{"_id":"6a355696766f25cce60fd67c","slug":"becoming-the-mother-of-a-tirthankara-is-the-fruit-of-supreme-motherhood-bhav-bhushan-meerut-news-c-228-1-mwn1001-105040-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीर्थंकर की माता बनना सर्वोत्तम मातृत्व का फल : भाव भूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीर्थंकर की माता बनना सर्वोत्तम मातृत्व का फल : भाव भूषण
विज्ञापन
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- शांतिनाथ विधान के 30वें दिन 400 परिवारों ने की पूजा-अर्चना
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य त्रिमूर्ति जिनालय में भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के 30वें दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कार्यक्रम में करीब 400 परिवारों ने सहभागिता कर विधान एवं पूजन किया। शुभारंभ भगवान जिनेंद्र के अभिषेक से हुआ। शांतिधारा आर्शी जैन, रुचि जैन, ललित जैन, अतिशय जैन, खुशी जैन, सम्मेद जैन, डिंपल जैन, उर्मिला जैन व नरेश चंद जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने की।
विधान के मध्य भाव भूषण महाराज ने कहा कि नारी सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती है, लेकिन वह माता सर्वोत्तम होती है जो तीर्थंकर जैसी महान आत्मा को जन्म देकर स्वयं भी आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर देता है, उसी प्रकार तीर्थंकरों का जीवन और उनकी वाणी संसार को सत्य एवं मोक्ष का मार्ग दिखाती है। उन्होंने जिनवाणी माता की आराधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मानव को संस्कारों और दुखों से मुक्ति का मार्ग प्रदान करती है। शास्त्र को पालकी में विराजमान कराने का सौभाग्य नरेश जैन, जिनेश्वर जैन, सुशील जैन और प्रिंस जैन को मिला। महिलाओं ने सिर पर जिनवाणी माता को विराजमान कर शोभायात्रा निकाली। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
महाआरती, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। कार्यक्रम के पुरस्कार विमला जैन एवं सुमत प्रकाश जैन ने प्रदान किए। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन व अन्य पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य त्रिमूर्ति जिनालय में भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के 30वें दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कार्यक्रम में करीब 400 परिवारों ने सहभागिता कर विधान एवं पूजन किया। शुभारंभ भगवान जिनेंद्र के अभिषेक से हुआ। शांतिधारा आर्शी जैन, रुचि जैन, ललित जैन, अतिशय जैन, खुशी जैन, सम्मेद जैन, डिंपल जैन, उर्मिला जैन व नरेश चंद जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने की।
विधान के मध्य भाव भूषण महाराज ने कहा कि नारी सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती है, लेकिन वह माता सर्वोत्तम होती है जो तीर्थंकर जैसी महान आत्मा को जन्म देकर स्वयं भी आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर देता है, उसी प्रकार तीर्थंकरों का जीवन और उनकी वाणी संसार को सत्य एवं मोक्ष का मार्ग दिखाती है। उन्होंने जिनवाणी माता की आराधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मानव को संस्कारों और दुखों से मुक्ति का मार्ग प्रदान करती है। शास्त्र को पालकी में विराजमान कराने का सौभाग्य नरेश जैन, जिनेश्वर जैन, सुशील जैन और प्रिंस जैन को मिला। महिलाओं ने सिर पर जिनवाणी माता को विराजमान कर शोभायात्रा निकाली। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
विज्ञापन
महाआरती, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। कार्यक्रम के पुरस्कार विमला जैन एवं सुमत प्रकाश जैन ने प्रदान किए। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन व अन्य पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
विज्ञापन