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गांव बड़ावद में हत्या से शुरू हुई थी रंजिश
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बड़ावद गांव निवासी किसान हरेन्द्र सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : BAGHPAT
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गांव बड़ावद में हत्या से शुरू हुई थी रंजिश
बिनौली(बागपत)। बड़ावद के संसार सिंह और शेर सिंह पक्ष के बीच पुरानी रंजिश है। मृतक किसान हरेंद्र का भतीजा तुषार और शिवम पुत्र संजीव दोस्त थे और बड़ौत के एक स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते थे। 17 जुलाई 2018 को बड़ावद गांव के जंगल में कुलदीप (20) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें तुषार, शिवम निवासी बड़ावद, विकास निवासी रंछाड़, राकेश निवासी गुराना को पुलिस ने गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया था।
पुलिस ने बताया था कि कुलदीप और निखिल जबरन तुषार व शिवम से बीयर मंगवाते थे और उनकी पिटाई करते थे। इससे तंग आकर उन्होंने कुलदीप व निखिल की हत्या करने की योजना बनाई थी। चारों ने कुलदीप को गोली मार दी थी। निखिल गोली लगने से बाल-बाल बच गया था। किसान हरेंद्र अपने भतीजे तुषार पुत्र गजेंद्र सिंह के मुकदमे की पैरवी करता था। तभी से उनके बीच रंजिश चल रही थी। हरेंद्र की हत्या का आरोपी निखिल लूट के एक मामले में इन दिनों मुजफ्फरनगर जेल में बंद है।
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हरेंद्र के घर पर कर चुके हैं फायरिंग
मृतक हरेंद्र के बड़े भाई बिजेंद्र सिंह चिकारा ने बताया कि निखिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर 25 अक्तूबर 2018 को हरेंद्र और शिवम के घर पर फायरिंग भी की थी। जिसमें निखिल, उसके भाई नितीश और पिता कृष्णपाल को पुलिस ने जेल भेजा था। तभी से वे हरेंद्र की हत्या करने की धमकी दे रहे थे।
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शामली एसपी के गनर को निखिल ने मारी थी गोली
बड़ावद गांव निवासी निखिल लूट व पुलिस मुठभेड़ के मामले में मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। चार माह पहले शामली में लूट कर भाग रहे निखिल व पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। निखिल ने एसपी के गनर को भी गोली मारकर घायल कर दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
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प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा निखिल
मुजफ्फरनगर जेल में बंद निखिल गांव में प्रधानी के चुनाव की तैयारी कर रहा था। जेल में रहते हुए उसने अपने गांव में दीपावली की शुभकामनाओं के पोस्टर भी चस्पा करा रखे हैं।
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एसपी से कई बार मांगी थी सुरक्षा
बिजेंद्र सिंह चिकारा ने बताया कि आरोपी निखिल उन्हें कई बार हत्या की धमकी दे चुका था, जिसके चलते एसपी ने उनके घर पर दो पुलिस कर्मियों को तैनात किया था, लेकिन कुछ दिन बाद हटा लिया था। उन्होंने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर फिर से सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने की मांगी थी, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। हरेंद्र शस्त्र लाइसेंस बनवाने की भी मांग कर चुका था, लेकिन प्रशासन ने लाइसेंस नहीं बनवाया। आरोप लगाया कि पुलिस अफसरों की लापरवाही के चलते हत्या हुई है।
परिवार में मचा कोहराम
हरेंद्र की हत्या के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। हरेंद्र की मां सुखवीरी और पत्नी अनीता का रो-रोकर बुरा हाल था। हरेंद्र का एक बेटा वंश और बेटी खुशी है। हरेंद्र चार भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़े भाई बिजेंद्र सिंह चिकारा यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद से रिटायर हैं। दूसरे नंबर के भाई योगेंद्र दिल्ली में शिक्षक हैं। उससे छोटे गजेंद्र घर पर रहकर खेती करते हैं। गजेंद्र की पत्नी सुमन पूर्व प्रधान हैं।
हरेंद्र के परिजनों ने खरीदी थी आरोपी की जमीन
पुलिस ने बताया कि कई साल पहले आरोपी कृष्णपाल ने अपनी कृषि भूमि बेच दी थी, जिसे हरेंद्र और उसके भाइयों ने खरीदा था।
हथियारों के साथ फोटो हुए थे वायरल
बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पांच माह पहले आरोपी नितीश व उसके भाई निखिल के सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो वायरल हुए थे। परिजनों ने पुलिस को फोटो भी दिए थे, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों का कहना है कि यदि पुलिस तुरंत एक्शन लेती तो उनके पास से भारी संख्या में हथियार बरामद हो सकते थे।
