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बल्लों की शक्ल से टूट रहा रनों का रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 May 2018 01:05 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आईपीएल में मेरठी बल्ले दे दना दन रन दे रहे हैं। रनों की इस धुआंधार बारिश का क्रिकेट प्रेमी भी खूब लुत्फ उठा रहे हैं। महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली जैसे धुरंधरों के साथ नए बल्लेबाज भी तूफानी गति से रन बना रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में रनों का टूटता रिकार्ड खिलाड़ियों की बढ़ती फिटनेस के अलावा बल्लों की शक्ल में आई तब्दीली का नतीजा है। बेशक भारतीय बल्लेबाज इन दिनों खेल और फिटनेस दोनों पर मेहनत कर रहे हैं। लेकिन मैदान में चौकों-छक्कों से बनते नए स्कोर का बड़ा कारण बल्लों की मोटाई में आया बदलाव है। शहर में अंतराष्ट्रीय स्तर की बल्ला निर्माता कंपनियां नई तकनीक से बल्ले बना रही हैं। इसके चलते खिलाड़ी के लिए सरलता से चौके-छक्केबरसाना आसान हो गया है।
एज में बढ़ाई लकड़ी की मोटाई
बल्ला निर्माताओं के अनुसार रनों के खड़े होते पहाड़ का कारण हमारे खिलाड़ी फिटनेस फ्रीक हो गए हैं। फिटनेस पर हर खिलाड़ी खूब ध्यान देने लगा है। वहीं हमने बल्ले की एज में लकड़ी की मोटाई बढ़ाई है। अब हल्के से ग्लांज से भी आसानी से चौके-छक्के चले जाते हैं। पहले खिलाड़ी पूरा बल्ला भांजता था, तब इतनी ऊंचाई से चौका या छक्का लगता था। लेकिन अब एज की मोटाई ज्यादा होने से बल्ले को धीरे से प्लेस होते ही चौका-छक्का चला जाता है। 1150 से लेकर 1200 ग्राम वजन का बल्ला तैयार हो रहा है। इंग्लिश विलो लकड़ी से तैयार हो रहे इन बल्लों में यह वजन काफी बेहतरीन माना जाता है। इसका असर स्ट्रोक को मजबूत बनाता है।
कंपनियां ही खोल रहीं स्ट्रोक
बल्ले क ा वजन, कर्व में लकड़ी के बढ़ाने के अलावा कंपनियों में ही बल्ले का स्ट्रोक खोला जा रहा है। खिलाड़ी स्वयं अपने बल्ले क ो खोल (बल्ले के निचले हिस्से में गेंद से ढक-ढक करना) रहे हैं। खिलाड़ियों के कहने पर खुद बल्ला निर्माता कंपनियां फैक्ट्री से ही स्ट्रोक खोलकर दे रही हैं। चार से पांच घंटे तक कारीगर बल्ले को गेंद से खोल रहे हैं। इससे स्ट्रोक मजबूत होता है और गेंद रिफ्लेक्ट होकर बाउंड्री लाइन के बाहर चली जाती है। वहीं कई खिलाड़ी निजी तौर पर भी बल्ले को तैयार करते हैं।
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पुराने खिलाड़ी बना देते नया रिकार्ड
पिछले दो दशकों में बल्लों में भी काफी तब्दीली आई है। माना जाता है कि आज के दौर में अगर यार्नबॉथम, ग्रेग चैपल, विलियम रिचर्ड्स जैसे बल्लेबाज होते तो रनों का पहाड़ खड़ा कर देते। मेरठ में बल्लों की हाथ से छिलाई करके फिनिशिंग होती है। इसकी पूरी दुनिया कायल है। बल्ले को हाथ से फिनिशिंग देना सबसे नाजुक और मुश्किल काम है। हाथ से ही पूरा बल्ला बिना जोड़ के तैयार होता है। इससे बल्ले में स्ट्रोक बढ़ता है।
सभी टीमों के पास हैं मेरठ के बल्ले
एसएफ, एसएस, एसजी, बीडीएम व एमएस के बल्लों से खेलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी इतिहास रच चुके हैं। वर्तमान आईपीएल में भी सभी टीमों के कई खिलाड़ियों ने मेरठ से बल्ले लिए हैं। हार्दिक पांड्या, कुणाल, बुमराह, सुरेश रैना, ऋषभ पंत, हर्षित पटेल, राहुल तेवतिया, राहुल त्रिपाठी, गौतम, श्रेयस गोपाल, पार्थिव पटेल, उमेश यादव, संजय अग्रवाल सहित अन्य खिलाड़ी मेरठ के बल्लों से खेल रहे हैं।
ये हैं बल्ले के तय साइज
लंबाई- सवा 34 इंच
चौड़ाई- सवा चार इंच
स्पाइन- 67 मिमी
मोटाई- 40 मिमी
वजन- 1200 ग्राम
बल्ला कितने वजन का है, यह बल्ले पर बकायदा लिखते हैं। 1150 ग्राम से लेकर 1200 ग्राम वजन के बल्ले बना रहे हैं। वजन का सीधा असर स्ट्रोक पर आया है। हैंडल में फाइव लेयर रबर लगाने से भी ग्रिप मजबूत हुई है। हाथ में जर्क लगने का चांस जीरो हुआ है। इसलिए भी खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं।
