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Meerut News: चार हजार रुपये खर्च कर बन गए पुलिसवाले... कर रहे ठगी
Mon, 30 Sep 2024 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 30 Sep 2024 01:35 AM IST
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शामली। फर्जी पुलिसकर्मी बनकर साइबर ठगी के जिले में छह मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय दुकानदारों को बिना जांच पड़ताल के वर्दी नहीं देने के निर्देश दिए थे मगर ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर पुलिस की वर्दी खुलेआम बिक रही है। ऑनलाइन कहीं पर भी वर्दी को मंगवा सकते हैं। एसपी ने ऑनलाइन बिक्री करने वाली 10 से अधिक कंपनियों को चिह्नित कराया है।
केस-1
संवाददाता : मैं शामली में दरोगा हूं, मुझे खाकी वर्दी चाहिए
दुकानदार : मिल जाएगी, चार हजार रुपये में आपको घर पर डिलीवर हो जाएगी, साइज भेज दो
संवाददाता : कोई आई कार्ड भी भेजना है क्या
दुकानदार : उसकी कोई जरूरत नहीं है।
केस-2
संवाददाता: मैं आम आदमी हूं मगर मुझे इंस्पेक्टर की वर्दी चाहिए, क्या मिल जाएगी
दुकानदार: एक हजार रुपये अतिरिक्त लगेंगे, पांच हजार में आपके घर वर्दी पहुंचा देंगे
संवाददाता: पुलिस की कोई दिक्कत तो नहीं होगी
दुकानदार: पुलिस वाले तो हम ही तो बनाते हैं
पुलिस की वर्दी में हाल ही में ठगी के हुए मामलों की बानगी
: शामली के रहने वाले शेखर के पास पुलिस की वर्दी पहने किसी युवक ने कॉल की। बेटे को किसी केस में फंसने के नाम पर रुपयों की मांग की और उनसे डेढ़ लाख रुपये ठग लिए गए।
: झिंझाना निवासी शोएब के पास 1 सितंबर को अनजान नंबर से वीडियो कॉल की गई। वीडियो कॉल करने वाले ने इंस्पेक्टर की खाकी वर्दी पहनी हुई थी। खुद को थाने का इंस्पेक्टर बताते हुए मारपीट के दर्ज कराए मामले में गिरफ्तारी के नाम पर दस हजार रुपये मांगे। उससे ठगी कर ली गई। पुलिस ने पुलिस से शिकायत की।
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: शामली के काजीवाड़ा के रहने वाले आसिफ से 12 जुलाई को पुलिसकर्मी बनकर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 12 हजार रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
फेक आईडी बनाकर किया जा रहा खेल
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि कुछ दुकानदार जहां बिना आई कार्ड देखे वर्दी बेच रहे हैं वहीं अधिकतर कोई भी फेक आईडी बनाकर कहीं भी वर्दी मंगवा सकता है। दो हजार से लेकर पांच हजार में पुलिस की वर्दी, 670 में टोपी, 700 रुपये में स्टार व लोगो मिल जाता है। हैरत की बात है कि ये बिना किसी दस्तावेज, चेकिंग के इसे मंगवाने वाले को हैंडओवर कर दिया जाता है।
साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
ऑनलाइन साइटों पर पुलिस की वर्दी के अलावा बहुत सी आपत्तिजनक चीजें बिक रही है जिन पर प्रतिबंध लगा है। मगर साइबर टीम इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। संवाद
ये गंभीर मामला है। इसे लेकर हम ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स के अधिकारियों से बात करेंगे, ताकि सामान खरीदने ओर बेचने वाला कौन है, उसकी सारी डिटेल्स और उसकी आईडी फिजिकल तौर पर जाकर भी ली जाए और उसे क्रास चेक भी किया जा सके। इसके लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी। साइबर सेल को भी ऐसी साइटों की निगरानी को लगाया गया है।
रामसेवक गौतम, एसपी शामली
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केस-1
संवाददाता : मैं शामली में दरोगा हूं, मुझे खाकी वर्दी चाहिए
दुकानदार : मिल जाएगी, चार हजार रुपये में आपको घर पर डिलीवर हो जाएगी, साइज भेज दो
संवाददाता : कोई आई कार्ड भी भेजना है क्या
दुकानदार : उसकी कोई जरूरत नहीं है।
केस-2
संवाददाता: मैं आम आदमी हूं मगर मुझे इंस्पेक्टर की वर्दी चाहिए, क्या मिल जाएगी
दुकानदार: एक हजार रुपये अतिरिक्त लगेंगे, पांच हजार में आपके घर वर्दी पहुंचा देंगे
संवाददाता: पुलिस की कोई दिक्कत तो नहीं होगी
दुकानदार: पुलिस वाले तो हम ही तो बनाते हैं
पुलिस की वर्दी में हाल ही में ठगी के हुए मामलों की बानगी
: शामली के रहने वाले शेखर के पास पुलिस की वर्दी पहने किसी युवक ने कॉल की। बेटे को किसी केस में फंसने के नाम पर रुपयों की मांग की और उनसे डेढ़ लाख रुपये ठग लिए गए।
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: झिंझाना निवासी शोएब के पास 1 सितंबर को अनजान नंबर से वीडियो कॉल की गई। वीडियो कॉल करने वाले ने इंस्पेक्टर की खाकी वर्दी पहनी हुई थी। खुद को थाने का इंस्पेक्टर बताते हुए मारपीट के दर्ज कराए मामले में गिरफ्तारी के नाम पर दस हजार रुपये मांगे। उससे ठगी कर ली गई। पुलिस ने पुलिस से शिकायत की।
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: शामली के काजीवाड़ा के रहने वाले आसिफ से 12 जुलाई को पुलिसकर्मी बनकर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 12 हजार रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
फेक आईडी बनाकर किया जा रहा खेल
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि कुछ दुकानदार जहां बिना आई कार्ड देखे वर्दी बेच रहे हैं वहीं अधिकतर कोई भी फेक आईडी बनाकर कहीं भी वर्दी मंगवा सकता है। दो हजार से लेकर पांच हजार में पुलिस की वर्दी, 670 में टोपी, 700 रुपये में स्टार व लोगो मिल जाता है। हैरत की बात है कि ये बिना किसी दस्तावेज, चेकिंग के इसे मंगवाने वाले को हैंडओवर कर दिया जाता है।
साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
ऑनलाइन साइटों पर पुलिस की वर्दी के अलावा बहुत सी आपत्तिजनक चीजें बिक रही है जिन पर प्रतिबंध लगा है। मगर साइबर टीम इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। संवाद
ये गंभीर मामला है। इसे लेकर हम ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स के अधिकारियों से बात करेंगे, ताकि सामान खरीदने ओर बेचने वाला कौन है, उसकी सारी डिटेल्स और उसकी आईडी फिजिकल तौर पर जाकर भी ली जाए और उसे क्रास चेक भी किया जा सके। इसके लिए गाइडलाइन जारी की जाएगी। साइबर सेल को भी ऐसी साइटों की निगरानी को लगाया गया है।
रामसेवक गौतम, एसपी शामली