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Meerut News: स्मार्ट स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए बदहाल शौचालय
Tue, 05 Nov 2024 01:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 05 Nov 2024 01:29 AM IST
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत 20 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम का शौचालय बदहाल है। शौचालय में ना पानी है ना ही सफाई की व्यवस्था। ऐसे में खिलाड़ियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रतिदिन 500 से एक हजार के बीच विभिन्न खेलों के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। लेकिन खिलाड़ियों के लिए बने शौचालय की हालत खस्ता है। मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही दाईं ओर बने महिला एवं पुरुष शौचालय में साल भर से पानी नहीं आ रहा है। इसकी वजह से शौचालय और यूरिनल में दुर्गंध मची है।
वाॅशबिशन में टोंटी तक नहीं है। फर्श की टाइल्स जगह जगह से टूटी पड़ी है। पुरुष और महिला दोनों शौचालयों की यही स्थिति है। ऐसे में खिलाड़ियों को शौचालय का इस्तेमाल करने में परेशानी रहती है। शौच करने के बाद खिलाड़ियों को हाथ भी बाहर लगे हैंडपंप पर आकर धुलने पड़ते हैं। यह स्थिति तब है, जबकि स्मार्ट सिटी योजना के तहत विभिन्न खेल परियोजनाओं पर 20 करोड़ रुपया खर्च किया गया है। कई खेल सुविधाएं स्मार्ट हुई हैं, लेकिन खिलाड़ियों की बुनियादी जरूरतों में से एक शौचालय बदहाल है।
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अधिकारी भी आते हैं खेलने
स्टेडियम में प्रतिदिन जनपद के बड़े अधिकारी बैडमिंटन और अन्य खेल खेलने के लिए आते हैं, जिनकी भी नजर आज तक शौचालय पर नहीं पड़ी है। कार्रवाई के डर से खिलाड़ी खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं। ऐसे में वह दुर्गंध भरे शौचालय का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
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शौचालय की कई बार मरम्मत कराई गई है, लेकिन कुछ खुराफाती खिलाड़ी टोंटी आदि तोड़ देते हैं। खिलाड़ियों को चाहिए कि वह जिम्मेदार बनें। शौचालय में जो भी कमियां हैं उन्हें दूर कराया जाएगा। - अनिमेष सक्सेना, खेल अधिकारी।
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डॉ. आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रतिदिन 500 से एक हजार के बीच विभिन्न खेलों के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। लेकिन खिलाड़ियों के लिए बने शौचालय की हालत खस्ता है। मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही दाईं ओर बने महिला एवं पुरुष शौचालय में साल भर से पानी नहीं आ रहा है। इसकी वजह से शौचालय और यूरिनल में दुर्गंध मची है।
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वाॅशबिशन में टोंटी तक नहीं है। फर्श की टाइल्स जगह जगह से टूटी पड़ी है। पुरुष और महिला दोनों शौचालयों की यही स्थिति है। ऐसे में खिलाड़ियों को शौचालय का इस्तेमाल करने में परेशानी रहती है। शौच करने के बाद खिलाड़ियों को हाथ भी बाहर लगे हैंडपंप पर आकर धुलने पड़ते हैं। यह स्थिति तब है, जबकि स्मार्ट सिटी योजना के तहत विभिन्न खेल परियोजनाओं पर 20 करोड़ रुपया खर्च किया गया है। कई खेल सुविधाएं स्मार्ट हुई हैं, लेकिन खिलाड़ियों की बुनियादी जरूरतों में से एक शौचालय बदहाल है।
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अधिकारी भी आते हैं खेलने
स्टेडियम में प्रतिदिन जनपद के बड़े अधिकारी बैडमिंटन और अन्य खेल खेलने के लिए आते हैं, जिनकी भी नजर आज तक शौचालय पर नहीं पड़ी है। कार्रवाई के डर से खिलाड़ी खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं। ऐसे में वह दुर्गंध भरे शौचालय का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
शौचालय की कई बार मरम्मत कराई गई है, लेकिन कुछ खुराफाती खिलाड़ी टोंटी आदि तोड़ देते हैं। खिलाड़ियों को चाहिए कि वह जिम्मेदार बनें। शौचालय में जो भी कमियां हैं उन्हें दूर कराया जाएगा। - अनिमेष सक्सेना, खेल अधिकारी।