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बैंक, एटीएम में कैश की किल्लत बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2016 02:00 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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बैंकों और एटीएम में कैश की किल्लत कम नहीं हुई है। सोमवार को एसबीआई में भी हालत खराब रही। कुछ बैंकाें में कैश ही नहीं पहुंचा। सिंडिकेट सहित कई बैंकों में कैश का टोटा रहा। घंटो बाद भी लोगों को चार हजार ही मिले।
सोमवार सुबह से ही बैंकों के बाहर लोगों की लंबी लाइन लगी थी। बैंक खुलते ही अंदर जाने के लिए आपाधापी मचने लगी। एसबीआई की कुछ शाखाओं मेें नो कैश की स्थिति रही। कैश न मिलने पर बैंक की स्पोर्ट्स कांपलेक्स ब्रांच हंगामा हो गया। सिंडिकेट बैंक की अधिकांश शाखाओं में कैश कम होने की वजह से दो से चार हजार की लिमिट तय कर दी गई। ओबीसी, पीएनबी, यूनियन आदि बैंकों में भी यही हाल रहा।
एसबीआई को मिले 200 करोड़
कैश की किल्लत से जूझ रहे एसबीआई को आरबीआई से 200 करोड़ रुपया मिले हैं। जिससे मंगलवार को बैंक की शाखाओं में कैश की किल्लत काफी हद तक कम होने के आसार हैं। जिला काऑर्डिनेटर रविकांत सिंह ने बताया कि इनमें दो हजार के अलावा 500 का नया नोट भी इस बार आया है।
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अचानक पहुंचे एसबीआई के डीजीएम
एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर आलोक चौधरी दिल्ली से अचानक जिले में पहुंचे। उन्होंने शहर और देहात की कई बैंक शाखाओं का निरीक्षण किया। बैंक के स्थानीय अधिकारियों को भी मेरठ आने के बाद ही उनके दौरे का पता चला तो खलबली मच गई। डीजीएम ने भूडबराल, सरधना और मेरठ कैंट ब्रांच पहुंचकर जहां व्यवस्थाओं को चेक किया तो ग्राहकों से भी बातचीत कर फीड बैक लिया।
नोटबंदी ने लगाए ट्रैक्टरों की बिक्री पर ब्रेक
नोट बंदी के 41 दिनों बाद भी बाजारों के हालात नहंी सुधरे हैं। इसके असर से कृषि यंत्रों और ट्रैक्टर की बिक्री पर भी ब्रेक से लग गए हैं। किसानों के गन्ना भुगतान का पैसा बैंकों में फंसा है। जिसके कारण कृषि उपकरणों की खरीद-फरोख्त भी गड़बड़ा गई है।
दरअसल, जिन किसानों ने गन्ने का पेमेंट आने पर ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र खरीदने की तैयारी कर रखी थी, वे नोटबंदी के बाद से परेशान हैं। उनके हाथ में नगदी नहीं है। जो पैसा है, वह बैंक में है। यही हाल कृषि उपकरणों के कारोबारियों का है। खासतौर से ट्रैक्टर आदि की बिक्री ठप होने से वे भी परेशान हैं।
ये पड़ा असर
मोदीपुरम क्षेत्र में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों की तीन बड़ी एजेंसियां हैं। इनमें एक एजेंसी पर अक्तूबर माह में 132 ट्रैक्टर, दूसरी पर 80 और तीसरी एजेंसी पर 70 ट्रैक्टर बिके थे। आठ नवंबर की रात से नोटबंदी लागू होने के बाद इनमें पहली एजेंसी पर करीब 36, दूसरी पर 4 और तीसरी एजेंसी पर सात ट्रैक्टर बेचे गए। इस दिसंबर हालत ज्यादा खराब रही। जिसमें यह आंकड़ा क्रमश: 12, 0, 3 ही रहा। यानी 19 दिसंबर तक केवल 15 ट्रैक्टर ही बिक पाए। कृषि यंत्रों की बात करें तो इन तीन माह में यह आंकड़ा क्रमश: 48, 21 और 5 ही रहा।