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बिनौली(बागपत)। बड़ावद के संसार सिंह और शेर सिंह पक्ष के बीच पुरानी रंजिश है। मृतक किसान हरेंद्र का भतीजा तुषार और शिवम पुत्र संजीव दोस्त थे और बड़ौत के एक स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते थे। 17 जुलाई 2018 को बड़ावद गांव के जंगल में कुलदीप (20) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें तुषार, शिवम निवासी बड़ावद, विकास निवासी रंछाड़, राकेश निवासी गुराना को पुलिस ने गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया था।
पुलिस ने बताया था कि कुलदीप और निखिल जबरन तुषार व शिवम से बीयर मंगवाते थे और उनकी पिटाई करते थे। इससे तंग आकर उन्होंने कुलदीप व निखिल की हत्या करने की योजना बनाई थी। चारों ने कुलदीप को गोली मार दी थी। निखिल गोली लगने से बाल-बाल बच गया था। किसान हरेंद्र अपने भतीजे तुषार पुत्र गजेंद्र सिंह के मुकदमे की पैरवी करता था। तभी से उनके बीच रंजिश चल रही थी। हरेंद्र की हत्या का आरोपी निखिल लूट के एक मामले में इन दिनों मुजफ्फरनगर जेल में बंद है।
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हरेंद्र के घर पर कर चुके हैं फायरिंग
मृतक हरेंद्र के बड़े भाई बिजेंद्र सिंह चिकारा ने बताया कि निखिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर 25 अक्तूबर 2018 को हरेंद्र और शिवम के घर पर फायरिंग भी की थी। जिसमें निखिल, उसके भाई नितीश और पिता कृष्णपाल को पुलिस ने जेल भेजा था। तभी से वे हरेंद्र की हत्या करने की धमकी दे रहे थे।
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शामली एसपी के गनर को निखिल ने मारी थी गोली
बड़ावद गांव निवासी निखिल लूट व पुलिस मुठभेड़ के मामले में मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। चार माह पहले शामली में लूट कर भाग रहे निखिल व पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। निखिल ने एसपी के गनर को भी गोली मारकर घायल कर दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
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प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा निखिल
मुजफ्फरनगर जेल में बंद निखिल गांव में प्रधानी के चुनाव की तैयारी कर रहा था। जेल में रहते हुए उसने अपने गांव में दीपावली की शुभकामनाओं के पोस्टर भी चस्पा करा रखे हैं।
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एसपी से कई बार मांगी थी सुरक्षा
बिजेंद्र सिंह चिकारा ने बताया कि आरोपी निखिल उन्हें कई बार हत्या की धमकी दे चुका था, जिसके चलते एसपी ने उनके घर पर दो पुलिस कर्मियों को तैनात किया था, लेकिन कुछ दिन बाद हटा लिया था। उन्होंने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर फिर से सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने की मांगी थी, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा मुहैया नहीं कराई। हरेंद्र शस्त्र लाइसेंस बनवाने की भी मांग कर चुका था, लेकिन प्रशासन ने लाइसेंस नहीं बनवाया। आरोप लगाया कि पुलिस अफसरों की लापरवाही के चलते हत्या हुई है।
परिवार में मचा कोहराम
हरेंद्र की हत्या के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। हरेंद्र की मां सुखवीरी और पत्नी अनीता का रो-रोकर बुरा हाल था। हरेंद्र का एक बेटा वंश और बेटी खुशी है। हरेंद्र चार भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़े भाई बिजेंद्र सिंह चिकारा यूपी पुलिस में कांस्टेबल पद से रिटायर हैं। दूसरे नंबर के भाई योगेंद्र दिल्ली में शिक्षक हैं। उससे छोटे गजेंद्र घर पर रहकर खेती करते हैं। गजेंद्र की पत्नी सुमन पूर्व प्रधान हैं।
हरेंद्र के परिजनों ने खरीदी थी आरोपी की जमीन
पुलिस ने बताया कि कई साल पहले आरोपी कृष्णपाल ने अपनी कृषि भूमि बेच दी थी, जिसे हरेंद्र और उसके भाइयों ने खरीदा था।
हथियारों के साथ फोटो हुए थे वायरल
बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पांच माह पहले आरोपी नितीश व उसके भाई निखिल के सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो वायरल हुए थे। परिजनों ने पुलिस को फोटो भी दिए थे, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पीड़ितों का कहना है कि यदि पुलिस तुरंत एक्शन लेती तो उनके पास से भारी संख्या में हथियार बरामद हो सकते थे।