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Meerut News: स्टांप घोटाले वालों का बड़ा गिरोह, कोषागार और रजिस्ट्री कार्यालय तक नेटवर्क

Wed, 13 Nov 2024 03:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2024 03:10 AM IST
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Big gang of stamp scammers, network till treasury and registry office
मेरठ। स्टांप घोटाले में अधिवक्ता विशाल वर्मा का कचहरी में बड़ा गिरोह है। कोषागार और रजिस्ट्री कार्यालय तक उसका नेटवर्क फैला हुआ है। करोड़ों रुपये के फर्जी स्टांप बेचकर आरोपी ने मेरठ, उत्तराखंड में संपत्ति खरीदी है। जिसको जब्त करके रिकवरी करने की तैयारी जिला प्रशासन ने शुरू कर दी। शासन द्वारा गठित एसआईटी की जांच में भी कई बड़े लोगों के नाम स्टांप घोटाले में खुल सकते हैं। सबूत एकत्रित करने और पांच मुकदमे दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अभी तक आरोपी विशाल की तलाश में दबिश तक नहीं दी है।
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तीन साल की जांच में 997 रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप मिले हैं, जिसमें करीब 10 करोड़ का घोटाला हुआ है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मंत्री रवींद्र जायसवाल के निर्देश पर मेरठ सहित प्रदेश के 55 जिलों में फर्जी स्टांप की जांच उपनिबंधकों द्वारा अब 2016 से 2024 तक शुरू करा दी है। सहायक आयुक्त स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने मई 2023 में पहला मुकदमा दर्ज कराया था। दूसरे मुकदमे में तीन फर्म के नाम सार्वजनिक हुए, जोकि भाजपा नेता से जुड़े हुए थे।
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बताया गया कि बागपत रोड पर कई अवैध कॉलोनी काटी गईं, जिसमें सबसे ज्यादा 25 हजार वाले फर्जी स्टांप लगाकर रजिस्ट्री कराई गई है। गंगानगर निवासी तुषार ने कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन थाने में 1.90 लाख के फर्जी स्टांप लगाना बताकर अधिवक्ता विशाल वर्मा निवासी महाराणा प्रताप एनकलेव विक्टोरिया पार्क के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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परतापुर थाने में भी विशाल वर्मा के खिलाफ एक महिला ने मुकदमा कराया है। सोमवार फिर विशाल के खिलाफ केस दर्ज हुआ। तीन मुकदमों में विशाल नामजद आरोपी बनाया है। रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा फर्जी स्टांप लगाकर रजिस्ट्री करने वाले लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस की विवेचना धीमी है और आरोपी को पकड़ने की जहमत तक नहीं उठाई जा रही है। जबकि एसआईटी की जांच में अधिवक्ता विशाल शर्मा के गिरोह की परतें खुलती जा रही हैं। बताया गया कि फर्जी स्टांप का भंडाफोड़ होने के बाद आरोपी ने करोड़ों की संपत्ति खरीदी है। जिला कोषागार और रजिस्ट्री कार्यालय में आरोपी का नेटवर्क कहां तक फैला है, इसकी भी जांच चल रही है।

कोषागार की हस्ताक्षर और मुहर
उपनिबंधकों की जांच में 997 फर्जी स्टांप मिले है, उन सभी पर मेरठ कोषागार की मुहर और हस्ताक्षर मिले है। जांच में सामने आया कि कोषागार से यह स्टांप 10-12 साल पहले गाजियाबाद कोषागार में भेजे गए थे। सवाल उठता है कि गाजियाबाद भेजे गए स्टांप से मेरठ में रजिस्ट्री कैसे हुई। कोषागार से मुहर और हस्ताक्षर किसने किए। अगर मुहर और हस्ताक्षर फर्जी है तो जांच फॉरेंसिक लैब से क्यों नहीं कराई। ऐसे तमाम सवाल अभी जांच में खुलने बाकी है।

भाजपा नेता की अवैध कॉलोनी में लगे स्टांप
फर्जी स्टांप बागपत रोड पर एक भाजपा नेता की अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री के दौरान लगे है। भाजपा नेता के करीबी की फर्म द्वारा फर्जी स्टांप खरीदने बताए गए। सभी स्टांप अधिवक्ता विशाल वर्मा से खरीदें गए है। भाजपा नेता ने एक अधिकारी से मिलकर अपने साथी के बचाव में सिफारिश की थी। इस मामले को दबाने का प्रयास चल रहा है। शासन द्वारा गठित एसआईटी की जांच में परतें खुल रही हैं। उपनिबंधकों द्वारा नोटिस जाने के बाद रजिस्ट्री कराने वाले लोग थाने में विशाल शर्मा के खिलाफ केस दर्ज करा रहे है।


फर्जी स्टांप के मामले में तीन साल की रजिस्ट्री की जांच उपनिबंधकों से कराई है। थाने में मुकदमे भी दर्ज हैं। इस प्रकरण की गंभीरता से जांच चल रही है। एसआईटी गठित है, जो दोषी होगा। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दीपक मीणा, डीएम

सिविल लाइन और परतापुर थाने में अधिवक्ता विशाल वर्मा के खिलाफ मुकदमें दर्ज हैं। मामला स्टांप घोटाले का है, जिसमें एसआईटी भी जांच कर रही है। पुलिस की विवेचना जारी है। आरोपी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। विवेचना में लापरवाही नहीं होगी।
डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी
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