-राकेश महाजन, निदेशक बीडीएम
आईपीएल में सभी टीमों में कई खिलाड़ियों को बल्ले दिए हैं। बल्ले की स्पाइन शॉर्प हुई है। एज में लकड़ी बढ़ने के कारण अच्छे रन बन रहे हैं। किनारों की मोटाई पर लकड़ी का घनत्व भी बढ़ाया है। खिलाड़ी फिटनेस पर बहुत काम कर रहे हैं। इससे भी खूब रन असानी से बन रहे हैं।
-पारस आनंद, मार्केटिंग डायरेक्टर एसजी
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एज में बढ़ाई लकड़ी की मोटाई
बल्ला निर्माताओं के अनुसार रनों के खड़े होते पहाड़ का कारण हमारे खिलाड़ी फिटनेस फ्रीक हो गए हैं। फिटनेस पर हर खिलाड़ी खूब ध्यान देने लगा है। वहीं हमने बल्ले की एज में लकड़ी की मोटाई बढ़ाई है। अब हल्के से ग्लांज से भी आसानी से चौके-छक्के चले जाते हैं। पहले खिलाड़ी पूरा बल्ला भांजता था, तब इतनी ऊंचाई से चौका या छक्का लगता था। लेकिन अब एज की मोटाई ज्यादा होने से बल्ले को धीरे से प्लेस होते ही चौका-छक्का चला जाता है। 1150 से लेकर 1200 ग्राम वजन का बल्ला तैयार हो रहा है। इंग्लिश विलो लकड़ी से तैयार हो रहे इन बल्लों में यह वजन काफी बेहतरीन माना जाता है। इसका असर स्ट्रोक को मजबूत बनाता है।
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कंपनियां ही खोल रहीं स्ट्रोक
बल्ले क ा वजन, कर्व में लकड़ी के बढ़ाने के अलावा कंपनियों में ही बल्ले का स्ट्रोक खोला जा रहा है। खिलाड़ी स्वयं अपने बल्ले क ो खोल (बल्ले के निचले हिस्से में गेंद से ढक-ढक करना) रहे हैं। खिलाड़ियों के कहने पर खुद बल्ला निर्माता कंपनियां फैक्ट्री से ही स्ट्रोक खोलकर दे रही हैं। चार से पांच घंटे तक कारीगर बल्ले को गेंद से खोल रहे हैं। इससे स्ट्रोक मजबूत होता है और गेंद रिफ्लेक्ट होकर बाउंड्री लाइन के बाहर चली जाती है। वहीं कई खिलाड़ी निजी तौर पर भी बल्ले को तैयार करते हैं।
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पुराने खिलाड़ी बना देते नया रिकार्ड
पिछले दो दशकों में बल्लों में भी काफी तब्दीली आई है। माना जाता है कि आज के दौर में अगर यार्नबॉथम, ग्रेग चैपल, विलियम रिचर्ड्स जैसे बल्लेबाज होते तो रनों का पहाड़ खड़ा कर देते। मेरठ में बल्लों की हाथ से छिलाई करके फिनिशिंग होती है। इसकी पूरी दुनिया कायल है। बल्ले को हाथ से फिनिशिंग देना सबसे नाजुक और मुश्किल काम है। हाथ से ही पूरा बल्ला बिना जोड़ के तैयार होता है। इससे बल्ले में स्ट्रोक बढ़ता है।
सभी टीमों के पास हैं मेरठ के बल्ले
एसएफ, एसएस, एसजी, बीडीएम व एमएस के बल्लों से खेलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी इतिहास रच चुके हैं। वर्तमान आईपीएल में भी सभी टीमों के कई खिलाड़ियों ने मेरठ से बल्ले लिए हैं। हार्दिक पांड्या, कुणाल, बुमराह, सुरेश रैना, ऋषभ पंत, हर्षित पटेल, राहुल तेवतिया, राहुल त्रिपाठी, गौतम, श्रेयस गोपाल, पार्थिव पटेल, उमेश यादव, संजय अग्रवाल सहित अन्य खिलाड़ी मेरठ के बल्लों से खेल रहे हैं।
ये हैं बल्ले के तय साइज
लंबाई- सवा 34 इंच
चौड़ाई- सवा चार इंच
स्पाइन- 67 मिमी
मोटाई- 40 मिमी
वजन- 1200 ग्राम
बल्ला कितने वजन का है, यह बल्ले पर बकायदा लिखते हैं। 1150 ग्राम से लेकर 1200 ग्राम वजन के बल्ले बना रहे हैं। वजन का सीधा असर स्ट्रोक पर आया है। हैंडल में फाइव लेयर रबर लगाने से भी ग्रिप मजबूत हुई है। हाथ में जर्क लगने का चांस जीरो हुआ है। इसलिए भी खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं।
-राकेश महाजन, निदेशक बीडीएम
आईपीएल में सभी टीमों में कई खिलाड़ियों को बल्ले दिए हैं। बल्ले की स्पाइन शॉर्प हुई है। एज में लकड़ी बढ़ने के कारण अच्छे रन बन रहे हैं। किनारों की मोटाई पर लकड़ी का घनत्व भी बढ़ाया है। खिलाड़ी फिटनेस पर बहुत काम कर रहे हैं। इससे भी खूब रन असानी से बन रहे हैं।
-पारस आनंद, मार्केटिंग डायरेक्टर एसजी