बिजनौर : अपने गढ़ में उग्र हुए भाकियू नेता, प्रकरण में पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे भाजपा नेता
- निर्धारित मार्ग से आते प्रदेश अध्यक्ष तो नहीं होता इतना बखेड़ा
- पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे भाजपा नेता
विस्तार
बिजनौर जिले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव का रूट बदलने से इतना बड़ा हंगामा हुआ। रूट किसने और क्यों बदलवाया ये कोई भी पत्ते नहीं खोल रहा है। स्वतंत्र देव सिंह अपने निर्धारित मार्ग से आते तो इतना बड़ा बखेड़ा नहीं होता। भाजपा नेता इसे प्रशासन की नाकामी मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाकियू का मुखौटा पहनकर विपक्षी दलों के नेता व कार्यकर्ता इस तरह की हरत कर रहे हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को धामपुर से नहटौर, झालू होकर बिजनौर आना था। झालू में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने उनके स्वागत का बड़ा कार्यक्रम रखा था। जलालपुर में स्वतंत्र देव सिंह को काले झंडे दिखाने को भाकियू नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।
भाकियू के विरोध को देख स्वतंत्र देव सिंह का बिजनौर आने का रूट बदलवा दिया गया। उन्हें नहटौर से नगीना मार्ग से बिजनौर लाया गया। ये बात जब जलालपुर व अन्य स्थानों पर मौजूद भाकियू के नेताओं को पता चली तो वे कार्यकर्ताओं के साथ नगीना मार्ग बाईपास पर पहुंच गए। ये क्षेत्र भाकियू का गढ़ है।
रशीदुपर गढ़ी से लेकर आसपास के इलाके में भाकियू की राजनीति होती है। भाकियू के गढ़ के रास्ते में स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को धकेल दिया गया। अपने गढ़ में भाकियू के नेताओं ने उग्र होकर प्रदेश अध्यक्ष के काफिले को घेरने की कोशिश की।
भाजपा के तमाम नेता मान रहे हैं कि अगर प्रदेश अध्यक्ष झालू मार्ग से बिजनौर होकर आते तो इतना बड़ा बखेड़ा न होता। जलालपुर में मौजूद भाकियू नेता दूर से कोल झंडे दिखाकर शांत हो जाते। रूट बदलवाने की राय किसने दी, किसका इसमें हाथ रहा, ये कोई पत्ते नहीं खोल रहा। इस मामले में पुलिस व एलाआईयू भी पूरी तरह नाकाम रही और भाकियू के इरादों को नहीं भांप सकी।
भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि के मुताबिक ये पूरा बखेड़ा प्रशासन की नाकामी की वजह से हुआ है। प्रशासन ने ही रूट बदलवाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं ने भाकियू का मुखौटा पहनकर ये हरकत की है। वे ही इस तरह का काम रहे हैं।
विपक्षी दलों का अपना जनाधार तो रहा नहीं। अब वे इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। शासन स्तर पर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई है। प्रदेश अध्यक्ष की नाराजगी को देख इस मामले में अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।