40 फुट ऊंचे रथ में 2.5 करोड़ के आभूषणों से सजकर निकले भैरव बाबा
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मौका था मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी काल भैरव जयंती का। आज के दिन भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। इस पावन अवसर पर होली मोहल्ला स्थित सिद्धपीठ भैरव बाबा मंदिर से परंपरागत शोेभायात्रा निकाली गई।
भैरव बाबा की विशाल शोभायात्रा बजाजा बाजार, सर्राफा, वैली बाजार आदि स्थानों से गुजरी यहां श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा में मीरापुर, बुढ़ाना सहित मेरठ के प्रसिद्ध बैंड धार्मिक प्रस्तुति दे रहे थे।
यात्रा में मुरादाबाद, शामली, हापुड़ और बुलंदशहर की लगभग 54 झांकियां शामिल की गईं। सैकड़ों भक्त बाबा के मुख्य रथ के सम्मुख थिरकते चल रहे थे। महाकाल का रौद्र रूप सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। मुरादाबाद से आए कलाकार राहुल की टीम ने ऐतिहासिक प्रस्तुति दी। बंगाल में दुर्गा पूजा की झलक झांकी के माध्यम से प्रस्तुत की गई। भगवान श्रीराम और महाराजा अग्रसेन का रथ भी शोभायात्रा में शामिल किया गया।
यात्रा में पट उद्घाटन राजेंद्र कुमार, राजीव कुमार माहेश्वरी ने किया। महाराजा अग्रेसन के रथ का उद्घाटन संजय अग्रवाल, महाराज का मुख्य माल्यार्पण सूरज प्रकाश गुप्ता, शोभायात्रा का मुख्य उद्घाटन जितेंद्र कुमार शर्मा, मुख्य तिलक प्रदीप अग्रवाल, बाबा को रथ पर सुशोभित अनुपम अग्रवाल ने किया। वहीं, रथ पर सारथी विशाल विजय वर्गीय बने। मुख्य पूजन रमेश चंद्र और राहुल कुमार एरन, विनोद अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, अनिल गुप्ता, अशोक कुमार, विवेक माहेश्वरी, आलोक कुमार और पवन माहेश्वरी द्वारा किया गया। स्वागत अध्यक्ष अमित अग्रवाल, शोभायात्रा का सफल बनाने मं राजकिशोर रस्तौगी, रमेश चंद्र राठी, शिवकुमार सिंघल, विशाल रस्तौगी, सतेंद्र कुमार जैन, अजय गोयल, राजीव माहेश्वरी, विशाल राठी, आदित्य शारदा, सुमित अग्रवाल, आशीष रस्तौगी, सत्यम अग्रवाल, मुकेश रस्तौगी, अनिल वर्मा, निराला गुप्ता आदि रहे।
काले पत्थर से निर्मित बाबा की मूर्ति, 1980 में हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार
मेरठ। सिद्धपीठ भैरव बाबा मंदिर के गर्भगृह में भैरव बाबा की मुख्य मूर्ति काले पत्थर की बनी है। हालांकि मूर्ति स्थापना के संबंध में किसी को भी जानकारी नहीं है। मंदिर समिति से जुड़े रमेश चंद्र राठी और राजीव कुमार माहेश्वरी ने बताया कि 1960 में मंदिर में मूर्ति के सम्मुख तेल के दीप जलाए जाते थे। यहां एक कुंआ और पीपल का वृक्ष था। मंदिर का जीर्णोद्धार 1980 हुआ। सफेद संगमरमर से 75 गज क्षेत्रफल में गर्भगृह और दो मंजिला मंदिर निर्माण किया हुआ।
वर्ष 2005 के आसपास यहां स्वर्ण छत्र और स्वर्ण कलश की स्थापना हुई। इसके बाद भैरव बाबा के शृंगार के लिए स्वर्ण, हीरे और अन्य रत्न जड़ित आभूषण आदि तैयार किए गए। सराफा व्यापारियों सहित आसपास के धर्म प्रेमियों ने अपनी श्रद्धा अनुसार दान किया। आज बाबा का 2.5 करोड़ के आभूषणों से शृंगार होता है। मंदिर में भैरव बाबा की तीन मूर्ति हैं। मुख्य विग्रह को कोई नहीं छू सकता। 1980 के आसपास शोभायात्रा के लिए अष्टधातु की मूर्ति बनारस से मंगवाई थी। इसके साथ ही प्रभात फेरी के लिए एक अन्य छोटी मूर्ति हैं।
एक घंटे में होती है एक साल की बुकिंग
मंदिर में प्रति शनिवार को भैरव बाबा का विशेष शृंगार किया जाता है। आदित्य शारदा और राजीव कुमार माहेश्वरी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मार्च माह के अंतिम शनिवार को मंदिर में शृंगार के लिए बुकिंग खोली जाती है। एक घंटेे में ही बुकिंग फुल हो जाती है। प्रत्येक शनिवार को भैरव बाबा की पोशाक बदली जाती है। फूलों का शृंगार होता है। साथ ही विशेष पूजा अर्चना होती है।
कार्यक्रम हुए आरंभ
भैरव बाबा मंदिर में ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम आरंभ हुए। इसका सौभाग्य नकुल सेन, सरजू कुमार जौहरी को प्राप्त हुआ। अखंड दीप प्रज्ज्वलित मनोज कुमार ने किया। हवन कोमल रस्तौगी और राज किशोर रस्तौगी ने किया। पट उद्घाटन का सौभाग्य राजेंद्र कुमार और राजीव कुमार माहेश्वरी को प्राप्त हुआ। सूर्योदय के साथ ही मंदिर से विशाल प्रभातफेरी निकाली गई। बजाजा, सराय लाल दास, वैली बाजार, नील गली आदि स्थानों से गुजारी। नील गली और सराय लाल दास में यात्रा का स्वागत हुआ। महिलाओं ने विशेष पूजा अर्चना की। इस दौरान शिवकुमार सिंघल, विशाल रस्तौगी, रमेश चंद्र राणा, राजीव, विशाल राठी, सतेंद्र जैन, गौरव शारदा, आदित्य शारदा, सुमित अग्रवाल मौजूद रहे।