहा है। इसका न केवल विधिवत अधिग्रहण हुआ, बल्कि जमीन मालिकों ने मुआवजा भी लिया। आवास विकास जमीन पर कब्जा नहीं ले पाया और लोगों ने इस पर अवैध कब्जा कर लिया।
नई सड़क के पास खसरा नंबर 6043 की जमीन के एक 394.41 वर्ग मीटर भूखंड पर यह विवाद छिड़ा है। इस जमीन को विवेक शर्मा ने योगेश और लोकेश सैनी से 25 जनवरी को खरीद लिया था। इस भूखंड में एक मंदिर है। विवेक शर्मा पक्ष का दावा है कि यह योगेश सैनी के पूर्वजों ने बनवाया था। भूखंड बेचने से पूर्व योगेश सैनी सहित अन्य मंदिर से भगवान की मूर्तियों को ले गए। अब सेंट्रल मार्केट और कुछ धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इस मामले में विवेक शर्मा पक्ष के खिलाफ मंदिर और मूर्तियां क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाते हुए नौचंदी थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी थी।
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अब इस मामले में दोनों पक्ष आमने सामने आ गए हैं। लेकिन पूरा मामला ही इसके उलट है। राजस्व रिकार्ड और अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्यापित) के साथ ही आवास एवं विकास परिषद के रिकार्ड के मुताबिक यह जमीन आवास एवं विकास परिषद की है। वर्ष 1977 में शास्त्रीनगर क्षेत्र में 176 भूमि खसरों की जमीन अधिग्रहण की थी। इसमें खसरा नंबर 6043 भी शामिल है। ऐसे में यह भूखंड भी अधिग्रहण में आता है। इसका मुआवजा भी वितरित कर दिया गया था। लेकिन इस पर कब्जा नहीं लिया गया। जमीन के मूल मालिक लंबे समय तक इस पर काबिज रहे। बाद में इसके वारिस बदलते रहे।
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फंस गए रजिस्ट्री कराने वाले
- इस भूखंड की रजिस्ट्री कराने वाले विवेक शर्मा अब फंस गए है। क्योंकि नगर निगम का रिकार्ड देखकर उन्होंने इस प्लाट की रजिस्ट्री करा ली। योगेश सैनी पक्ष जमीन की रजिस्ट्री कराकर पैसे लेकर मेरठ से जा चुका है। अब यदि इस मामले में गहनता से जांच की जाती है तो जमीन पर आवास एवं विकास परिषद का कब्जा हो जाएगा।
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