मेरठ में एक ही मरीज में मिले ब्लैक और व्हाइट दोनों फंगस, बिजनौर के मरीज में मिले लक्षण
मेरठ में ब्लैक फंगस के सथ व्हाइट फंगस ने भी दस्तक दे दी है। यहां बिजनौर निवासी एक मरीज में दोनों प्रकार के संक्रमण एक साथ मिले हैं। बताया गया कि यह मेरठ में भर्ती होने वाला पहला मरीज है। आनंद अस्पताल में मरीज का सफल ऑपरेशनकिया गया है।
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42 वर्षीय मरीज बिजनौर का रहने वाला है। आनंद अस्पताल में उसका सफल ऑपरेशन हुआ है। दोनों आंखों की रोशनी बच गई है। ऑपरेशन करने वाले डॉ. पुनीत भार्गव ने बताया कि मरीज को पता ही नहीं था की उसे दोनों फंगस हैं। वह तो आंख में दिक्कत है, यह परेशानी लेकर आया था। उनकी दाहिनी नाक की जांच की तो नाक में सफेद और काला दोनों फंगस दिखे। फिर एमआरआई कराया तो फंगस साइनस के अंदर कोने में घुसे थे और आंख गलानी शुरू कर दी थी। तब ऑपरेशन कर आंख बचाई।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना है वजह
दोनों फंगस की वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना ही है। म्यूकरमाइकोसिस पर्यावरण में रहता है। यह मुंह या श्वास नली से कहीं भी पहुंच सकता है। एक साथ दोनों फंगस का संक्रमण होने से स्वस्थ होने में कोई खास परेशानी नहीं है। व्हाइट फंगस तो सामान्य दवा से ही ठीक हो जाता है।
व्हाइट फंगस के मामले पहले भी आते रहे हैं, यह बीमारी कैंडिडा नामक फंगस से होती है। यह उन लोगों में होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज शामिल हैं। यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्त में न पहुंच जाए। रक्त में पहुंचना दुर्लभ होता है। साधारण एंटी फंगल दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है।
लक्षण : व्हाइट फंगस
मुंह खोलने पर सफेद परत जैसी दिखती है। जब फंगस आहार नली में पहुंचती है तो खाना निगलने में तकलीफ होती है। इसे इंडोस्कोपी से देखा जा सकता है।
लक्षण: ब्लैक फंगस
नाक बंद होना, नाक से काले रंग का पानी आना, नाक के आसपास गालों पर सूजन, चेहरे में दर्द, चेहरे में सुन्नपन या सूजन आना, लगातार सिरदर्द, मुंह से बदबू, सीने में दर्द, आंखों में दर्द, आंखें लाल होना, खून की उल्टी होना आदि।