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डेढ़ साल से भवन तैयार, एमआरआई शुरू होने का इंतजार
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मेरठ। जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट के लिए भवन तैयार हुए डेढ़ साल हो गया है, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ती है। इसके चलते उन्हें काफी परेशानी हो रही है।
प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बनाई थी। दावा किया गया था कि भवन बनने के बाद करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन यहां लगाई जाएगी। चिकित्सक और अन्य स्टाफ भी नियुक्त होगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
निजी सेंटर पर एमआरआई के तीन से 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह मुफ्त है। बाकी मरीजों के लिए दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। जिला अस्पताल में अगर यह सुविधा शुरू हो जाती है तो हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। कोरोना काल को छोड़ दिया जाए तो यहां हर साल पांच से छह लाख मरीज आते हैं, जिनमें से तीन से चार हजार मरीजों को एमआरआई की जरूरत होती है। बीपीएल कार्ड धारकों और अन्य निर्धन लोगों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। अन्य मरीजों के लिए बहुत कम शुल्क रखा जाएगा।
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सटीक जानकारी के लिए यह जरूरी
एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच कराई जाती है।
शासन के आदेश का इंतजार
एमआरआई यूनिट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की जाएगी। शासन स्तर से ही तय होना है कब और कौन इसे संचालित करेगा। इस संबंध में शासन के आदेश का इंतजार है। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बनाई थी। दावा किया गया था कि भवन बनने के बाद करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन यहां लगाई जाएगी। चिकित्सक और अन्य स्टाफ भी नियुक्त होगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
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निजी सेंटर पर एमआरआई के तीन से 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह मुफ्त है। बाकी मरीजों के लिए दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है। जिला अस्पताल में अगर यह सुविधा शुरू हो जाती है तो हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। कोरोना काल को छोड़ दिया जाए तो यहां हर साल पांच से छह लाख मरीज आते हैं, जिनमें से तीन से चार हजार मरीजों को एमआरआई की जरूरत होती है। बीपीएल कार्ड धारकों और अन्य निर्धन लोगों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। अन्य मरीजों के लिए बहुत कम शुल्क रखा जाएगा।
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सटीक जानकारी के लिए यह जरूरी
एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज और जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने में होता है। बीमारी की सटीक जानकारी लिए यह जांच कराई जाती है।
शासन के आदेश का इंतजार
एमआरआई यूनिट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू की जाएगी। शासन स्तर से ही तय होना है कब और कौन इसे संचालित करेगा। इस संबंध में शासन के आदेश का इंतजार है। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल