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बीओटी पर निगम के अभिलेख ही खोल रहे अधिकारियों की पोल

Tue, 24 Sep 2019 01:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 01:54 AM IST
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BOT contracter open the curuption in nagar nigam
BOT contracter open the curuption in nagar nigam
मेरठ। महानगर के छह मार्ग और 17 चौराहे नगर निगम ने बीओटी पर दिए हुए हैं। नगर निगम और बीओटी ठेकेदारों के बीच हुए अनुबंध की शर्तों का ठेकेदारों ने अनुपालन नहीं किया। जिसके लिए ठेकेदार को कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन निगम के अफसरों ने ठेकेदारों के काम को संतोषजनक होने की रिपोर्ट जारी कर दी। यानि अधिकारियों ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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दरअसल नगर निगम ने मई 2013 में अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी को शहर के छह मुख्य मार्ग और हीरा एडवरटाइजिंग को 17 चौराहे बीओटी पर दिए थे, लेकिन ठेकेदारों ने शर्तों के अनुरूप काम नहीं किया। जबकि अनुबंध की शर्तों में कंपनी द्वारा संतोषजनक कार्य न करने पर ठेका निरस्त किया जाने का भी जिक्र है। इसकों लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ाई भी लड़ी गई, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम के निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर सहित सभी इंजीनियरों ने पांच साल तक बीओटी ठेकेदारों द्वारा कराए गए कार्यों के संतोषजनक होने की रिपोर्ट जारी कर दी। उसी को आधार बनाते हुए निगम प्रशासन ने 12 अप्रैल को बीओटी ठेकों का नवीनीकरण कर दिया। निगम प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर ही बीओटी ठेकेदार न्यायालय में निगम के खिलाफ लड़ रहे हैं।
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यह थी शर्त
- निगम की शर्तों के मुताबिक ठेकेदार को जहां छह मुख्य मार्गों पर साल में दो बार डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट के खंभे, ग्रिल का रखरखाव और रंगाई पुताई का काम करना है। वहीं स्ट्रीट लाइट के रखरखाव के साथ साथ लाइटों को शाम को जलाने और सुबह बुझाने का काम करना निर्धारित है। इसकी एवज में निगम ने ठेकेदार को 26 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट के खम्भों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाने की अनुमति दी थी। हालांकि बाद में निगम अधिकारी बीओटी ठेकेदार से साठगांठ करके इन स्थानों को 42 बताने लगे।
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- 17 चौराहों पर बीओटी ठेकेदार को सभी ट्रैफिक लाइटों का रखरखाव करने, चौराहों पर हरियाली रखने और इसकी एवज में चौराहे से आठ-दस मीटर की दूरी से बाहर प्रचार सामग्री लगाने का अधिकार दिया।
शर्तों के उल्लंघन पर लग रहे आरोप, निगम रिकार्ड में बरी
बीओटी ठेकेदारों ने शहर की सड़कों पर डिवाइडर पर यूनिपोल लगा दिए जो पूरी तरह अवैध है। इसके अलावा डिवाइडरों की रंगाई पुताई, स्ट्रीट लाइट के मेंटेनेंस, खंभे, ट्रैफिक लाइट और चौराहों के मेंटेनेंस में भी ठेकेदार लापरवाही बरत रहे हैं। 2013 में तो बीओटी ठेकेदारों ने थोड़ा बहुत काम कराया था, लेकिन अवैध होर्डिग लगाने पर विवादों में आ गए थे। इसको लेकर 2014 से लेकर अब तक बीओटी ठेकों की शर्तों के उल्लंघन पर हंगामा हो रहा है। अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर निगम ने दोनों कंपनियों को कई बार नोटिस दिए हैं। इतना ही नहीं मार्गों से स्ट्रीट लाइट के खंभे चोरी होने के संबंध में एफआईआर दर्ज कराए जाने की भी दी गई थी।

जारी किए गए नोटिस
बीओटी की शर्तों का कितना अनुपालन किया गया है। वह निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, विज्ञापन विभाग और ट्रैफिक पुलिस जानती है। शर्तों का उल्लंघन करने पर सभी विभागों से कंपनियों को नोटिस भी गए हैं, लेकिन निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बीओटी ठेके नवीनीकरण के समय अपनी रिपोर्ट में कार्य संतोषजनक बताया है। - राजेश कुमार, होर्डिंग प्रभारी नगर निगम।
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