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जानी कलां गांव में दो मासूम सगे भाई बहन की राजवाहे में डूबने से मौत
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मेरठ/जानी। जानी कलां गांव में सोमवार शाम मासूम भाई-बहन का शव रजवाहे में मिलने से सनसनी फैल गई। तीन और चार साल के दोनों बच्चे घर से टॉफी लेने निकले थे। संदिग्ध हालात में शव बरामद होने से कई चर्चाएं हैं। हालांकि पुलिस ने इसे हादसा बताकर पल्ला झाड़ लिया है। पोस्टमार्टम कराने की जहमत भी नहीं उठाई। पुलिस का दावा कि बच्चे खेलते-खेलते रजवाहे के पास पहुंचे, जिसमें गिरकर उनकी मौत हो गई।
जानी थानाक्षेत्र के जानी कलां गांव निवासी वसीम मोबाइल टावर बनाने का काम करता है। परिवार में पत्नी चांद बीबी, चार साल का पुत्र अबूजर, तीन साल की पुत्री आयत और एक आठ माह का पुत्र है। वसीम काम से सोमवार सुबह अमृतसर निकले थे। वसीम के बड़े भाई गुलफाम ने बताया कि अबूजर और आयत दोपहर करीब तीन बजे टॉफी खरीदने के लिये पैसे लेकर पड़ोस की दुकान पर गए थे। एक घंटे बाद भी जब बच्चे वापस नहीं आए, तो मां ने तलाश शुरू की, लेकिन बच्चे नहीं मिले।
शाम करीब पांच बजे मस्जिदों से एलान कराया गया। पूरे गांव में तलाश गया। छह बजे पड़ोसी गांव चंदौरा में लोगों ने रजवाहे में बच्चों के शव देखे। जानकारी लगते ही परिजन रोते बिलखते मौके पर पहुंचे और दोनों बच्चों की पहचान की। बेटे अबूजर का शव दो किमी दूर चंदौरा गांव की तरफ एक झाड़ी में लटका मिला जबकि बेटी आयत का शव जानी कलां गांव के पास रजवाहे में किनारे पानी में पड़ा मिला।
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दो बच्चों की रजवाहे में डूबने से मौत होने की सूचना पर जानी पुलिस मौके पर गई थी। परिजन दोनों बच्चोें के शव घर ले आए थे। परिजनों ने इसे हादसा बताकर पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। -पंकज सिंह, सीओ सरधना
इतनी दूर कैसे पहुंचे मासूम... हत्या या हादसा
- मौत का राज भी दफन, पुलिस ने नहीं कराया पोस्टमार्टम
मेरठ। दो मासूमों की मौत का राज पुलिस की लापरवाही से दफन हो गया। सवाल है कि घर से करीब आधा किमी दूर रजवाहे तक मासूम कैसे चले गए, जिन्हें किसी ने देखा तक नहीं। दोनों के शव अलग-अलग जगह से मिलने से बड़ा सवाल है कि कहीं हत्या के बाद तो शवों को फेंका नहीं गया। ऐसे में ये हत्या थी या हादसा, अब इसकी जांच पुलिस कैसे कर पाएगी।
दरअसल गांव में घर के पास ही परचून की दुकान है। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि दोनों भाई-बहन टॉफी खरीदने के बजाय रजवाहे पर क्या करने गए थे। ग्रामीणों में चर्चा कि मासूमों को ले जाया गया होगा और हत्या के बाद शवों को रजवाहे में फेंका। क्योंकि सोमवार को इतनी गर्मी भी नहीं थी जो दोनों भाई बहन नहाने के लिए गए होंगे। उससे भी बड़ा सवाल है कि दो मासूमों की मौत की खबर लगने के बाद भी जानी थाना पुलिस गंभीर नहीं हुई। बच्चों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया, जिससे पता चल सकता था कि कहीं हत्या के बाद तो शवों को फेंका नहीं गया था।
कौन देगा सवालों के जवाब
परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दोनों बच्चों के शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिए। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि चंदौरा और जानी कलां के ग्रामीण इसी रजवाहे से होकर जाते है। किसी ने इन बच्चों को जाते नहीं देखा। ऐसे में ऐसे क्या कारण रहे कि बच्चे रजवाहे तक पहुंच गए।
किसी से दुश्मनी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के पिता वसीम से किसी की दुश्मनी है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इन मासूम भाई-बहन ने किसी का क्या बिगाड़ा, जो ऐसी मौत दी। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना किया और पुलिस भी पल्ला झाड़कर बैठ गई। पुलिस ने जांच पड़ताल करना भी मुनासिब नहीं समझा।
परिवार में कोहराम, मां बेहोश
