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मेरठ : बंद रहा बेअसर, पुलिस रही सतर्क
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मेरठ। सीएए, एनआरसी और ईवीएम के विरोध में बहुजन क्रांति मोर्चा द्वारा घोषित बंद का बुधवार को मेरठ में कोई असर नहीं दिखा। बाजार रोजाना की तरह खुले। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस मुस्तैद रही। हालांकि मुस्लिम बहुल इलाकों में ही दुकानें बंद देखी गईं। कुछ इलाकों में पुलिस ने दुकानों को खुलवाया। जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में शांति रही।
सीएए के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा को देखते हुए पुलिस बल सतर्क रहा। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि बुधवार को कोई बंद नहीं है। लोग किसी के दबाव में न आएं। अफवाहों पर ध्यान न दें। सतर्कता और जागरूकता के चलते शरारती तत्वों की योजना कामयाब नहीं हुई। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि 29 जनवरी को भारत बंद के लिए सोशल साइट्स पर प्रचार के अलावा शहर में पोस्टर चस्पा किए जा रहे थे। लालकुर्ती पैठ समेत कई जगह पर पोस्टर लगे थे। पोस्टर पर आह्वान रिजवान रमजानी नाम के शख्स द्वारा कराने की बात सामने आई थी। जिस पर रिजवान रमजानी ने मंगलवार को ही लिसाड़ीगेट थाने पहुंचकर अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कराया था।
रिजवान रमजानी का दावा है कि तहरीक उलमा-ए-हिंद जयपुर राजस्थान संस्था के नाम से छपवाए गए पोस्टर पर उनके नाम का गलत तरीके से प्रयोग किया गया। सीएए, एनआरसी या ईवीएम का उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। शरारती तत्व इसको लेकर अफवाह फैला रहे हैं। एसएसपी ने बताया कि शहर के लोगों ने समझदारी का परिचय दिया है। अफवाहों को दरकिनार करके रोजाना की तरह दुकान और मार्केट खुली है। कहीं कोई बंद नहीं था। कुछ जगहों पर दुकान बंद थी। जिसकी जानकारी दुकानदारों से ली गई। दुकानदारों ने भी तुरंत दुकान खोल ली। बंद का कोई असर मेरठ में नहीं दिखा।
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तीन संदिग्ध लोग हिरासत में रहे
बंद की अफवाह फैलाने के शक में पुलिस ने तीन लोगों को दिन भर हिरासत में रखा। शाम को पूछताछ के बाद उनको छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि कुछ लोग सीएए के विरोध में बेवजह हंगामा करने की साजिश रच रहे थे। उन लोगों को चिह्नित किया गया है। जांच की जा रही है कि इसके पीछे कौन मास्टरमाइंड है।
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सीएए के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा को देखते हुए पुलिस बल सतर्क रहा। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि बुधवार को कोई बंद नहीं है। लोग किसी के दबाव में न आएं। अफवाहों पर ध्यान न दें। सतर्कता और जागरूकता के चलते शरारती तत्वों की योजना कामयाब नहीं हुई। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि 29 जनवरी को भारत बंद के लिए सोशल साइट्स पर प्रचार के अलावा शहर में पोस्टर चस्पा किए जा रहे थे। लालकुर्ती पैठ समेत कई जगह पर पोस्टर लगे थे। पोस्टर पर आह्वान रिजवान रमजानी नाम के शख्स द्वारा कराने की बात सामने आई थी। जिस पर रिजवान रमजानी ने मंगलवार को ही लिसाड़ीगेट थाने पहुंचकर अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कराया था।
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रिजवान रमजानी का दावा है कि तहरीक उलमा-ए-हिंद जयपुर राजस्थान संस्था के नाम से छपवाए गए पोस्टर पर उनके नाम का गलत तरीके से प्रयोग किया गया। सीएए, एनआरसी या ईवीएम का उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। शरारती तत्व इसको लेकर अफवाह फैला रहे हैं। एसएसपी ने बताया कि शहर के लोगों ने समझदारी का परिचय दिया है। अफवाहों को दरकिनार करके रोजाना की तरह दुकान और मार्केट खुली है। कहीं कोई बंद नहीं था। कुछ जगहों पर दुकान बंद थी। जिसकी जानकारी दुकानदारों से ली गई। दुकानदारों ने भी तुरंत दुकान खोल ली। बंद का कोई असर मेरठ में नहीं दिखा।
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तीन संदिग्ध लोग हिरासत में रहे
बंद की अफवाह फैलाने के शक में पुलिस ने तीन लोगों को दिन भर हिरासत में रखा। शाम को पूछताछ के बाद उनको छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि कुछ लोग सीएए के विरोध में बेवजह हंगामा करने की साजिश रच रहे थे। उन लोगों को चिह्नित किया गया है। जांच की जा रही है कि इसके पीछे कौन मास्टरमाइंड है।