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अधिकारी बनवाने के नाम पर करोड़ों का खेल, सामने आया असली मास्टरमाइंड का नाम

Fri, 28 Dec 2018 02:56 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 28 Dec 2018 02:56 PM IST
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Baghpat, gang has been exposed in recruitment of VDO Officer and name of main accused came to light
पकड़े गए गैंग के सदस्य - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) की परीक्षा में उत्तीर्ण कराने के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल किया गया। अभ्यर्थियों से वायदा किया कि उत्तर पुस्तिकाएं बदलकर उन्हें उत्तीर्ण करा दिया जाएगा। फतेहपुर के शिक्षामित्र बालकृष्ण मिश्रा ने गिरोह में कानपुर, मेरठ, बागपत और सोनीपत के सदस्य शामिल किए। शिक्षामित्र की पहुंच लखनऊ में सचिवालय तक है। एसटीएफ इसकी छानबीन करने में जुटी हुई है।
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एसटीएफ के सीओ बृजेश सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी बालकृष्ण मिश्रा ही हैं। अब तक 11 सदस्य चिन्हित किए हैं, इनमें दो सॉल्वर हैं। बालकृष्ण की तलाश में दबिश दी जा रही है। असल में गिरोह के बाकी सदस्यों का काम नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के कागज, चेक या नगदी को बालकृष्ण तक पहुंचाने की है। इसके बाद सचिवालय में पहुंच का दावा करने वाले शिक्षामित्र का खेल शुरू होता है। दावा किया गया कि उत्तर पुस्तिकाएं बदलकर उत्तीर्ण कराया जाएगा। इसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये तय की। अकेले बागपत से ही करीब 70 अभ्यर्थी गिरोह के संपर्क में हैं। आठ प्रवेशपत्र मिलने से आशंका है कि अभी तक आठ अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कराने का ठेका दिया।
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परीक्षा के बाद सक्रिय हुआ गैंग
इसी माह की 23 दिसंबर को आगरा में वीडीओ की परीक्षा हुई। परीक्षा में अच्छा स्कोर नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों की नब्ज टटोलकर उनसे ठेके लेने के लिए गिरोह सक्रिय हो गया। इसमें आम लोगों के बीच के सदस्यों को ही शामिल किया।

अरविंद राणा से तलाशा जा रहा गिरोह का लिंक
मूल रूप से शामली के रहने वाले और बड़ौत में रह कर कभी कोचिंग सेंटर चलाने वाले अरविंद राणा से भी वीडीओ की भर्ती का ठेका लेने वाले गिरोह का लिंक तलाशा जा रहा है। कई राज्य की भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा में अरविंद राणा का नाम सामने आ चुका है। कुछ माह पूर्व अरविंद राणा ने बिजरौल रोड पर कोचिंग सेंटर भी खोला, लेकिन जब कई माफिया पकडे़ गए तो वह सेंटर बंद कर गायब हो गया।

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