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सरकारी नर्सरी में 0238 के बीज तैयार करने पर लगाई रोक
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मुजफ्फरनगर। अधिक उत्पादन से किसानों और चीनी परता दर से चीनी मिलों को मालामाल कर देने वाली गन्ने की प्रजाति 0238 पूरे प्रदेश में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग की चपेट में आ गई है। गन्ना आयुक्त संजय आर भुसरहेडी ने एडवाइजरी जारी कर इस प्रजाति के नए बीज पर पूरी तरह रोक लगा दी है। केवल मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में ही अन्य जगह की अपेक्षा इस रोग का प्रभाव कम है। लेकिन कुछ गांवों में शुरूआत हो चुकी है। गन्ने की फसल को बचाने के लिए गन्ना शोध केंद्र, सरकारी नर्सरी और चीनी मिलों के फार्म पर इस बार इस प्रजाति को नहीं बोया जाएगा। इसके विकल्प के तौर पर गन्ने की नई प्रजाति को.लख. 14201 और को.शा. 13235 की उपज कराई जाएगी।
किसानों के खेतों में गन्ने की पैदावार 50-60 क्विंटल से 90-100 क्विंटल प्रति बीघा करने वाली और चीनी मिलों की रिकवरी 9-10 से 11-12 प्रतिशत पहुंचाने वाली गन्ने की प्रजाति 0238 समाप्ति के कगार पर है। इस वर्ष किसी भी शोध केंद्र, सरकारी नर्सरी और चीनी मिल के फार्म पर 0238 के बीज का उत्पादन नहीं होगा। पूर्वांचल के जिलों में लाल सड़न से गन्ना पूरी तरह बेकार हो गया है। गन्ना शोध केंद्र मुजफ्फरनगर के निदेशक डॉ वीरेश सिंह का कहना है कि गन्ने की किसी भी प्रजाति में जब रोग लग जाता है तो वह प्रजाति पूरी तरह चपेट में आती है। भले ही यहां अभी तक रोग कम हो, लेकिन खतरा बहुत अधिक है। जिन किसानों के पास विकल्प है वह इस बार बीज में 0238 का प्रयोग कतई न करें। डॉ वीरेश सिंह ने बताया कि मार्च और अप्रैल में जारी की गई नई प्रजातियों के बीज की बुवाई होगी। हमारा यह प्रयास है कि नए बीज की अधिक उपलब्धता हो, इसके लिए गन्ना शोध केंद्र में 15 हेक्टेयर जमीन के अलावा जिले की मोरना चीनी मिल के फार्म में पांच हेक्टेयर जमीन में बीज तैयार किया जाएगा। सहारनपुर जिले की नानौता और गांगनौली, बिजनौर जिले की नजीबाबाद, धामपुर और स्योहारा चीनी मिलों के फार्म में भी इस बार नई प्रजाति का बीज तैयार कराया जाएगा। (संवाद)
14201 और 13235 प्रजाति का गन्ना बेहतर
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ वीरेश सिंह का कहना है कि नई प्रजाति को.लख. 14201 और को.शा. 13235 की उपज 0238 के बराबर है। इन दोनों प्रजाति में खास बात यह है कि अगोला 0238 से अच्छा है। लागत भी कम है और बीज कम मात्रा में लगता है। किसानों को इन दोनों प्रजातियों को लेकर कोई संशय करने की आवश्यकता नहीं है।
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किसान दूसरी प्रजाति के बीज का प्रयोग करें
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने बताया कि जिले में 95 प्रतिशत गन्ना 0238 प्रजाति का है। पांच प्रतिशत में को.0118, को. 98014, को.शा. 082272 और को.से.03234 है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन किसानों को नई प्रजाति का बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है वह दूसरी चार प्रजाति में से जिसका बीज भी किसान के पास है उसका प्रयोग कर सकता है। 0238 के लाल सड़न रोग की चपेट में आने की पूरी संभावना है। आगामी वर्ष में विभाग नई प्रजाति का बीज उपलब्ध करा देगा।
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किसानों के खेतों में गन्ने की पैदावार 50-60 क्विंटल से 90-100 क्विंटल प्रति बीघा करने वाली और चीनी मिलों की रिकवरी 9-10 से 11-12 प्रतिशत पहुंचाने वाली गन्ने की प्रजाति 0238 समाप्ति के कगार पर है। इस वर्ष किसी भी शोध केंद्र, सरकारी नर्सरी और चीनी मिल के फार्म पर 0238 के बीज का उत्पादन नहीं होगा। पूर्वांचल के जिलों में लाल सड़न से गन्ना पूरी तरह बेकार हो गया है। गन्ना शोध केंद्र मुजफ्फरनगर के निदेशक डॉ वीरेश सिंह का कहना है कि गन्ने की किसी भी प्रजाति में जब रोग लग जाता है तो वह प्रजाति पूरी तरह चपेट में आती है। भले ही यहां अभी तक रोग कम हो, लेकिन खतरा बहुत अधिक है। जिन किसानों के पास विकल्प है वह इस बार बीज में 0238 का प्रयोग कतई न करें। डॉ वीरेश सिंह ने बताया कि मार्च और अप्रैल में जारी की गई नई प्रजातियों के बीज की बुवाई होगी। हमारा यह प्रयास है कि नए बीज की अधिक उपलब्धता हो, इसके लिए गन्ना शोध केंद्र में 15 हेक्टेयर जमीन के अलावा जिले की मोरना चीनी मिल के फार्म में पांच हेक्टेयर जमीन में बीज तैयार किया जाएगा। सहारनपुर जिले की नानौता और गांगनौली, बिजनौर जिले की नजीबाबाद, धामपुर और स्योहारा चीनी मिलों के फार्म में भी इस बार नई प्रजाति का बीज तैयार कराया जाएगा। (संवाद)
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14201 और 13235 प्रजाति का गन्ना बेहतर
मुजफ्फरनगर। गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ वीरेश सिंह का कहना है कि नई प्रजाति को.लख. 14201 और को.शा. 13235 की उपज 0238 के बराबर है। इन दोनों प्रजाति में खास बात यह है कि अगोला 0238 से अच्छा है। लागत भी कम है और बीज कम मात्रा में लगता है। किसानों को इन दोनों प्रजातियों को लेकर कोई संशय करने की आवश्यकता नहीं है।
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किसान दूसरी प्रजाति के बीज का प्रयोग करें
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने बताया कि जिले में 95 प्रतिशत गन्ना 0238 प्रजाति का है। पांच प्रतिशत में को.0118, को. 98014, को.शा. 082272 और को.से.03234 है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन किसानों को नई प्रजाति का बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है वह दूसरी चार प्रजाति में से जिसका बीज भी किसान के पास है उसका प्रयोग कर सकता है। 0238 के लाल सड़न रोग की चपेट में आने की पूरी संभावना है। आगामी वर्ष में विभाग नई प्रजाति का बीज उपलब्ध करा देगा।