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मेरठ में काले नमक का काला कारोबार

Sat, 17 Oct 2015 01:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 17 Oct 2015 01:38 AM IST
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Black business of black salt in Meerut

इनके पास न तो एनओसी है और न ही लाइसेंस। प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट तो भूल ही जाइए। फिर भी यहां काले नमक का धड़ल्ले से काला कारोबार हो रहा है। खास बात यह है कि मानकों को ताक पर रखकर बनाया जा रहा यह नमक कई मल्टी नेशनल कंपनी (एमएनसी) और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों को सप्लाई होता है।

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जहां से आकर्षक पैकिंग में सजकर हम और आप जैसे लोगों के शरीर में ही जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रसाधन विभाग (एफडीए) की टीम ने शुक्रवार को कंकरखेड़ा के मुरलीपुर और सिंधावली गांव में छापामारी की। ये फैक्ट्रियां अवैध रूप से और मानकों के विपरीत संचालित होती मिलीं।
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हमारे पास नहीं एनओसी/लाइसेंस
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह और अभिहित अधिकारी वीके वर्मा के नेतृत्व में टीम जब मुरलीपुर में इमरान पुत्र खान मोहम्मद की नमक फैक्ट्री में पहुंची तो वहां भगदड़ मच गई। फैक्ट्री का मालिक आनन-फानन में वहां पहुंचा। पूछताछ में उसने लाइसेंस और एनओसी होने से सीधे इंकार कर दिया। करीब दो बीघा में फैली इस फैक्ट्री में काला नमक बनाने का काम चल रहा था। फैक्ट्री मालिक इमरान ने स्वीकार किया कि उसकी फैक्ट्री में पूर्व में भी सैंपल लेकर तुरंत कार्य बंद करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन काम बदस्तूर जारी है। टीम इसके बाद सिंधावली गांव में मुस्तकीम की फैक्ट्री में पहुंची। यहां भी काला नमक बनता मिला। फैक्ट्री में करीब 40 मजदूर मिले। अभिहित अधिकारी वीके वर्मा के अनुसार दोनों फैक्ट्री बिना मानक संचालित मिलीं। यहां से लिए सैंपल की जांच के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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प्रदूषण बन रहा ग्रामीणों के लिए खतरा
नमक बनाने में शीरा, बादाम और अखरोट के छिलकों का प्रयोग किया जाता है। वहीं, कोयले के साथ शीरा और प्लास्टिक आदि का भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे निकलने वाली हानिकारक गैसों के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। इसकी चपेट में आकर गांव के कई बच्चे बीमार पड़ चुके हैं। कई बच्चों को सांस और टीबी की बीमारी भी हो चुकी है। ग्रामीणों ने भी इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।

शहर में यहां संचालित फैक्ट्री
कंकरखेड़ा के सिंधावली, मुरलीपुर में दो फैक्ट्री, रोहटा रोड पर सलाहपुर, मवाना रोड स्थित इंचौली में अवैध रुप से काला नमक बनाने की फैक्ट्री संचालित हैं।

‘सैंपल भरे तो बदल गया मालिक’
मुरलीपुर में इमरान पुत्र खान मोहम्मद की फैक्ट्री में पूर्व में भी सैंपल भरे जा चुके है, जो फेल हो गए थे। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार पहले इस फैक्ट्री संचालक का नाम इखलाख पुत्र अखलाख बताया गया था। इमरान ने बताया कि वह फैक्ट्री पहले उसका रिश्तेदार संचालित कर रहा था।

कई एमएनसी में सप्लाई होता है नमक
मानक को ताक पर रखकर बनाया जाने वाला यह नमक केसरगंज में सप्लाई किया जाता है। फैक्ट्री मालिक ने अफसरों के सामने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस नमक को दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तराखंड में स्थित कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाें में भी सप्लाई करते है।

ऐसे बनता है काला नमक
फैक्ट्री संचालक विशाल घड़ों का निर्माण करता है। इन घड़ों में ढली वाले सफेद नमक के साथ अन्य शीरा आदि पदार्थ मिलाया जाता है। खुले में चल रही भट्टियों में 10 से 12 घंटे के लिए इस नमक को रखा जाता है। और फिर खुले में ही ठंडा किया जाता है। इससे यह नमक काला पड़ जाता है। इस नमक को जलाने के लिए अखरोट और बादाम के छिलकों का भी प्रयोग किया जाता है। बता दें कि इस तरह का ढली वाला सफेद नमक यदि मानकों के अनुसार नहीं बनाया जाए तो काले नमक से भी ज्यादा हानिकारक होता है। जब ये दोनों नमक आपस में मिल जाते हैं तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह नमक कैसा होगा।


ये होने चाहिए मानक
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार काला नमक बनाने के दौरान प्रदूषण रहित वातावरण और साफ-सफाई का बेहद ध्यान रखना चाहिए। आयोडीन की निश्चित मात्रा होनी चाहिए। इसमें मिलाए जाने वाले तत्व निर्दोष और ईको-फ्रैंडली होने चाहिए। यह कई प्रोसेस से गुजरता है। गाइड लाइन के तहत ही खाद्य पदार्थ का निर्माण होना चाहिए। मानकों के विपरीत बनने वाले ऐसे नमक से पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मानक अनुसार नमक में निश्चित मात्रा में आयोडीन की मात्रा होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रुप से बनाए जा रहे इस नमक में आयोडीन ही नहीं होता। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह के अनुसार आयोडीन की कमी से गोयटर या घैंघा आदि रोगाें का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, यह गर्भवती महिलाओं के लिए भी खतरनाक है।

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