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Meerut News: अमावस्या कल, पितरों को तृप्त करने का बेहतर अवसर
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। अश्विन मास की अमावस्या रविवार को है। इसके साथ ही पितृ पक्ष का समापन होगा। इस विशेष तिथि को पितृ मोक्ष अमावस्या के रूप में जाना जाता है। यह दिन उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के श्राद्ध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इस दिन सभी पितरों को तर्पण और दान से संतुष्ट किया जाता है। इसके बाद वे वायु रूप में धरती से अपने लोक वापस चले जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि सूर्य की सहस्र किरणों में से सबसे प्रमुख किरण 'अमा' कहलाती है। इस किरण के तेज से सूर्य तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं और इसी अमा में अमावस्या तिथि को चंद्रदेव निवास करते हैं। इसी कारण इस तिथि को अमावस्या कहा जाता है। पितृ अमावस्या अक्षय फल देने वाली होती है।
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि पितृ अमावस्या पर धरती पर आए पितरों को याद कर उन्हें विदाई दी जाती है। यदि पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया गया हो तो केवल अमावस्या पर उन्हें याद करने से ही तृप्ति मिलती है। पितर इस दिन भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पिता और नाना की तीन-तीन पीढ़ियों के पुरखों का स्मरण कर उन्हें तर्पण का जल अर्पित करना चाहिए। हाथ जोड़कर पितृ गायत्री का तीन बार पाठ कर पितरों का विसर्जन किया जाता है।
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सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
पीपल पूजा : पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाइयां रखकर पीपल की पूजा करें और पितरों से आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करें। माना जाता है कि इससे पितर संतुष्ट होकर अपने लोक लौटते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है, रोग कम होते हैं और धन की वृद्धि होती है।
दीपक जलाना : शाम के समय, घर के बाहर किसी खुले स्थान या छत पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाएं और पितरों को नमस्कार कर प्रार्थना करें। इन अनुष्ठानों के माध्यम से व्यक्ति अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
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मेरठ। अश्विन मास की अमावस्या रविवार को है। इसके साथ ही पितृ पक्ष का समापन होगा। इस विशेष तिथि को पितृ मोक्ष अमावस्या के रूप में जाना जाता है। यह दिन उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के श्राद्ध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इस दिन सभी पितरों को तर्पण और दान से संतुष्ट किया जाता है। इसके बाद वे वायु रूप में धरती से अपने लोक वापस चले जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि सूर्य की सहस्र किरणों में से सबसे प्रमुख किरण 'अमा' कहलाती है। इस किरण के तेज से सूर्य तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं और इसी अमा में अमावस्या तिथि को चंद्रदेव निवास करते हैं। इसी कारण इस तिथि को अमावस्या कहा जाता है। पितृ अमावस्या अक्षय फल देने वाली होती है।
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आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि पितृ अमावस्या पर धरती पर आए पितरों को याद कर उन्हें विदाई दी जाती है। यदि पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया गया हो तो केवल अमावस्या पर उन्हें याद करने से ही तृप्ति मिलती है। पितर इस दिन भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पिता और नाना की तीन-तीन पीढ़ियों के पुरखों का स्मरण कर उन्हें तर्पण का जल अर्पित करना चाहिए। हाथ जोड़कर पितृ गायत्री का तीन बार पाठ कर पितरों का विसर्जन किया जाता है।
सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
पीपल पूजा : पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाइयां रखकर पीपल की पूजा करें और पितरों से आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करें। माना जाता है कि इससे पितर संतुष्ट होकर अपने लोक लौटते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है, रोग कम होते हैं और धन की वृद्धि होती है।
दीपक जलाना : शाम के समय, घर के बाहर किसी खुले स्थान या छत पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाएं और पितरों को नमस्कार कर प्रार्थना करें। इन अनुष्ठानों के माध्यम से व्यक्ति अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।