दोनों बच्चों के शव मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। बच्चों की मां बेहोश हो गई। गांव में भी मातम छाया रहा। सूचना मिलने पर वसीम भी गांव के लिए चल पड़े। परिवार को ढांढस बंधाने के लिए ग्रामीण और रिश्तेदारों की आवाजाही लगी रही।
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जानी थानाक्षेत्र के जानी कलां गांव निवासी वसीम मोबाइल टावर बनाने का काम करता है। परिवार में पत्नी चांद बीबी, चार साल का पुत्र अबूजर, तीन साल की पुत्री आयत और एक आठ माह का पुत्र है। वसीम काम से सोमवार सुबह अमृतसर निकले थे। वसीम के बड़े भाई गुलफाम ने बताया कि अबूजर और आयत दोपहर करीब तीन बजे टॉफी खरीदने के लिये पैसे लेकर पड़ोस की दुकान पर गए थे। एक घंटे बाद भी जब बच्चे वापस नहीं आए, तो मां ने तलाश शुरू की, लेकिन बच्चे नहीं मिले।
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शाम करीब पांच बजे मस्जिदों से एलान कराया गया। पूरे गांव में तलाश गया। छह बजे पड़ोसी गांव चंदौरा में लोगों ने रजवाहे में बच्चों के शव देखे। जानकारी लगते ही परिजन रोते बिलखते मौके पर पहुंचे और दोनों बच्चों की पहचान की। बेटे अबूजर का शव दो किमी दूर चंदौरा गांव की तरफ एक झाड़ी में लटका मिला जबकि बेटी आयत का शव जानी कलां गांव के पास रजवाहे में किनारे पानी में पड़ा मिला।
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दो बच्चों की रजवाहे में डूबने से मौत होने की सूचना पर जानी पुलिस मौके पर गई थी। परिजन दोनों बच्चोें के शव घर ले आए थे। परिजनों ने इसे हादसा बताकर पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। -पंकज सिंह, सीओ सरधना
इतनी दूर कैसे पहुंचे मासूम... हत्या या हादसा
- मौत का राज भी दफन, पुलिस ने नहीं कराया पोस्टमार्टम
मेरठ। दो मासूमों की मौत का राज पुलिस की लापरवाही से दफन हो गया। सवाल है कि घर से करीब आधा किमी दूर रजवाहे तक मासूम कैसे चले गए, जिन्हें किसी ने देखा तक नहीं। दोनों के शव अलग-अलग जगह से मिलने से बड़ा सवाल है कि कहीं हत्या के बाद तो शवों को फेंका नहीं गया। ऐसे में ये हत्या थी या हादसा, अब इसकी जांच पुलिस कैसे कर पाएगी।
दरअसल गांव में घर के पास ही परचून की दुकान है। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि दोनों भाई-बहन टॉफी खरीदने के बजाय रजवाहे पर क्या करने गए थे। ग्रामीणों में चर्चा कि मासूमों को ले जाया गया होगा और हत्या के बाद शवों को रजवाहे में फेंका। क्योंकि सोमवार को इतनी गर्मी भी नहीं थी जो दोनों भाई बहन नहाने के लिए गए होंगे। उससे भी बड़ा सवाल है कि दो मासूमों की मौत की खबर लगने के बाद भी जानी थाना पुलिस गंभीर नहीं हुई। बच्चों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया, जिससे पता चल सकता था कि कहीं हत्या के बाद तो शवों को फेंका नहीं गया था।
कौन देगा सवालों के जवाब
परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दोनों बच्चों के शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिए। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि चंदौरा और जानी कलां के ग्रामीण इसी रजवाहे से होकर जाते है। किसी ने इन बच्चों को जाते नहीं देखा। ऐसे में ऐसे क्या कारण रहे कि बच्चे रजवाहे तक पहुंच गए।
किसी से दुश्मनी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के पिता वसीम से किसी की दुश्मनी है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इन मासूम भाई-बहन ने किसी का क्या बिगाड़ा, जो ऐसी मौत दी। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना किया और पुलिस भी पल्ला झाड़कर बैठ गई। पुलिस ने जांच पड़ताल करना भी मुनासिब नहीं समझा।
परिवार में कोहराम, मां बेहोश
दोनों बच्चों के शव मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। बच्चों की मां बेहोश हो गई। गांव में भी मातम छाया रहा। सूचना मिलने पर वसीम भी गांव के लिए चल पड़े। परिवार को ढांढस बंधाने के लिए ग्रामीण और रिश्तेदारों की आवाजाही लगी रही।