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महागठबंधन को ‘चित’ करने के लिए जाट आरक्षण का दांव, पश्चिम यूपी में भाजपा को हो सकता है फायदा

Thu, 20 Sep 2018 03:57 AM IST
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत Updated Thu, 20 Sep 2018 03:57 AM IST
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Bharatiya Janata Party can benefit from Jat reservation in West Uttar Pradesh
साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले फिर से जाट समाज का आरक्षण सियासी गलियारों में तूल पकड़ने लगा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आरक्षण के पक्ष में पैरवी का एलान कर जाट समाज को लुभाने का प्रयास किया है। भाजपा का यह दांव महागठबंधन पर कितना भारी पड़ सकता है। 
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यह तो आने वाले लोकसभा चुनाव में ही पता चल सकेगा, लेकिन इतना तय है कि पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सियासी समीकरण जाट समाज से बनता और बिगड़ता रहा है। भाजपा की नई सियासी चाल से रालोद के रणनीतिकारों को भी नए सिरे से लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए मंथन करना पड़ेगा।  
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लखनऊ में मंच और मौका जरूर भाजपा का अपना था, लेकिन जिस तरह सीएम योगी आदित्यनाथ ने जाट समाज के आरक्षण की पैरवी करने का एलान किया है, वह सियासी गलियारों में चर्चा बन गया है। असल में भाजपा ने साल 2019 के चुनावी रण का बिगुल बजा दिया है। 
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यह भी साफ हो गया है कि भाजपा केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से ही तलाश रही है। बागपत में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य खुद यूपी से 73 प्लास का एलान कर मंसूबे जाहिर कर चुके हैं। जाट समाज को ओबीसी में आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन भाजपा ने नए सिरे से इसे राजनीतिक मंच पर साझा कर सियासी हलचल मचा दी है। 
 

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव और साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जाट भाजपा के पाले में खड़े नजर आए। यही वजह रही कि रालोद को करारे झटके लगे। भले ही कैराना उपचुनाव में रालोद जीत गया हो, लेकिन नतीजों में जाट समाज के बजाए मुस्लिम और दलित समाज की वोटों की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता है।  

साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को घेरने के लिए विपक्ष महा गठबंधन की तैयारी में जुटा है। रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस में अभी सीटों को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। इस बीच भाजपा ने नई चाल चलकर महा गठबंधन पर दांव चल दिया है। 

इस दांव का सबसे बड़ा असर रालोद पर पड़ेगा, क्योंकि पिछले पांच साल में एक भी ऐसा चुनावी नतीजा नहीं है, इसके भरोसे यह कहा जा सके कि जाट वोट बैंक भाजपा से छिटक गया है। अब भाजपा ने जैसे ही आरक्षण का दांव खेला है तो भाजपा को इसका चुनावी लाभ मिल सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि पश्चिम में भाजपा के अधिकतर विधायक और सांसद जाट ही हैं।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह कहते हैं कि जाट समाज और अन्य बिरादरी के लोगों का हित भाजपा में सुरक्षित है। प्रत्येक व्यक्ति को यहां सम्मान मिलता है और काबिल लोगों को आगे बढ़ाया जाता है। 

रालोद के पश्चिम उत्तर प्रदेश के महासचिव सतीश चौधरी का कहना है कि भाजपा का यह राजनीतिक शिगूफा है। अभी तक सीएम और उनके मंत्री और विधायक कहां थे।  

 कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष राम कुमार सिंह का कहना है कि साल 2014 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने जाट समाज को आरक्षण दिया था। भाजपा ने उसकी अदालत में पैरवी क्यों नहीं की। भाजपा नेताओं की समाज को बरगलाने की कोशिश है। 

 सपा नेता सुरेंद्र पंवार का कहना है कि भाजपा जाट समाज को बरगलाने का कार्य कर रही है। ऐसा संभव नहीं है। जाट समाज का भला भाजपा में संभव ही नहीं है।
 
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