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यूपी में सपा को सबसे पहला और बड़ा झटका मेरठ में, अखिलेश के बेहद खास

Thu, 20 Apr 2017 09:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 20 Apr 2017 09:30 AM IST
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Before the formation of a BJP government in the state, the SP felt the shock before Meerut
सीमा प्रधान ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने अविश्वास प्रस्ताव बैठक से पहले ही इस्तीफा दे दिया। सीमा प्रधान के खिलाफ जिस तरह दो दिन पूर्व 30 सदस्य लामबंद हुए थे, उसके बाद तय हो गया था वह अविश्वास बैठक में सामना करने के बजाए इस्तीफा ही देंगी। सीमा प्रधान ने इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही उनके खिलाफ न केवल षड्यंत्र रचे गये, बल्कि लगातार अपमानित भी किया गया। यही नहीं दो दिन पूर्व एक  धमकी भरा पत्र उन्हें प्राप्त हुआ, जिसमें उनके पति को जान से मारने की धमकी दी गयी है।

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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव 11 जनवरी 2016 को हुआ था और उसी दिन मतगणना के बाद सीमा प्रधान को विजेता घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सीमा प्रधान ने 14 जनवरी को अध्यक्ष पद की शपथ ली थी। मात्र 15 माह 7 दिन ही वह कुर्सी पर रह पायी और बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे की पटकथा प्रदेश में भाजपा सरकार के आते ही लिखनी शुरू हो गयी थी। जैसे ही पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार आयी, तभी तय हो चला था कि भाजपाई अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश करेंगे। लेकिन यह सब इतनी जल्दी होगा, किसी ने नहीं सोचा था। भाजपा के पक्ष में अध्यक्ष पद पर मतदान करने वाले 16 सदस्यों के साथ ही सत्ता बदलने पर चार और सदस्य भाजपा के पाले में आ गये और 30 मार्च को इन सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी को शपथ पत्र दिया। इसके अगले ही दिन चार और सदस्य भाजपाई पाले में आये और अविश्वास के लिए शपथ पत्र दे दिया।
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इस प्रक्रिया के बाद शासन से अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का निर्देश जारी हुआ और जिलाधिकारी ने 24 अप्रैल की तिथि बैठक के लिए तय कर दी। इसी बीच 17 अप्रैल को भाजपाई खेमे में 30 सदस्य खड़े नजर आये। इस पूरे माहौल को भांपते हुए अतुल प्रधान ने पार्टी हाईकमान से बात की और बुधवार को उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। प्रदेश में भाजपा सरकार बने एक माह ही हुआ है और इस दौरान बिना अविश्वास प्रस्ताव बैठक के ही मेरठ में भाजपा ने सपा को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से हटा दिया। दूसरी तरफ अविश्वास प्रस्ताव जिला पंचायत की राजनीति में पहले भी आये हैं, लेकिन इस तरह इस्तीफा देने का यह अब तक पहला मामला है।

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जानिए, कब ली थी सीमा प्रधान ने अध्यक्ष पद की शपथ

Before the formation of a BJP government in the state, the SP felt the shock before Meerut
सीमा प्रधान

​सपा नेता अतुल प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान ने संयुक्त प्रेस वार्ता में इस्तीफा देने के कारण और इसके बाद की तमाम रणनीति मीडिया को बतायी। सीमा प्रधान ने जहां इस्तीफा देने का कारण भाजपाइयों और प्रशासन का लगातार बढ़ रहा दबाव बताया, तो अतुल प्रधान ने कहा कि हमने इस्तीफा दिया है हार नहीं मानी है। अध्यक्ष पद पर सपा प्रत्याशी को मैदान में उतारा जायेगा और चुनाव लड़ाया जायेगा।

​शास्त्रीनगर स्थित आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए सीमा प्रधान ने कहा कि उन्हें सवा साल काम करने का मौका मिला और इस दौरान करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराने के साथ दिन रात जनता की सेवा की। जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार आयी, वैसे ही उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया। भाजपाइयों ने प्रशासन पर दबाव बनाकर रोज नये नये षड़यंत्र रचने शुरू कर दिये। कहीं जांच बैठायी तो कहीं महिला होने के बावजूद उनकी गरिमा और सम्मान तक को ठेस पहुंचाने से बाज नहीं आये। लगातार होते अपमान और काम न करने देने के माहौल में उन्होंने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। सीमा प्रधान ने कहा कि हालात अब इस कदर बिगड़ चुके थे, कि दो दिन पूर्व उन्हें रजिस्टर्ड डाक से एक पत्र मिला। जिसमें कहा गया था कि अपने पति को कहो कि राजनीति बंद कर घर बैठ जाये तो नहीं जान से हाथ धोना पड़ेगा। ऐसे हालात में काम कैसे कर पाएंगे।

​वहीं अतुल प्रधान ने कहा कि एक विधायक ने कहा है कि सदस्यों को धमकी दी तो जेल भेजा जायेगा। उन्होंने कहा कि विधायक नहीं वह भाजपा सरकार से कहते हैं कि यदि पांच साल भी जेल में रहा तो भी अखिलेश यादव के साथ ही रहूंगा। अतुल प्रधान ने सरधना विधायक ठा. संगीत सोम के लिए कहा कि उनमें या उनके किसी आदमी में दम है तो उन्हें जेल भेजकर दिखाये। अतुल प्रधान ने कहा कि संघर्ष अब शुरू हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा से प्रत्याशी चुनाव में उतारा जायेगा। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह भी मौजूद रहे।

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