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कोरोना को दी मात... पर नई मुश्किल में है जीवन, पढ़िए क्यों कर रहे गांव छोड़ने की बात

Fri, 31 Jul 2020 05:26 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 31 Jul 2020 05:26 PM IST
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Baghpat News: The villagers has not talk from corona patient after recovere
राहुल चिकारा और शोएब - फोटो : अमर उजाला

कोरोना से जंग जीत लेने के बाद भी व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाए, ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कोरोना को मात देकर घर लौटे लोगों से खराब बर्ताव किया जा रहा है, जो कि उनके मनोबल को तोड़ने का काम करता है। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है। ऐसे में कोरोना से लड़कर लौटे व्यक्ति का हौसला बढ़ाना चाहिए, न कि उसका तिरस्कार करना चाहिए। कोरोना की जंग जीतकर लौटे लोगों से की गई बातचीत...।

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कभी-कभी लगता है गांव छोड़ दें
बागपत में बड़ावद गांव निवासी राहुल चिकारा 17 जून को कोरोना पॉजिटिव मिला था। जब राहुल ठीक होकर गांव लौटा तो लोगों ने उसके व परिवार के साथ सौतेला व्यवहार करना शुरू कर दिया। राहुल ने बताया कि उसे देखते ही पड़ोसी दरवाजा बंद कर लेते हैं। मेरे परिवार से भी दूरी बनाने लगे। ऐसा लगता है कि जैसे हमने कोई बड़ा गुनाह किया हो। कभी-कभी तो लगता है कि गांव को ही छोड़ दें, लेकिन फिर इस विपरीत स्थिति में परिवार के लोग आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
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टूटने लगा था मनोबल
बुढ़ेड़ा गांव के राजेंद्र ने बताया कि पहले तो लोग खूब बातें करते थे। आते-जाते हाल-चाल पूछते थे, लेकिन जैसे ही कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट आई, उनका व्यवहार बदल गया। मुझे देखते ही लोग रास्ता बदल लेते हैं। मेरा मनोबल टूटने लगा था। हालांकि अब गांव के गणमान्यों ने समझाया तो लोगों के बर्ताव में कुछ सुधार आया है। 
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पड़ोसियों का व्यवहार खराब हो गया 
हिलवाड़ी गांव के शोएब को 17 जून को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। शोएब ने बताया कि बड़ी हिम्मत से काम लिया और कोरोना को हराया। लेकिन घर आते ही सबकुछ बदल गया। अब तो मेरे परिवार को देखते ही पड़ोसी दरवाजा बंद कर लेते हैं। पड़ोसी को शुभचिंतक होना चाहिए, लेकिन कई लोगों का व्यवहार खराब हो गया। कुछ लोगों ने तो दूध वाले और सब्जी वाले को भी हमारे घर में समान देने से मना कर दिया। 

क्या कहते हैं चिकित्सक 
डॉ. दिनेश बंसल का कहना है कि कोरोना किसी को भी हो सकता है, इसलिए बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए। कोरोना पीड़ित का हौसला बढ़ाना चाहिए, लेकिन कई लोग अछूतों जैसा व्यवहार करते हैं, जो गलत है। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। जब एक मरीज ठीक हो गया, तो उसके साथ और उसके परिवार के साथ सम्मान पूर्वक व्यवहार होना चाहिए।

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