ये भी परेशानी
- अधिकांश किसानों के पास पैन कार्ड और चेक बुक नहीं
- कैश लेस ट्रांजैक्शन के प्रति अभी किसान नहीं हुआ तैयार
- बैंकों में किसानों के पैसे। लेकिन 2-5 हजार रुपये ही मिल रहे
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सोमवार सुबह से ही बैंकों के बाहर लोगों की लंबी लाइन लगी थी। बैंक खुलते ही अंदर जाने के लिए आपाधापी मचने लगी। एसबीआई की कुछ शाखाओं मेें नो कैश की स्थिति रही। कैश न मिलने पर बैंक की स्पोर्ट्स कांपलेक्स ब्रांच हंगामा हो गया। सिंडिकेट बैंक की अधिकांश शाखाओं में कैश कम होने की वजह से दो से चार हजार की लिमिट तय कर दी गई। ओबीसी, पीएनबी, यूनियन आदि बैंकों में भी यही हाल रहा।
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एसबीआई को मिले 200 करोड़
कैश की किल्लत से जूझ रहे एसबीआई को आरबीआई से 200 करोड़ रुपया मिले हैं। जिससे मंगलवार को बैंक की शाखाओं में कैश की किल्लत काफी हद तक कम होने के आसार हैं। जिला काऑर्डिनेटर रविकांत सिंह ने बताया कि इनमें दो हजार के अलावा 500 का नया नोट भी इस बार आया है।
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अचानक पहुंचे एसबीआई के डीजीएम
एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर आलोक चौधरी दिल्ली से अचानक जिले में पहुंचे। उन्होंने शहर और देहात की कई बैंक शाखाओं का निरीक्षण किया। बैंक के स्थानीय अधिकारियों को भी मेरठ आने के बाद ही उनके दौरे का पता चला तो खलबली मच गई। डीजीएम ने भूडबराल, सरधना और मेरठ कैंट ब्रांच पहुंचकर जहां व्यवस्थाओं को चेक किया तो ग्राहकों से भी बातचीत कर फीड बैक लिया।
नोटबंदी ने लगाए ट्रैक्टरों की बिक्री पर ब्रेक
नोट बंदी के 41 दिनों बाद भी बाजारों के हालात नहंी सुधरे हैं। इसके असर से कृषि यंत्रों और ट्रैक्टर की बिक्री पर भी ब्रेक से लग गए हैं। किसानों के गन्ना भुगतान का पैसा बैंकों में फंसा है। जिसके कारण कृषि उपकरणों की खरीद-फरोख्त भी गड़बड़ा गई है।
दरअसल, जिन किसानों ने गन्ने का पेमेंट आने पर ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र खरीदने की तैयारी कर रखी थी, वे नोटबंदी के बाद से परेशान हैं। उनके हाथ में नगदी नहीं है। जो पैसा है, वह बैंक में है। यही हाल कृषि उपकरणों के कारोबारियों का है। खासतौर से ट्रैक्टर आदि की बिक्री ठप होने से वे भी परेशान हैं।
ये पड़ा असर
मोदीपुरम क्षेत्र में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों की तीन बड़ी एजेंसियां हैं। इनमें एक एजेंसी पर अक्तूबर माह में 132 ट्रैक्टर, दूसरी पर 80 और तीसरी एजेंसी पर 70 ट्रैक्टर बिके थे। आठ नवंबर की रात से नोटबंदी लागू होने के बाद इनमें पहली एजेंसी पर करीब 36, दूसरी पर 4 और तीसरी एजेंसी पर सात ट्रैक्टर बेचे गए। इस दिसंबर हालत ज्यादा खराब रही। जिसमें यह आंकड़ा क्रमश: 12, 0, 3 ही रहा। यानी 19 दिसंबर तक केवल 15 ट्रैक्टर ही बिक पाए। कृषि यंत्रों की बात करें तो इन तीन माह में यह आंकड़ा क्रमश: 48, 21 और 5 ही रहा।
ये भी परेशानी
- अधिकांश किसानों के पास पैन कार्ड और चेक बुक नहीं
- कैश लेस ट्रांजैक्शन के प्रति अभी किसान नहीं हुआ तैयार
- बैंकों में किसानों के पैसे। लेकिन 2-5 हजार रुपये ही मिल रहे