बिजनौर में अपराजिता कार्यक्रम: आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य को प्राप्त कर रही हैं बेटियां
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम के तहत खालसा इंटर कॉलेज नूरपुर में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों ने छात्राओं से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते हुए निडर होकर सफलता के शिखर पर पहुंचने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हो रही हैं बेटियां। कार्यक्रम में छात्राओं को सामाजिक बुराइयों से लड़ने व नारी सशक्तिकरण की मुहिम में अहम भूमिका निभाने की शपथ दिलाई गई।
गुरुवार को विद्यालय में हुए कार्यक्रम में कक्षा नौ से 12 तक की छात्राओं ने भाग लिया। विद्यालय के शिक्षक जन्मेजय सिंह ने कहा कि हम भले ही आधुनिक युग में जी रहे हैं, लेकिन आज भी बेटियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं। बेटियों को बचपन से ही किस तरह से रहना है, ये सिखाया जाता है, लेकिन बेटों पर कोई रोक-टोक नहीं की जाती, यह सरासर गलत है।
आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नही हैं। जिस क्षेत्र में भी महिलाए जा रही हैं, वहां सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। बेटियों को बेटों से कमतर समझा जाना सरासर गलत है। नारी सही मायनों में तभी अपराजिता होगी जब भेदभाव बंद हो जाएगा और उसे भी आगे बढ़ने के लिए समान अवसर मिलेगा। उन्होंने छात्राओं से निडर होकर अपने पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
शिक्षक गुरुचरण सिंह ने नारी शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि एक शिक्षित नारी तीन परिवारों को शिक्षित करती है और शिक्षा के बिना सफलता पाना बेहद मुश्किल है। उन्होने इंदिरा नूई, किरण बेदी आदि कई सफल महिलाओं के उदाहरण देते हुए छात्राओं से उच्च शिक्षा प्राप्त कर सफलता के शिखर को छूने को कहा। कार्यक्रम को टेकचंद यादव, डॉ. योगेश कुमार, विमल सिंह, पंकज कुमार, मोहित कुमार, हरजीत सिंह, नरदेव सिंह आदि ने संबोधित किया।
अपने को कमतर नहीं समझने की मिली सीख
कक्षा 11 की छात्रा गुरप्रीत कौर ने कहा कि अमर उजाला द्वारा चलाई जा रही नारी सशक्तिकरण की मुहिम सराहनीय है। इस कार्यक्रम से सीख मिली है कि अपने को कमतर नही समझना है। कार्यक्रम से जीवन में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली है।
बेटा वंश है तो बेटियां अंश हैं
कक्षा 12 की छात्रा समरीन ने कहा कि बेटा अगर वंश है तो बेटियां अंश हैं। मन में कुछ कर गुजरने की ठान ले तो नारी के लिए कोई काम मुश्किल नहीं है। महिलाएं अपने आपको कभी कमजोर न समझें और परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करें।
स्वयं फैसला लेने का अधिकार दें अभिभावक
कक्षा 12 की छात्रा जसप्रीत कौर ने कहा कि अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने का अधिकार देना ही महिला को सशक्त बना सकता है। इसके अलावा स्वयं पर आत्मविश्वास भी जरूरी है। खुद पर विश्वास है तो महिला को कोई भी अपराजिता होने से नही रोक पाएगा।
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शिक्षा से ही मिलेगा मुकाम
कक्षा 12 की छात्रा सोनिया ने कहा कि शिक्षा जीवन के सभी अंधियारों को दूर करती है। आधुनिक युग में शिक्षित होना आवश्यक है। उच्च शिक्षा ही महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिला सकती है।
देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या कम
कक्षा 12 की छात्रा मनजीत कौर ने कहा कि भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या बेहद कम है। देश की आधी आबादी होने के बावजूद भी केवल 27 प्रतिशत महिलाए ही कामकाजी हैं। सोमालिया जैसे गरीब देश में भी कामकाजी महिलाओं की संख्या भारत से अधिक है।
अमर उजाला के कार्यक्रम से बढ़ा है मनोबल
शिक्षिका आभा त्यागी का कहना है कि अमर उजाला द्वारा चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम से छात्राओं का मनोबल बढ़ा है। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार और समाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के साथ-साथ लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी भी नारी अपराजिता बनेगी।
महिलाओं को मिले 50 प्रतिशत आरक्षण
शिक्षिका मधुबाला यादव का कहना है कि प्राचीनकाल में नारी पूजनीय थी और कई ऐसे उदाहरण है कि महिलाएं इतिहास में अमर हो गईं। मध्यकाल में महिलाओं की दशा काफी सोचनीय हो गई थी, लेकिन अब इसमें काफी सुधार आया है। महिलाओं को नौकरियों और राजनीति में 50 प्रतिशत आरक्षण मिले तभी उन्हें बराबरी का दर्जा मिल सकता है।
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