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Meerut News: यूं ही नहीं मिले अर्जुन अवाॅर्ड... बड़े कष्ट, ताने झेले हैं बेटियों ने

Fri, 03 Jan 2025 02:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2025 02:08 AM IST
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Arjuna Award was not received just like that...daughters have faced a lot of hardships and taunts.
मेरठ। नए साल में जिले की दो बेटियों ने कमाल कर दिया। ओलंपियन जैवलिन थ्रोअर अन्नू रानी और पैरालंपिक प्रीति पाल को अर्जुन अवार्ड के लिए चुना गया है। देश का दूसरा सबसे बड़ा खेल पुरस्कार बेटियों को यूं ही नहीं मिला है। इसके लिए इन्होंने बड़े कष्ट झेले हैं। अन्नू ने तो लोगों के ताने भी सुने हैं। प्रीतिपाल बचपन में ठीक से खड़ी भी नहीं हो पाती थीं, लेकिन बेटियों ने अपने जज्बे के आगे कठिनाइयों को बौना साबित कर दिया। खिलाड़ियों को राष्ट्रपति भवन में 17 जनवरी को यह पुरस्कार दिया जाएगा। इनके घर उत्सव का माहौल है। परिवार के सदस्य मिठाइयां बांट रहे हैं।
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पटियाला कैंप में अभ्यास कर रहीं अन्नू रानी ने बृहस्पतिवार को वीडियो कॉल पर जब मां मुन्नी देवी और भाई उपेंद्र को अवार्ड के बारे में बताया तो उनकी आंखें नम हो गईं। इसके बाद गांव में मिठाई बांटी गई। क्षेत्र में जश्न का माहौल है। अन्नू रानी के पिता अमरपाल सिंह ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि बेटी को बड़ा इनाम मिलेगा, आज हमारी खुशी का ठिकाना नहीं है। भाई उपेंद्र, जितेंद्र व भाभी दीपा व तनु ने फोन पर बात कर अन्नू को बधाई दी।
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खेत की चकरोड से शुरू हुआ सफर
गांव बहादरपुर निवासी अन्नू रानी ने खेत की चकरोड से अभ्यास कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक परचम लहराया है। गांवों की पगडंडियों पर खेलते और गन्ने को भाला बनाकर अभ्यास करने वाली अन्नू ने फिर नाम रोशन किया है। साधारण किसान परिवार में जन्मीं अन्नू अपने दोनों भाइयों के साथ खेती का हर काम करती थीं। उन्होंने खेतों में अभ्यास शुरू किया। पिता अमरपाल सिंह ने बेटी के खेल में रुचि नहीं ली तो अन्नू चुपके से अभ्यास करने लगीं। उनके बड़े भाई उपेंद्र कुमार 5,000 मीटर के धावक थे। उन्होंने बहन की प्रतिभा पहचानी और तैयारी शुरू कराई। वह अन्नू को जैवलिन थ्रो का अभ्यास करने के लिए सप्ताह में तीन दिन गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी के मैदान ले जाने लगे। किसान परिवार होने कारण पिता दोनों खिलाड़ियों का खर्च उठाने में असमर्थता सामने आई तो उपेंद्र ने खेल छोड़ दिया और बहन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए जुट गए।
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सपने पूरे करने के लिए पंख खोलो और आगे बढ़ो : अन्नू रानी
सरधना। गोल्डन गर्ल अन्नू रानी ने पटियाला कैंप से अमर उजाला से फोन पर बातचीत में कहा कि लड़कियों का जीवन आसान नहीं है, सामाजिक परिस्थितियों के कारण परिवार और समाज से लड़ना पड़ता है। लड़कियों को संघर्ष करते हुए अपने सपने पूरे करने होंगे। सपने पूरे करने के लिए पंख खोलो और आगे बढ़ो।

अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मैंने बांस और गन्ने को भाला बनाकर अभ्यास शुरू किया था। अगर संसाधन और सुविधाओं के चलते जैवलिन का इंतजार करती तो आज इस मुकाम पर पहुंचना मुमकिन नहीं था। मेरे संघर्ष, परेशानी और चुनौतियों ने मुझे डिगाने की हालात बने, लेकिन मैंने अपने लक्ष्य को दृढ़ संकल्प के साथ आज देश का तिरंगा फहराते हुए विदेश में राष्ट्रगान बजने के लम्हे ने जीवन की सभी परेशानियों को भुला दिया। मेरी सफलता आज मेरे गांव से लेकर क्षेत्र और देश में जो बेटियों के प्रति जो सोच बदली है। इस बड़ी उपलब्धि ने मेरे जीवन को सुकून देने वाला बना दिया है। इस उपलब्धि से क्षेत्र को नाज है। इससे गांव की अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। अन्नू ने बताया कि भाला फेंक की सबसे पहली शुरुआत में श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज दबथुवा की कक्षा 9 में, वह स्कूल में खेल प्रतियोगिता में मेडल जीतना चाहती थी। जबकि दो पदक वह अन्य खेलों में जीत चुकी थी। जिसमें तीन पदक जीतने के लिए एक की जरूरत थी। तीसरा पदक जीतने के लिए भाला फेंक में पंजीकरण कराने का निश्चय किया।

अन्नू की उपलब्धियां..
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ पदर्शन- 2022 में जमशेदपुर में होने वाली इंडियन ओपन जेवलिन थ्रो में 63.82 मीटर दूरी तय की
2023- एशियन गेम्स में 62.92 मीटर दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता
2021 - टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग।
2022- बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक
2019 - वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला का रिकॉर्ड।
2019 - एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक।
2017 - एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
2016 - साउथ एशियन गेम्स में रजत पदक।
2014 - एशियन गेम्स में कांस्य पदक।
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