ग्रीन कॉरिडोर से 2.20 घंटे में हरिद्वार से दिल्ली पहुंची एंबुलेंस, ड्राइवर को नहीं लगाने पड़े ब्रेक
- छह घंटे सामान्यतया सड़क मार्ग से लगते हैं हरिद्वार से दिल्ली तक
- 54 किमी का मेरठ सीमा का सफर 28 मिनट में कराया गया पूरा
- गंगा को बचाने के लिए धरने पर बैठीं हैं साध्वी पद्मावती
- हालत बिगड़ने पर नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरिद्वार से दिल्ली तक पहली बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस को दिल्ली पहुंचाया गया। हरिद्वार में गंगा रक्षा सहित कई मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहीं मातृ सदन की अनुयायी साध्वी पद्मावती की तबीयत सोमवार सुबह बिगड़ गई थी। उन्हें एंबुलेंस से नई दिल्ली के एम्स ले जाया गया।
लखनऊ से मैसेज आते ही मेरठ पुलिस ने 45 मिनट में एनएच-58 पर ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर दिया। मुजफ्फरनगर से गाजियाबाद की सीमा तक हाईवे पर पुलिस लगा दी गई। एंबुलेंस ने मेरठ सीमा की 54 किमी की दूरी महज 28 मिनट में पार की। हरिद्वार से दिल्ली एम्स तक की दूरी 2.20 घंटे में तय की।
ग्रीन कॉरिडोर के लिए हाईवे पर सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया था। शाम 4:30 बजे लखनऊ से कंट्रोल रूम से मेरठ को सूचना दी गई। तत्काल मेरठ में एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई को नोडल अफसर बनाया गया। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि करीब 5:15 बजे एंबुलेंस ने मेरठ सीमा में प्रवेश किया और 5:43 बजे गाजियाबाद सीमा में पहुंच गई। इस दौरान एनएच 58 का सारा ट्रैफिक रोका गया।
एंबुलेंस ड्राइवर को कहीं ब्रेक नहीं लगाने पड़े। एंबुलेंस के साथ हरिद्वार पुलिस की एक गाड़ी चल रही थी। ट्रैफिक को करीब 20 मिनट पहले ही रोक लिया गया। संबंधित जिलों की सीमा पर वहां की पुलिस एंबुलेंस से करीब एक किमी आगे-आगे चल रही थी। हाईवे पर पहली बार ग्रीन कॉरिडोर लागू होते देखकर लोग हैरान थे। शुरुआत में लोगों ने समझा कि वीआईपी आ रहे होंगे, लेकिन अबकी बार तो व्यवस्था अलग थी।
छह घंटे का सफर 2:20 घटे में पूरा किया
हरिद्वार कंट्रोल रूम के मुताबिक हरिद्वार से दिल्ली का सफर ग्रीन कॉरिडोर में एंबुलेंस ने करीब 2 घंटे 20 मिनट में पूरा किया। अमूमन एंबुलेंस को लगभग पांच घंटे और आम पब्लिक को छह घंटे हरिद्वार से दिल्ली जाने में लग जाते हैं। ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराकर साध्वी पद्मावती को को समय से अस्पताल तक पहुंचाया गया और उपचार दिलाया।
पहली बार बनी मेरठ में यह व्यवस्था
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई का कहना है कि मेरठ में पहली बार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। ग्रीन कॉरिडोर बनाने की सूचना मिलने के बाद व्यवस्था बनाने के लिए सिर्फ 45 मिनट थे। सफलतापूर्वक ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर दिया गया।
130 की स्पीड से दौड़ रही थी एंबुलेंस
बताया गया कि हरिद्वार से करीब 130 की स्पीड से एंबुलेंस ग्रीन कॉरिडोर में दौड़ रही थी। आगे आगे सारी व्यवस्था बनाई जा रही थी। दिल्ली में कई बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया। हैदराबाद में भी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक मासूम बच्ची की जान बचाई गई थी। डॉक्टरों ने कहा था कि अगर इलाज में पांच मिनट देरी हो जाती तो बच्ची की मौत हो सकती थी।
लखनऊ से मैसेज आते ही मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद के कप्तान को अलर्ट किया गया था। ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था बनाकर एंबुलेंस को दिल्ली तक पहुंचाया गया। एंबुलेंस में मरीज को समय से दिल्ली पहुंचकर इलाज मिला है। मेरठ में ग्रीन कॉरिडोर की पहली बार व्यवस्था बनाई गई। -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन