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छोटा बनकर करें धार्मिक कार्य : जनार्दन तिवारी
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- चंद्रलोक कॉलोनी में हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चंद्रलोक स्थित पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ हुआ। कथा व्यास आचार्य जनार्दन तिवारी ने कहा कि वामन भगवान का संदेश है कि धार्मिक कार्य हमेशा छोटा बनकर ही करना चाहिए। बड़ा बनकर दिखाने वालों के काज कभी सफल नहीं होते।
कथा व्यास ने बताया कि दैत्यराज बलि ने अपनी तपस्या और दानवीरता से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह अत्यंत दानी और धर्मपरायण था। उसे भी अहंकार हो गया। ऐसे में उसके सामने वामन के रूप में आए भगवान विष्णु को बोल बैठा कि मैं आपको जो चाहे दान में दे दूंगा। भगवान ने सिर्फ तीन पग भूमि मांगी। बलि ने दान की प्रतिज्ञा कर दी। इस बीच उसके गुरु शुक्राचार्य ने भी उसे रोका।
बलि ने कहा कि दान से पीछे हटना मेरे कुल की मर्यादा के विरुद्ध है। तब वामन ने विराट रूप धारण किया। पहले पग में सारी पृथ्वी और दूसरे पग में समस्त स्वर्ग को नाप लिया। तीसरा पग रखने को जगह न बची। बलि ने नतमस्तक होकर अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल भेज दिया। बाद में उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे पाताल का स्वामी बनाया। कथा व्यास ने कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाकर भी मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में सेंसरपाल, शिवम शर्मा, देव, ओंकार दत्त शर्मा, ऊषा गुप्ता, विभा तिवारी सहित अन्य मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चंद्रलोक स्थित पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ हुआ। कथा व्यास आचार्य जनार्दन तिवारी ने कहा कि वामन भगवान का संदेश है कि धार्मिक कार्य हमेशा छोटा बनकर ही करना चाहिए। बड़ा बनकर दिखाने वालों के काज कभी सफल नहीं होते।
कथा व्यास ने बताया कि दैत्यराज बलि ने अपनी तपस्या और दानवीरता से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह अत्यंत दानी और धर्मपरायण था। उसे भी अहंकार हो गया। ऐसे में उसके सामने वामन के रूप में आए भगवान विष्णु को बोल बैठा कि मैं आपको जो चाहे दान में दे दूंगा। भगवान ने सिर्फ तीन पग भूमि मांगी। बलि ने दान की प्रतिज्ञा कर दी। इस बीच उसके गुरु शुक्राचार्य ने भी उसे रोका।
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बलि ने कहा कि दान से पीछे हटना मेरे कुल की मर्यादा के विरुद्ध है। तब वामन ने विराट रूप धारण किया। पहले पग में सारी पृथ्वी और दूसरे पग में समस्त स्वर्ग को नाप लिया। तीसरा पग रखने को जगह न बची। बलि ने नतमस्तक होकर अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल भेज दिया। बाद में उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे पाताल का स्वामी बनाया। कथा व्यास ने कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाकर भी मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में सेंसरपाल, शिवम शर्मा, देव, ओंकार दत्त शर्मा, ऊषा गुप्ता, विभा तिवारी सहित अन्य मौजूद रहे।
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