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भाजपा ने कराया सहारनपुर दंगा, प्रशासन ने किया पक्षपात : मायावती

Tue, 23 May 2017 06:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Tue, 23 May 2017 06:01 PM IST
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BJP has resorted to Saharanpur riots, administration did the bias : mayawati
बीएसपी सुप्रीमो मायावती

सहारनपुर में जातीय हिंसा के बाद मंगलवार को शब्बीरपुर गांव में पहुंचीं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि यहां प्रदेश सरकार ने ही दंगा कराया है। सरकार के इशारे पर प्रशासन ने पक्षपात किया। भाजपा ने जातीय दंगे कराकर भाईचारा बिगाड़ने का प्रयास किया। पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया। भाजपा सरकार नफरत फैलाना बंद करे, नहीं तो दलित ही नहीं, अपर कास्ट के लोग भी भाजपा से नफरत करने लगेंगे।      

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बसपा सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपराह्न साढ़े तीन बजे शब्बीरपुर पहुंचीं। उन्होंने पीड़ितों से मिलने के बाद पत्रकारों से कहा कि उनकी चार बार प्रदेश में सरकार रही, लेकिन न तो कभी जातीय और न ही कभी सांप्रदायिक दंगा हुआ। बसपा के बारे में तो गलत प्रचार किया गया कि बसपा सिर्फ दलितों की पार्टी है, जबकि बसपा सर्वसमाज की पार्टी है। वह समता मूलक समाज की व्यवस्था बनाना चाहते हैं। जिससे सभी को आगे बढ़ने का मौका मिले।

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मायावती ने दलितों को दी सलाह

BJP has resorted to Saharanpur riots, administration did the bias : mayawati
बीएसपी सुप्रीमो मायावती

उन्होंने कहा कि झगड़ा दलित और राजपूतों में नहीं हुआ, बल्कि प्रशासन ने सरकार के इशारे पर कराया। अंबेडकर जयंती पर बाबा साहब की प्रतिमा लगाकर कार्यक्रम करना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। दलितों ने अनुमति नहीं मिलने पर प्रतिमा नहीं लगाई, लेकिन पांच मई को महाराणा प्रताप जयंती पर बिना अनुमति के शोभायात्रा निकाली जा रही थी। प्रशासन दोनों को ही कार्यक्रम की अनुमति दे देता तो कोई मामला ही नहीं होता। उन्होंने कहा कि कुछ छोटे दलों ने और नेताओं ने आकर मामले को भड़काने का काम किया। वह यहां मामला भड़काने नहीं बल्कि शांत करने के लिए आई हैं। यहां के दलित, राजपूत एवं अन्य जाति के लोगों को गांव में ही रहना है। इसलिए सभी मिलजुल कर रहें। किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि हमेशा से ही बसपा ने संदेश दिया है कि दलित कानून हाथ में न लें। बसपा ने हमेशा भाईचारा कायम किया, जिसे भाजपा बिगाड़ना चाहती है।  बसपा सुप्रीमो ने कहा कि किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करें तो किसी संगठन के नाम से नहीं बल्कि बसपा के नेतृत्व में करें। सबको पता है कि बसपा के लोगों पर हाथ डालना महंगा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तीन वर्ष हो चुके हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलितों के वोट की खातिर कभी संग्रहालय बनाने की बात करते हैं तो कभी स्मारक बनाने की, लेकिन दलितों को न तो संग्रहालय चाहिए और न ही स्मारक। उन्हें तो सम्मान चाहिए, रोजी रोटी के साधन चाहिए।      

इस मौके पर बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा, मुनकाद अली, पूर्व मंत्री काजी रशीद मसूद, कादिर राणा, शाजान मसूद, शायान मसूद, पूर्व विधायक रविंद्र मोल्हू, जगपाल सिंह, मंसूर अली खान, जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद, बबलू जैदी मौजूद रहे।

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