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Meerut News: हस्तिनापुर में सहेजी जाएगी आयुर्वेद की धरोहर, स्थापित होगी चरक वाटिका

Wed, 08 Jul 2026 08:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 08:24 PM IST
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Ayurveda's heritage to be preserved in Hastinapur; 'Charak Vatika' to be established.
हस्तिनापुर में स्थापित होगी चरक वाटिका स्रोत वन विभाग
- मनोहरपुर कॉलोनी के पास 0.64 हेक्टेयर भूमि पर होगी स्थापित
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- विद्यार्थियों व आमजन को मिलेगी औषधीय पौधों की जानकारी


रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर (मेरठ)। आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को संरक्षित करने और औषधीय वनस्पतियों के संवर्धन के उद्देश्य से वन विभाग हस्तिनापुर में चरक वाटिका विकसित करेगा। यह वाटिका कस्बे की मनोहरपुर कॉलोनी के समीप स्थित राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र की 0.64 हेक्टेयर भूमि पर तैयार की जाएगी।

वन विभाग का लक्ष्य क्षेत्रीय जनता, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को औषधीय पौधों की पहचान, उनके आयुर्वेदिक महत्व तथा स्वास्थ्य लाभकारी गुणों से परिचित कराना और औषधीय पौधों के संरक्षण के साथ लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है। वन विभाग के अनुसार चरक वाटिका पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति और औषधीय जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। यहां लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे का औषधीय महत्व होगा। वाटिका में पौधों के नाम, उनके औषधीय गुण और उपयोग से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी, जिससे विद्यार्थी, शोधार्थी और आमजन आसानी से उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
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चरक वाटिका हस्तिनापुर में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेद के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बनेगी। वन आरक्षित क्षेत्र के बड़े भू भाग में कई पहल की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए यह स्थान भविष्य में औषधीय पौधों के अध्ययन और प्रकृति शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना भी रखता है। (संवाद)
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वाटिका में ये होंगे प्रमुख औषधीय पौधे

चरक वाटिका में नीम, आंवला, बेल, अर्जुन, हरड़, बहेड़ा, अशोक, कचनार, सहजन, सप्तपर्णी, पलाश, गूलर, पीपल, बरगद, जामुन, खैर, विजयसार, चंदन, महुआ, करंज, कदंब, अमलतास और पारिजात सहित अनेक औषधीय वृक्ष एवं वनस्पतियां लगाई जाएंगी। इन पौधों का उपयोग आयुर्वेद में विभिन्न रोगों के उपचार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वास्थ्य संवर्धन के लिए किया जाता है।


कोट...

चरक वाटिका का उद्देश्य औषधीय पौधों का संरक्षण और लोगों को उनके आयुर्वेदिक महत्व से परिचित कराना है। यहां लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे के औषधीय गुणों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि विद्यार्थी, शोधार्थी और आमजन भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा से जुड़ सकें। यह वाटिका औषधीय जैव विविधता के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी। -खुशबू उपाध्याय, वन क्षेत्राधिकारी, हस्तिनापुर
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