विभांशु की मौत पर भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
भाजपा नेता विभांशु वशिष्ठ की कोरोना संक्रमण से मृत्यु के बाद जहां पार्टी के बड़े नेता सकते में हैं, वही कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। भाजपा महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल के बेहद करीबी विभांशु वशिष्ठ को गुरुवार रात को हालत बिगड़ने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया था। विभांशु की मृत्यु ने एक बार फिर से कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
मेडिकल में अव्यवस्था
मेडिकल अस्पताल में भर्ती होने के वक्त विभांशु की पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं से बात हुई थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि विभांशु ने बताया था कि मेडिकल में इलाज तो दूर देखरेख की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अव्यवस्था हावी है। इस अस्पताल से बाहर निकालकर कहीं दूसरी जगह इलाज कराने की बात कही थी। बाहर नहीं ले जाया गया और विभांशु की हालत लगातार बिगड़ती गई।
अस्पताल प्रबंधन ने बरती लापरवाही
विभांशु के चाचा ने अमर उजाला को बताया कि विभांशु की हालत मेडिकल में जाने के बाद ज्यादा बिगड़ी। उससे पहले उसे कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन मेडिकल अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमण के दौरान पैदा हुई किसी अन्य बीमारी पर कोई ध्यान नहीं दिया। आंत की बीमारी उसे वहीं पर हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभांशु की मृत्यु बृहस्पतिवार को मेडिकल अस्पताल में ही हो गई थी, लेकिन अपनी मौत का आंकड़ा घटाने के लिए उन्होंने दिल्ली रेफर कर दिया। इससे पहले वह कई बार दूसरे अस्पताल में रेफर करने की मांग कर चुके थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
तो बच सकती थी विभांशु की जिंदगी
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि सक्रिय होते तो विभांशु की जिंदगी बच सकती थी। उनका कहना है कि अपनी सरकार होने के बावजूद हम एक सक्रिय कार्यकर्ता को उचित इलाज नहीं दिला सके। यह पार्टी नेताओं की नाकामयाबी है।
क्वारंटीन के नाम पर नेता खुद शहर से बाहर गए, घरों में कैद कर लिया,लेकिन अधिकारियों पर इस बात का दबाव नहीं बना सके कि विभांशु को बेहतर इलाज मिल सके। कार्यकर्ता दबी जुबान से इसके लिए पूरी तरीके से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दोषी ठहरा रहे हैं।
प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री से बात की है, वहीं भाजपा के भी कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के साथ साथ मंत्रियों से बात की है। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हो रही लापरवाही पर पूरी रिपोर्ट भेजी गई है।
इसके साथ ही लॉक डाउन के दौरान लग रही भीड़ और तमाम बिंदुओं पर संबंधित पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्दी कोई बड़ा एक्शन मेरठ में शासन की तरफ से हो सकता है।