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बंगलूरू के एक्सपर्ट करेंगे डीएम का मोबाइल हैक होने की जांच  

Wed, 26 Apr 2017 10:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 26 Apr 2017 10:55 AM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 डीएम डीके सिंह का मोबाइल हैक कर मेरठ के हिंदू संगठन के नेता को धमकी देने के मामले में पुलिस पूरी गहनता से जांच-पड़ताल में जुटी है। मोबाइल हैकिंग में किसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस ने गुत्थी को सुलझाने के लिए बंगलूरू के आईटी एक्सपर्ट से सहयोग मांगा है। आईटी के एक्सपर्ट पूरा मामला सामने लाएंगे।             
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तीन दिन दिन पूर्व डीएम डीके सिंह के मोबाइल नंबर से मेरठ के मवाना के हिंदू संगठन के नेता सौरभ शर्मा को धमकी भरा फोन गया था। जांच-पड़ताल में नंबर डीएम मुजफ्फरनगर का निकला तो सभी सकते में आ गए। जिस दिन फोन हुआ उस दिन जिले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीबी भोसले आए हुए थे। डीएम उन्हीं के साथ कार्यक्रम में व्यस्त थे। इस दौरान डीएम ने किसी को न फोन किया और न ही किसी का नंबर रिसीव कर पाए। जब मामला डीएम के संज्ञान में आया तो वह भी हैरान रह गए। पुलिस ने जांच की तो सीडीआर में भी डीएम का ही नंबर निकला। समझते देर नहीं लगी कि नंबर हैक किया गया है। डीएम ने इस मामले की जांच के लिए एसएसपी को लिखा। एसएसपी की टीम भी दो दिन में जब कुछ नहीं कर सकी तो बंगलूरू में आईटी एक्सपर्ट से बात की गई। उन्होंने तमाम जानकारी एकत्र कर ली है। उनका कहना है कि वह जल्द ही हैकर का पता लगा लेंगे। बताया गया है कि इस मामले में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ज्यादातर इस तकनीक का इस्तेमाल आतंकी संगठनों द्वारा किया जाता रहा है। डीएम डीके सिंह ने बताया कि मामला गंभीर है, जिस तेजी के साथ जांच चल रही है, इससे जल्द ही रिजल्ट आने की संभावना है।   
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हैकर कहां का, अभी पता नहीं
साइबर सेल के प्रभारी कर्मवीर सिंह का कहना है कि मुजफ्फरनगर के डीएम के नंबर को हैक कर हिंदू संगठन के नेता को धमकी देने के मामले में अभी तक की जांच पड़ताल में सामने आया है कि यूएसए की कंपनी टीएसआई का सहारा लिया गया है। हैकर कहां का इसकी जांच भी की जा रही है। जांच में सामने आया है कि इंटरनेट पर जाकर एप डाऊनलोड किया गया। उसके बाद उसे साइनअप करन के लिए अकाउंट बनाया जाता है। कंपनी के एप में अकाउंट बनाते समय जो आईडी लगाई जाती है उसकी भी जांच की जा रही है। ऐसे में कंपनी से मांगा जाएगा कि एप का इस्तेमाल कर कॉल करने वाला मूल यूजर कौन है। किसने इसे साइन अप किया है।         
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