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एक ही मरीज में मिला काला और सफेद फंगस, पीले के भी लक्षण, जांच को भेजा सैंपल
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एक ही मरीज में काला और सफेद फंगस, पीले के भी लक्षण मिले
मेरठ। काले फंगस के बाद अब सफेद और पीले फंगस का भी हमला शुरू हो गया है। मेरठ का पहला और दुर्लभ केस मिला है। एक ही मरीज में काला और सफेद फंगस मिलने के साथ ही उसमें पीले फंगस के भी लक्षण हैं। इसकी विशेष जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
आनंद अस्पताल में इस मरीज का इलाज चल रहा है। इलाज करने वाले डॉक्टर पुनीत भार्गव ने बताया कि मरीज का सफल ऑपरेशन हो चुका है। मरीज में काले और सफेद फंगस की पुष्टि हो चुकी है। पीले फंगस के लक्षण भी मिले हैं। इसकी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। उनके मुताबिक तीनों फंगस की वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना ही है।
डॉ. भार्गव ने बताया कि म्यूकरमाइकोसिस वातावरण में रहता है। यह मुंह या श्वास नली से कहीं भी पहुंच सकता है। एक साथ दोनों फंगस का संक्रमण होने से स्वस्थ होने में कोई परेशानी नहीं है। सफेद फंगस तो सामान्य दवा से ही ठीक हो जाता है। यह बीमारी कैंडिडा नाम के फंगस से होती है। यह उन लोगों में होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज शामिल हैं। यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्त में न पहुंच जाए। रक्त में पहुंचना दुर्लभ होता है। साधारण एंटी फंगल दवाओं से ठीक किया जा सकता है।
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इससे पहले एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में पीले फंगस का संदिग्ध मरीज मिला था। डॉक्टरों के मुताबिक पीला फंगस, काले और सफेद फंगस से ज्यादा खतरनाक है। यह आंतरिक रूप से शुरू होता है। जैसे यह बढ़ता है, बीमारी और घातक हो जाती है। अगर घर के अंदर ज्यादा नमी है तो मरीज के लिए यह घातक हो सकता है। इसलिए इस पर ध्यान दें। ज्यादा नमी बैक्टीरिया और फंगस बढ़ाती है। घर की और आसपास की सफाई बहुत जरूरी है।
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मेरठ। काले फंगस के बाद अब सफेद और पीले फंगस का भी हमला शुरू हो गया है। मेरठ का पहला और दुर्लभ केस मिला है। एक ही मरीज में काला और सफेद फंगस मिलने के साथ ही उसमें पीले फंगस के भी लक्षण हैं। इसकी विशेष जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
आनंद अस्पताल में इस मरीज का इलाज चल रहा है। इलाज करने वाले डॉक्टर पुनीत भार्गव ने बताया कि मरीज का सफल ऑपरेशन हो चुका है। मरीज में काले और सफेद फंगस की पुष्टि हो चुकी है। पीले फंगस के लक्षण भी मिले हैं। इसकी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। उनके मुताबिक तीनों फंगस की वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना ही है।
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डॉ. भार्गव ने बताया कि म्यूकरमाइकोसिस वातावरण में रहता है। यह मुंह या श्वास नली से कहीं भी पहुंच सकता है। एक साथ दोनों फंगस का संक्रमण होने से स्वस्थ होने में कोई परेशानी नहीं है। सफेद फंगस तो सामान्य दवा से ही ठीक हो जाता है। यह बीमारी कैंडिडा नाम के फंगस से होती है। यह उन लोगों में होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज शामिल हैं। यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्त में न पहुंच जाए। रक्त में पहुंचना दुर्लभ होता है। साधारण एंटी फंगल दवाओं से ठीक किया जा सकता है।
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इससे पहले एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में पीले फंगस का संदिग्ध मरीज मिला था। डॉक्टरों के मुताबिक पीला फंगस, काले और सफेद फंगस से ज्यादा खतरनाक है। यह आंतरिक रूप से शुरू होता है। जैसे यह बढ़ता है, बीमारी और घातक हो जाती है। अगर घर के अंदर ज्यादा नमी है तो मरीज के लिए यह घातक हो सकता है। इसलिए इस पर ध्यान दें। ज्यादा नमी बैक्टीरिया और फंगस बढ़ाती है। घर की और आसपास की सफाई बहुत जरूरी है।