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Meerut News: खेल उद्योग के लिए आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश ने दिए निवेश के प्रस्ताव
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- भूमि दिलाने के लिए इन्वेस्ट यूपी के सीईओ से आज मिलेगा उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से मेरठ में खेल उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। ये राज्य इसके लिए भूमि उपलब्ध कराने को भी तैयार हैं। इसी तरह प्रदेश सहित अन्य राज्यों में पर्याप्त भूमि और खेल उद्योग के विस्तार की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।
इसी उम्मीद में स्पोर्ट्स गुड्स एंड टॉय एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल के नेतृत्व में लखनऊ में इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद से बुधवार को मिलेगा। इस दौरान शहर के खेल उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि और आधारभूत सुविधाओं की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि उपयुक्त भूमि चिह्नित कर सरकार को अवगत करा दिया गया है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि खेल उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भूमि के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है, तभी मेरठ में देश के साथ ही विदेशों से भी कंपनियां आएंगी। उन्होंने बताया कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ आंध्र प्रदेश की ओर से एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें अमरावती में मेरठ के खेल उद्योगों को इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। वहीं, मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अधिकारी चंद्र मौली शुक्ला द्वारा भेजे गए पत्र में भी मेरठ के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों पर उद्यमियों की नजर
सुमनेश अग्रवाल ने कहा कि अन्य राज्यों की ओर से लगातार आकर्षक प्रस्ताव मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक कोई विशेष ऑफर सामने नहीं आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार खेल उद्योगों की आवश्यकताओं को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 और 2036 के संभावित अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को ध्यान में रखते हुए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। स्पोर्ट्स गुड्स एंड टॉय एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल के पदाधिकारी संजय भल्ला ने बताया कि शहर के खेल उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्र के आसपास ही उद्योग विस्तार के लिए जमीन चाहिए। उद्यमी गंगा एक्सप्रेसवे पर उद्योग स्थापित करने में असमर्थ हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से मेरठ में खेल उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। ये राज्य इसके लिए भूमि उपलब्ध कराने को भी तैयार हैं। इसी तरह प्रदेश सहित अन्य राज्यों में पर्याप्त भूमि और खेल उद्योग के विस्तार की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।
इसी उम्मीद में स्पोर्ट्स गुड्स एंड टॉय एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल के नेतृत्व में लखनऊ में इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद से बुधवार को मिलेगा। इस दौरान शहर के खेल उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि और आधारभूत सुविधाओं की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि उपयुक्त भूमि चिह्नित कर सरकार को अवगत करा दिया गया है लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
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उन्होंने कहा कि खेल उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भूमि के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है, तभी मेरठ में देश के साथ ही विदेशों से भी कंपनियां आएंगी। उन्होंने बताया कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ आंध्र प्रदेश की ओर से एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें अमरावती में मेरठ के खेल उद्योगों को इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। वहीं, मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अधिकारी चंद्र मौली शुक्ला द्वारा भेजे गए पत्र में भी मेरठ के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने तथा आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों पर उद्यमियों की नजर
सुमनेश अग्रवाल ने कहा कि अन्य राज्यों की ओर से लगातार आकर्षक प्रस्ताव मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक कोई विशेष ऑफर सामने नहीं आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार खेल उद्योगों की आवश्यकताओं को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 और 2036 के संभावित अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को ध्यान में रखते हुए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। स्पोर्ट्स गुड्स एंड टॉय एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल के पदाधिकारी संजय भल्ला ने बताया कि शहर के खेल उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्र के आसपास ही उद्योग विस्तार के लिए जमीन चाहिए। उद्यमी गंगा एक्सप्रेसवे पर उद्योग स्थापित करने में असमर्थ हैं।