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एंटी करप्शन ने भी खंगाला इंस्पेक्टर का रिकॉर्ड
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एंटी करप्शन ने भी खंगाला इंस्पेक्टर का रिकॉर्ड
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जनपद पुलिस के साथ अब एंटी करप्शन ने भी दागी इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इंस्पेक्टर भूमिगत हो गए हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में कई जगह दबिश दी है, लेकिन सुराग नहीं लगा। चर्चा है कि इंस्पेक्टर हाईकोर्ट में स्टे लेने पहुंच गए हैं। भ्रष्टाचार के मुकदमे में थाने के जीडी में भी उनका फरार होना दर्ज कर लिया है।
भ्रष्टाचार में फंसे इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा को पुलिस टीम ढूंढ रही है। पुलिस दावा कर रही है कि गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त सुबूत हैं। विवेचक सीओ क्राइम ब्रांच संजीव दीक्षित ने बताया कि विवेचना चल रही है। हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह और मुकदमे के वादी वकार ने 161 के बयान में इंस्पेक्टर पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया, जिसके आधार पर इंस्पेक्टर को नामजद किया है।
हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी का पता लगते ही इंस्पेक्टर सदर लापता हो गए थे। आनन-फानन में इंस्पेक्टर ने पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप पर मेसेज करके थाने से रवानगी कर दी थी। चार दिन इंतजार के बाद सदर थाना पुलिस ने भी जीडी में इंस्पेक्टर को फरार लिख दिया। हालांकि, एसएसपी द्वारा उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया। इंस्पेक्टर को अब थाने की बजाय पुलिस लाइन में आमद दर्ज करानी होगी। एंटी करप्शन के एक इंस्पेक्टर ने भी बिजेंद्र राणा की जानकारी जुटाई है।
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ट्रक मालिक की भी तलाश
पुलिस के मुताबिक जेल जाने से पहले हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह और मुकदमे में वादी वकार ने बताया कि इंस्पेक्टर ने ट्रक मालिक इमरान से चार लाख रुपये रिश्वत के लिए हैं। पुलिस ने इमरान की तलाश भी शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर कार्रवाई के बाद वकार परिवार समेत फरार हो गया। इमरान भी सदर पुलिस के कई राज खोलेगा।
फर्जी मुकदमे को भूली पुलिस
इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ट्रक के फर्जी मुकदमे को भूल गई। ट्रक चोरी बताकर गाजियाबाद के मसूरी निवासी इमरान ने टीपीनगर थाने में तैनात दरोगा कामिल को तीन लाख रुपये देकर सदर थाने में मुकदमा कराया था। बीमा कंपनी की शिकायत पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर सदर से जांच कराई। इंस्पेक्टर ने फर्जी मुकदमे की पोल खोल दी, लेकिन खुद भ्रष्टाचार में फंस गए।
जांच में पता चले सिपाही के नाम
भ्रष्टाचार के मुकदमे में इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल के अलावा तीन अज्ञात पुलिस वाले भी हैं। सीओ क्राइम की जांच में सिपाहियों के नाम खुल गए हैं, जोकि सदर थाने के हैं और इंस्पेक्टर के बेहद करीबी थे। हालांकि अभी तक जांच में सामने आया कि इन सिपाहियों का रिश्वत के पैसे से लेना-देना नहीं है। मारपीट व अवैध हिरासत में सिपाहियों के नाम हैं। पुलिस तीनों सिपाहियों के नाम बताने से अभी बच रही है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जनपद पुलिस के साथ अब एंटी करप्शन ने भी दागी इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इंस्पेक्टर भूमिगत हो गए हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में कई जगह दबिश दी है, लेकिन सुराग नहीं लगा। चर्चा है कि इंस्पेक्टर हाईकोर्ट में स्टे लेने पहुंच गए हैं। भ्रष्टाचार के मुकदमे में थाने के जीडी में भी उनका फरार होना दर्ज कर लिया है।
भ्रष्टाचार में फंसे इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा को पुलिस टीम ढूंढ रही है। पुलिस दावा कर रही है कि गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त सुबूत हैं। विवेचक सीओ क्राइम ब्रांच संजीव दीक्षित ने बताया कि विवेचना चल रही है। हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह और मुकदमे के वादी वकार ने 161 के बयान में इंस्पेक्टर पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया, जिसके आधार पर इंस्पेक्टर को नामजद किया है।
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हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी का पता लगते ही इंस्पेक्टर सदर लापता हो गए थे। आनन-फानन में इंस्पेक्टर ने पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप पर मेसेज करके थाने से रवानगी कर दी थी। चार दिन इंतजार के बाद सदर थाना पुलिस ने भी जीडी में इंस्पेक्टर को फरार लिख दिया। हालांकि, एसएसपी द्वारा उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया। इंस्पेक्टर को अब थाने की बजाय पुलिस लाइन में आमद दर्ज करानी होगी। एंटी करप्शन के एक इंस्पेक्टर ने भी बिजेंद्र राणा की जानकारी जुटाई है।
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ट्रक मालिक की भी तलाश
पुलिस के मुताबिक जेल जाने से पहले हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह और मुकदमे में वादी वकार ने बताया कि इंस्पेक्टर ने ट्रक मालिक इमरान से चार लाख रुपये रिश्वत के लिए हैं। पुलिस ने इमरान की तलाश भी शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर कार्रवाई के बाद वकार परिवार समेत फरार हो गया। इमरान भी सदर पुलिस के कई राज खोलेगा।
फर्जी मुकदमे को भूली पुलिस
इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ट्रक के फर्जी मुकदमे को भूल गई। ट्रक चोरी बताकर गाजियाबाद के मसूरी निवासी इमरान ने टीपीनगर थाने में तैनात दरोगा कामिल को तीन लाख रुपये देकर सदर थाने में मुकदमा कराया था। बीमा कंपनी की शिकायत पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर सदर से जांच कराई। इंस्पेक्टर ने फर्जी मुकदमे की पोल खोल दी, लेकिन खुद भ्रष्टाचार में फंस गए।
जांच में पता चले सिपाही के नाम
भ्रष्टाचार के मुकदमे में इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल के अलावा तीन अज्ञात पुलिस वाले भी हैं। सीओ क्राइम की जांच में सिपाहियों के नाम खुल गए हैं, जोकि सदर थाने के हैं और इंस्पेक्टर के बेहद करीबी थे। हालांकि अभी तक जांच में सामने आया कि इन सिपाहियों का रिश्वत के पैसे से लेना-देना नहीं है। मारपीट व अवैध हिरासत में सिपाहियों के नाम हैं। पुलिस तीनों सिपाहियों के नाम बताने से अभी बच रही है।